हिन्दू नववर्ष सम्वतसर :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

25 मार्च 2020   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (244 बार पढ़ा जा चुका है)

हिन्दू नववर्ष सम्वतसर :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*हमारे देश भारत में समय-समय पर अनेकों त्योहार मनाए जाते हैं | भारतीय सनातन परंपरा में प्रत्येक त्योहारों का एक वैज्ञानिक महत्व होता है इन्हीं त्योहारों में से एक है "नववर्ष संवत्सर" जो कि आज चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को माना जाता है | आदिकाल से यदि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को नववर्ष माना जा रहा है तो इसका कारण है कि आज के ही दिन सृष्टि का प्रादुर्भाव हुआ तथा ऐसी मान्यता है कि आज के ही दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि की संरचना प्रारम्भ की थी | नववर्ष तभी मनाना सार्थक होता है जब सृष्टि में नवीनता हो और यह नवीनता अन्य धर्मों की अपेक्षा सनातन हिन्दू नववर्ष के अवसर पर समस्त सृष्टि में देखने को मिलती है | खेतों में तो हरियाली होती ही है साथ ही पतझड़ के बाद वृक्षों में नई कोपलें फूटने लगती हैं , फलदार वृक्षों में फूल आने लगते हैं सारे वृक्ष फलीय रसों से भर जाते हैं इसीलिए चैत्र को मधुमास भी कहा जाता है | सनातन हिन्दू धप्म पूर्ण रूप से वैज्ञानिकता पर आधारित है , समस्त सृष्टि ऋतुओं पर आधारित हैं , ऋतुओं के संधिकाल पर हमारे यहाँ नवरात्र मनाने की भी परम्परा रही है | यद्यपि आज सृष्टि का प्रथम है और बिना शक्ति के कोई भी यात्रा नहीं हो सकती इसीलिए प्रथम दिन से नौ दिन तक शक्ति उपासना करने का विधान है | नववर्ष सम्वतसर या चैत्र नवरात्र को यदि यदि ज्योतिषीय दृष्टि से देखा जाय तो इसका विशेष महत्व है क्योंकि इस नवरात्र में सूर्य का राशि परिवर्तन होता है | वर्ष भर सूर्य बारह राशियों में भ्रमण करते हुआ पहली राशि मेष में आज के ही दिन प्रवेश करके अपनी नवीन यात्रा प्रारम्भ करते हैं | चैत्र नवरात्र प्रतिपदा को ही नववर्ष मानते हुए हिन्दू पञ्चांग की गणना प्रारम्भ होती है | यद्यपि विश्व में अनेक धर्म हैं और प्रत्येक धर्म का नववर्ष भी भिन्न है परंतु सनातन हिन्दू नववर्ष की जो वैज्ञानिकता , मान्यता एवं दिव्यता है वह अन्य नववर्षों में कदापि देखने को नहीं मिलती इसीलिए सनातन को दिव्य कहा जाता है |*


*आज अर्थात चैत्र प्रदिपदा से ही शक्ति की आराधना का पर्व "नवरात्र" प्रारम्भ होने के पीछे भी मान्यता है कि जब ब्रह्मा जी को सृष्टि का सृजन करने के लिए आत्मिक , बौद्धिक एवं शारीरिक शक्ति की आवश्यकता प्रतीत हुई तब उन्होंने आदिशक्ति की उपासना प्रारम्भ की | आज भले ही सम्पूर्ण विश्व में ईसाई नववर्ष की धूम हो परंतु आज भी जनवरी की अपेक्षा मार्च / अप्रैल से वित्तीय वर्ष एवं कार्यालयों के कार्य सम्पन्न होते हैं | आज के दिन प्रत्येक हिन्दू जनमानस को अपनी श्रद्धा के अनुसार पूजन करके अपने घरों पर ध्वजारोहण करना चाहिए | मैं "आचार्य अर्जुन तिवारी" विचार करता हूँ कि शक्ति की आराधना करके ही जीवन में कुछ अर्जित किया जा सकता है | आदिशक्ति महामाया के बिना सृष्टि की संकल्पना करना ही व्यर्थ है | जिस प्रकार किसी भी परिवार का कुशल नेतृत्त्व एवं कुशल संचालन भवीभांति एक गृहिणी (नारीशक्ति) ही कर सकती है उसी प्रकार इस विशाल सृष्टि का पालन एवं संचालन आदिशक्ति महामाया के बिना असम्भव है | जो उत्पत्ति , पालन एवं संहार का आदिकारण हैं , समय समय पर जीवों पर दया करने के भाव से विभिन्न स्वरूपों में अवतरित होकर जीवमात्र का कल्याण करने वाली पराम्बा जगदम्बा की आराधना वर्ष के प्रथम दिन से इसीलिए की जाती रही है | चैत्र नवरात्र का धार्मिक महत्त्व इसलिए भी विशेष है क्योंकि इस नवरात्र में जहाँ प्रथम दिवस महामाया का प्रादुर्भाव हुआ था वहीं इसी नवरात्र की तृतीया को भगवान श्री हरि विष्णु ने प्रथम अवतार मत्स्यावतार धारण किया था और इसी नवरात्र की नवमी को इस धराधाम पर लुप्त हो रही मर्यादा की पुनर्स्थापना करने के लिए मर्यादापुरुषोत्तम श्रीराम का अयोध्या में अवतरण हुआ था | कुल मिलाकर सनातन हिन्दू नववर्ष सम्वतसर चैत्र का वैज्ञानिक , ज्योतिषीय एवं धार्मिक दृष्टि से अपना विशेष महत्व है | प्रत्येक जनमानस को आज के दिन नववर्ष मनाते हुए शक्ति की आराधना करनी चाहिए |*


*जीवन में नवीनता एवं उल्लास लेकर नववर्ष आता है औऱ साथ ही शक्ति की उपासना का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाकर जीवन को सार्थक बनाना मानव जीवन का परम लक्ष्य है |*

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