दुनिया में फैली 5+ महामारियां

24 मार्च 2020   |  मोनिका चौधरी   (313 बार पढ़ा जा चुका है)

इन दिनों कोरोना वायरस नाम के वायरस ने दुनियाभर में कोहराम मचा रखा है ,जिसे अब महामारी (pandemic) घोसित कर दिया गया है | लेकिन ये पहली कोई बीमारी नहीं है जिससे दुनिया बेहाल है इससे पहले भी बहुत सी गंभीर महामारी (pandemics) दुनिया में फ़ैल चुकी हैं , तो चलाइये आपको बताते हैं covid-19 से फैली महामारियों के बारे में -


सबसे पहले आपको बता दें कि कोरोना वायरस यानि covid-19 की शुरुआत चीन के वुहान शहर में दिसंबर 2019 महीने में हुई थी ,और अभी तक कोरोना लगभग सभी देशों में फ़ैल चुका है ,और अभी तक इस बीमारी से लड़ने के लिए कोई भी वैक्सीन नहीं बनी है | पर कोरोना ऐसी अकेली बीमारी नहीं है जिससे लोगो की मौत हुई है , कोरोना से पहले ऐसी बहुत सी महामारी आयी हैं जिन्होंने दुनिया में कोहराम मचाया था और हजार नहीं करोड़ो लोगो की महामारियों के कारण मौत भी हुई है, इस लेख में हम आपको कोरोना से पहले दुनिया में कोहराम मचने वाली महामारियों के बारे में बताएँगे -


इस लेख में हम आपको कोरोना से पहले दुनिया में कोहराम मचने वाली महामारियों के बारे में बताएँगे -


1. स्पैनिश फ्लू -

ये फ्लू कोरोना वायरस से भी खतरनाक थी , इस फ्लू ने 1918 में दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया था। कम से कम 5 करोड़ लोगों की मौत इसकी वजह से हुई थी। यह दुनिया के हर हिस्से में फैल गई थी। जापान, अर्जेंटिना और अन्य दर्जनों देशों में इससे लोग प्रभावित हुए थे।

अमेरिका में स्पैनिश फ्लू के शुरुआती मामले मार्च 1918 में सामने आए थे। अभी की तरह उस समय दुनिया आपस में नहीं जुड़ी हुई थी। समुद्री मार्गों से ही एक देश से दूसरे देश आना-जाना होता था। फिर भी यह बीमारी काफी तेजी से फैली। तुरंत ही यह महामारी अलास्का के सुदूर इलाकों में पहुंच गई। करीब दो सालों तक इसका कहर जारी रहा। ऐसा माना जाता है कि इस बीमारी की शुरुआत सैनिकों से हुई थी। उस समय पहला विश्वयुद्ध चल रहा था। सैनिकों के बंकरों के आसपास गंदगी की वजह से यह महामारी सैनिकों में फैली और जब सैनिकों अपने-अपने देश लौटे तो वहां भी यह बीमारी फैल गई।


लेकिन अभी कुछ इतिहासकारों के मुताबिक माना जा रहा है की स्पेनिश फ्लू की भी शुरुआत चीन से ही हुई थी | इस थिअरी के मुताबिक, स्पैनिश फ्लू की शुरुआत साल 1917 के आखिरी हिस्से में उत्तरी चीन में हुई। वहां से यह बीमारी पश्चिमी यूरोप में फैली क्योंकि फ्रांस और ब्रिटेन की सरकारों ने मजदूरी के कामों के लिए 1 लाख से ज्यादा चीनी मजदूरों को नौकरी पर रखा था। उन मजदूरों के साथ यह बीमारी यूरोप पहुंची।

किस उम्र के लोगो को और कैसे हुआ था स्पैनिश फ्लू - स्पैनिश फ्लू ने जवानों और नवजातों को निशाना बनाया था। इसमें काम उम्र के लोगो को जयदा ये बीमारी फैली थी | उस समय इलाज की इतनी सुविधा नहीं थी जितनी अभी है। उस समय स्वास्थ्य और बीमारी संबंधित शोध की भी सुविधा नहीं थी। और ये वर्ल्ड वॉर के समय आया था तो बिना किसी इलाज़ और पता लगे अनेकों मौत हुई थी |

स्पेनिश फ्लू हवा के जरिए फैलता है। इंसान की सांस से हवा में फैलने के बात यह अन्य इंसानों को अपनी चपेट में ले सकता है।


