चैत्र नवरात्र २०२०

19 मार्च 2020   |  डॉ पूर्णिमा शर्मा   (286 बार पढ़ा जा चुका है)

चैत्र नवरात्र 2020 की तिथियाँ

बुधवार 25 मार्च को चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से घट स्थापना तथा माँ दुर्गा के प्रथम स्वरूप “शैलपुत्री” की उपासना के साथ ही चैत्र नवरात्र या वासन्तिक नवरात्र या साम्वत्सरिक नवरात्र के रूप में माँ भवानी के नवरूपों की पूजा अर्चना आरम्भ हो जाएगी और इसी के साथ आरम्भ हो जाएगा "प्रमादी" नाम का विक्रम सम्वत 2077 तथा "शार्वरी" नाम का शालिवाहन शक सम्वत 1942 | सभी को भारतीय वैदिक नववर्ष की अनेकशः हार्दिक शुभकामनाएँ...

यों प्रतिपदा तिथि का आरम्भ 24 मार्च को दिन में 2:59 के लगभग हो जाएगा और पच्चीस मार्च को दिन में पाँच बजकर अट्ठाईस मिनट तक रहेगी | 24 मार्च को सूर्योदय में प्रतिपदा तिथि नहीं होने के कारण घट स्थापना अगले दिन यानी 25 मार्च को की जाएगी | इस दिन सूर्योदय प्रातः छह बजकर उन्नीस मिनट पर है | इस समय सूर्य मीन राशि तथा उत्तर भाद्रपद नक्षत्र पर और चन्द्रमा मीन राशि तथा रेवती नक्षत्र पर होगा | बव करण और ब्रह्म योग होगा | शनि स्वराशिगत मकर में उच्च के मंगल के साथ रहेगा | प्रातः 6:19 से 7:17 घट स्थापना का मुहूर्त विद्वान् पण्डित लोगों ने बताया है | बुधवार होने के कारण इस दिन अभिजित नक्षत्र नहीं है, इसलिए इस नक्षत्र का लाभ उठाकर देर से घट स्थापना नहीं की जा सकती | किन्तु साथ ही व्यक्तिगत रूप से घट स्थापना का मुहूर्त जानने के लिए अपने Astrologer से अपनी कुण्डली के अनुसार मुहूर्त ज्ञात करना होगा | गुरूवार दो अप्रेल को कन्या पूजन के साथ ही विसर्जन हो जाएगा | अस्तु, सर्वप्रथम सभी को नव सम्वत्सर, गुडी पर्व और उगडी या युगादि की हार्दिक शुभकामनाएँ…

नवरात्रि के महत्त्व के विषय में विशिष्ट विवरण मार्कंडेय पुराण, वामन पुराण, वाराह पुराण, शिव पुराण, स्कन्द पुराण और देवी भागवत आदि पुराणों में उपलब्ध होता है | इन पुराणों में देवी दुर्गा के द्वारा महिषासुर के मर्दन का उल्लेख उपलब्ध होता है | महिषासुर मर्दन की इस कथा को “दुर्गा सप्तशती” के रूप में देवी माहात्मय के नाम से जाना जाता है | नवरात्रि के दिनों में इसी माहात्मय का पाठ किया जाता है और यह बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक माना जाता है | जिसमें 537 चरणों में सप्तशत यानी 700 मन्त्रों के द्वारा देवी के माहात्मय का जाप किया जाता है | इसमें देवी के तीन मुख्य रूपों – काली अर्थात बल, लक्ष्मी और सरस्वती की पूजा के द्वारा देवी के तीन चरित्रों – मधुकैटभ वध, महिषासुर वध तथा शुम्भ निशुम्भ वध का वर्णन किया जाता है | इस वर्ष नवरात्रों की तिथियाँ इस प्रकार हैं…

बुधवार 25 मार्च चैत्र शुक्ल प्रतिपदा देवी के शैलपुत्री रूप की उपासना

कलश स्थापना

गुरूवार 26 मार्च चैत्र शुक्ल द्वितीया देवी के ब्रह्मचारिणी रूप की उपासना

शुक्रवार 27 मार्च चैत्र शुक्ल तृतीया देवी के चन्द्रघंटा रूप की उपासना

शनिवार 28 मार्च चैत्र शुक्ल चतुर्थी देवी के कूष्माण्डा रूप की उपासना

रविवार 29 मार्च चैत्र शुक्ल पञ्चमी देवी के स्कन्दमाता रूप की उपासना

सोमवार 30 मार्च चैत्र शुक्ल षष्ठी देवी के कात्यायनी रूप की उपासना

मंगलवार 31 मार्च चैत्र शुक्ल सप्तमी देवी के कालरात्रि रूप की उपासना

बुधवार 1 अप्रेल चैत्र शुक्ल अष्टमी देवी के महागौरी रूप की उपासना

गुरूवार 2 अप्रेल चैत्र शुक्ल नवमी देवी के सिद्धिदात्री रूप की उपासना

राम जन्म महोत्सव – राम नवमी

माँ भगवती सभी का कल्याण करें… सभी को नव सम्वत्सर, गुडी पर्व, उगडी या युगादि तथा नवरात्र की हार्दिक शुभकामनाएँ…

अगला लेख: १६ से २२ मार्च तक का सम्भावित साप्ताहिक राशिफल



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