2. एशियन फ्लू -

(साल 1956-1958)

मौत का आंकड़ा: 20 लाख

कारण: इंफ्लूएंजा

एशियन फ्लू भी ए ग्रेड का इंफ्लूंजा है, ये भी दुनिया में बुरी तरह से फैला था | जो H2N2 से फैलता है. इसकी शुरुआत साल 1956 से हुई और यह साल 1958 तक इसका कहर जारी रहा था | रिपोर्ट्स के मुताबिक इस फ्लू से सबसे जयदा अमेरिकी लोगों की मौत हुई थी | इतिहासकारों अनुसार ये बहुत देशों में फैला था | जिनमें से सिंगापुर, हांगकांग और अमेरिका में बड़े स्तर पर बीमारी को देखा गया था | विश्व स्वास्थ संगठन के अनुसार, इसने 20 लाख लोगों को मारा, जिसमें से 69,800 लोग अमेरिकी थे.|

एशियन फ्लू को भी महामारी( pandemic ) घोषित कर दिया था ,एशियन फ्लू के लक्षण बुखार, खांसी , बुखार , बदन में दर्द जैसे आम ही हैं | और किसी भी उम्र के इंसान को हो सकता है , और इससे रिकवर करने में 2 से 3 हफ्ते लग सकते हैं और स्तिथि खराब होने पर मरीज की मौत भी हो सकती है |


3. फ्लू महामारी जिसे होन्ग कोंग फ्लू भी जाना जाता है

मौत का आंकड़ा: 10 लाख

कारण: इंफ्लूएंजा

दूसरी श्रेणी की फ्लू महामारी (pandemic ) को हांगकांग फ्लू के नाम से भी जाना जाता है. इसका कारण H3N2 कीटाणु हैं, जो इंफ्लूएंजा महामारी पैदा करने वाले H2N2 वायरस की एक प्रजाती है. इसका पहला मामला 13 जुलाई 1968 में हांगकांग में आया था और 17 दिनों में ही यह सिंगापुर और वियतनाम तक पहुंच गया.| इस फ्लू के दौरान शुरुआत में बुखार, खांसी , जैसी चीज़े सामने आती हैं |

महज तीन महीने में फिलिपींस, भारत, ऑस्ट्रेलिया, यूरोप और अमेरिका भी इसके शिकार हो गए. इस बीमारी के शिकार होने वाले सिर्फ 5 फीसदी लोगों की मौत होती थी, मगर इसने तब हांगकांग के 5 लाख लोगों यानी उसकी तत्कालीन 15 फीसदी आबादी को मार डाला था. इस महामारी ने दुनिया के बड़े हिस्से को ख़त्म कर दिया था और बहुत सा नुक्सान भी इस कारण हुआ था |

होन्ग कोंग फ्लू 1968 से 1970 तक अपने असर से दुनिया में इतने वक़्त तक तबाही मचाई थी

इस फ्लू से शुरुआत में ही अमेरिका के 34000 लोगों की मौत हो गयी थी |


4. ​तीसरी श्रेणी का हैजा

(साल 1852-1860)

मौत का आंकड़ा: 10 लाख

कारण: हैजा (कॉलेरा)

हैजा की सात श्रेणियों में से इस हैजा को सबसे अधिक जानलेवा माना जाता है.

इस रोग की शुरुआत 19वीं सदी में हुई थी. मगर इसका प्रकोप साल 1852 से 1860 के दौरान सबसे अधिक रहा. इसकी शुरुआत भारत से हुई और फिर यह दुनिया के कोने कोने में बुरी तरह से फ़ैल गया और इसकी चपेट में एशिया, यूरोप, उत्तरी अमेरिका और अफ्रीका तक फैल गया.

इसने 10 लाख लोगों की जान ली. ब्रिटिश डॉक्टर जॉन स्नो ने गरीब इलाकों में रहते हुए इसकी पहचान की. उन्होंने पता लगाया कि खराब पानी इसकी सबसे बड़ी वजह है. हालांकि, साल 1854 में इस बीमारी ने ग्रेट ब्रिटेन में 23,000 लोगों को मौत के घाट उतारा.

​तीसरी श्रेणी का हैजा किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकता है , चाहे बच्चे, बड़े या बुजुर्ग खान पान और में सफाई नही होती तो ये बीमारी फैलती है | और ज़्यदातर गन्दा पानी पीने से ये बीमारी जन्म लेती है |


5. इबोला?

पश्चिम अफ़्रीकी देशों गिनी, सियेरा लियोन और नाइजीरिया में इबोला वायरस का संक्रमण फैला था | क़रीब 930 लोगों की मौत हो चुकी है. लाइबेरिया ने इस बीमारी के चलते आपातकाल घोषित किया था |

who के अनुसार, इबोला एक क़िस्म की वायरल बीमारी है. इसके लक्षण हैं अचानक बुख़ार, कमज़ोरी, मांसपेशियों में दर्द और गले में ख़राश.

ये लक्षण बीमारी की शुरुआत भर होते हैं. इसका अगला चरण है उल्टी होना, डायरिया और कुछ मामलों में अंदरूनी और बाहरी रक्तस्राव.

मनुष्यों में इसका संक्रमण संक्रमित जानवरों, जैसे, चिंपैंजी, चमगादड़ और हिरण आदि के सीधे संपर्क में आने से होता है.


कैसे फैलता है ?इबोला

एक दूसरे के बीच इसका संक्रमण संक्रमित रक्त, द्रव या अंगों के मार्फ़त होता है. यहां तक कि इबोला के शिकार व्यक्ति का अंतिम संस्कार भी ख़तरे से ख़ाली नहीं होता. शव को छूने से भी इसका संक्रमण हो सकता है.

बिना सावधानी के इलाज करने वाले चिकित्सकों को भी इससे संक्रमित होने का भारी ख़तरा रहता है.

संक्रमण के चरम तक पहुंचने में दो दिन से लेकर तीन सप्ताह तक का वक़्त लग सकता है और इसकी पहचान और भी मुश्किल है.

इससे संक्रमित व्यक्ति के ठीक हो जाने के सात सप्ताह तक संक्रमण का ख़तरा बना रहता है.

डब्ल्यूएचओ के मुताबिक़, उष्णकटिबंधीय बरसाती जंगलों वाले मध्य और पश्चिम अफ़्रीका के दूरदराज़ गांवों में यह बीमारी फैली. पूर्वी अफ़्रीका की ओर कांगो, युगांडा और सूडान में भी इसका प्रसार हुआ था |


6. . कोरोना वायरस .(covid -19 )

इससे के संक्रमण से मरने वाले लोगों की संख्या 16,591 हो गई है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसे महामारी घोषित कर दिया है. कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए इसके लक्षणों को पहचानना बेहद जरूरी है. लक्षणों को पहचानकर ही कोरोना वायरस को काबू में किया जा सकता है.


कोरोना वायरस के लक्षण और बचाव के तरीके- कोरोना वायरस का मुख्य लक्षण तेज बुखार है. बच्चों और बुजुर्गों में अगर 100 डिग्री फ़ारेनहाइट (37.7 डिग्री सेल्सियस) या इससे ऊपर पहुंचता है तभी यह चिंता का विषय है.|

तेज बुखार आनाः अगर किसी व्यक्ति को सुखी खांसी के साथ तेज बुखार है तो उसे एक बार जरूर जांच करानी चाहिए. यदि आपका तापमान 99.0 और 99.5 डिग्री फारेनहाइट है तो उसे बुखार नहीं मानेंगे. अगर तापमान 100 डिग्री फ़ारेनहाइट (37.7 डिग्री सेल्सियस) या इससे ऊपर पहुंचता है तभी यह चिंता का विषय है.

कफ और सूखी खांसीः पाया गया है कि कोरोना वायरस कफ होता है मगर संक्रमित व्यक्ति को सुखी खांसी आती है.

सांस लेने में समस्याः कोरोना वायरस से संक ..


कोरोना से बचने के उपाय -

हाथों को साबुन से धोना चाहिए. अल्‍कोहल आधारित हैंड रब का इस्‍तेमाल भी किया जा सकता है. खांसते और छीकते समय नाक और मुंह रूमाल या टिश्‍यू पेपर से ढककर रखें. जिन व्‍यक्तियों में कोल्‍ड और फ्लू के लक्षण हों उनसे दूरी बनाकर रखें. अंडे और मांस के सेवन से बचें. जंगली जानवरों के संपर्क में आने से बचें.


तो ये थी कोरोना के साथ-साथ पहले दुनिया में हुई महामारियां |

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