भय बिनु होइ न प्रीति :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

25 मार्च 2020   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (291 बार पढ़ा जा चुका है)

भय बिनु होइ न प्रीति :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*मानव जीवन में जिस प्रकार निडरता का होना आवश्यक है उसी प्रकार समय समय पर भय का होना परम आवश्यक है | जब मनुष्य को कोई भय नहीं जाता तब वह स्वछन्द एवं निर्द्वन्द होकर मनमाने कार्य करता हुआ अन्जाने में ही समाज के विपरीत क्रियाकलाप करने लगता है | भयभीत होना कोई अच्छी बात नहीं है परंतु कभी कभी परिस्थितियाँ ऐसी हो जाती हैं कि यह बहुत ही आवश्यक भी हो जाता है | मनुष्य को अपने आचरण से डरते रहना चाहिए कि कहीं उसके द्वारा कोई ऐसा कार्य न हो जाय जिससे स्वयं का , परिवार का या फिर एक बड़े समाज का अहित हो जाय | मनुष्य भयभीत होता नहीं है बल्कि उसे भय दिखाया जाता है | एक माता यद्यपि अपनी सन्तान से अथाह प्रेम करती है परंतु कोई अपराध करने पर उसे दण्ड देकर भविष्य में उस कार्य को न करने के लिए भयभीत भी करती है | माता के द्वारा अपने पुत्र को दिये गये दण्ड का यह अर्थ कदापि नहीं होता है कि अपनी सन्तान के प्रति उसका प्रेम कम हो जाता है | बिना भय दिखलाये कार्य कर देने वाले बहुत ही कम दिखाई पड़ते हैं | रामायण का एक प्रसंग स्मरणीय है जब मर्यादापुरुषोत्तम भगवान श्रीराम तीन दिन तक समुद्र से प्रार्थना करते रहे परन्तु समुद्र के ऊपर कोई फर्क नहीं पड़ा तब उनको क्रोध आ गया और तुलसादास जी ने लिखा :- " विनय न मानत जलधि जड़ गये तीनि दिन बीति ! बोले राम सकोप तब भय बिनु होय न प्रीति !!" जब भगवान श्रीराम ने समुद्र को दण्ड देने के लिए अपना धनुष उठाया तब भयभीत होकर समुद्र उनके समक्ष उपस्थित भी हुआ और मार्ग भी बताया | कहने का तात्पर्य यह है कि सठ के साथ विनय और कुटिल मनुष्य के लाथ प्रेम न तो करना चाहिए और न ही किया जा सकता है क्योंकि इनका प्रयोजन उनकी समझ में आ ही नहीं सकता | ऐसे लोगों के लिए ही (जो किसी की भी कोई विनती न सुनकरके अपनी मनमानी किया करते हैं ) दण्ड एवं भय का विधान बनाया गया है | कुछ लोगों की आदत होती है कि जब तक उनको दण्ड न दिया जाय तब तक सीधी बात उनकी समझ में आती ही नहीं है ! ऐसे क्रियाकलापों के द्वारा ऐसे लोग समय समय पर अपमानित होते रहते हैं |*


*आज संपूर्ण विश्व संकट से गुजर रहा है | विश्व के प्रत्येक देश में कोरोना नामक प्राणघातक विषाणु का संक्रमण लोगों को अनवरत मृत्यु की गोद में सुलाता चला जा रहा है | विश्व के प्रख्यात चिकित्सकों का मानना है कि यह संक्रमण एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति बहुत आसानी से पहुंच जाता है | ऐसे में यदि लोग एक दूसरे से दूर रहे तो इस संक्रमण को रोका जा सकता है | चिकित्सकों की इसी बात को ध्यान में रखते हुए हमारे प्रधानमंत्री जी ने पूरे देश में तालाबंदी करते हुए लोगों को घरों में रहने के लिए निर्देश तो दिया है साथ ही ऐसा करने के लिए हाथ जोड़कर विनती भी की है | परंतु में "आचार्य अर्जुन तिवारी" टेलीविजन के माध्यम से संपूर्ण भारत देश में ऐसे लोगों को भी देख रहा हूं जो प्रधानमंत्री जी के निवेदन को ठुकरा कर के घरों के बाहर टहल रहे हैं | ऐसे कुछ लोगों को पुलिस प्रशासन के द्वारा लाठियां एवं गालियां भी मिल रही है | विचार कीजिए यदि हमारे देश के अगुआ ने हमको घर में रहने के लिए कहा है तो उसमें कोई द्वेष की भावना नहीं अपितु देशवासियों का कल्याण ही निहित है , परंतु भय बिनु होइ न प्रीति की उक्ति को सार्थक करते हुए कुछ लोग पुलिस की लाठियां खाकर ही घर में बैठने के लिए आमादा है और ऐसे लोगों की सेवा भी हो रही है | जहां प्राण जाने का खतरा है वहां यदि कुछ दिन घर पर रह लिया जाए तो किसी का क्या चला जाएगा ? परंतु कुछ बुद्धिजीवी ऐसे हैं जो बिना दंड के कुछ समझना ही नहीं चाहते हैं | शायद ऐसे ही लोगों के लिए तुलसीदास जी ने उपरोक्त दोहा लिखा होगा | आज आवश्यकता है कि जितना ज्यादा हो सके लोगों से दूरी बनाए रखते हुए स्वयं एवं अपने परिवार को इस प्राणघातक संक्रमण से बचाए रखें एवं साथ ही प्रशासन के द्वारा किसी भी प्रकार के दंड से बचते हुए अपने सम्मान की भी रक्षा करें अन्यथा विश्व के अन्य देशों की भांति हमारे देश में भी मृत्यु का भयावह तांडव होने लगेगा |*


*प्रत्येक मनुष्य विवेक वान है अपने विवेक का प्रयोग करके मानव मात्र एवं सर्वप्रथम तो स्वयं एवं स्वयं के परिवार के लिए सरकार के द्वारा दिए गए दिशा निर्देशों का पालन करते हुए देश की सुरक्षा के प्रति जागरूक होने की आवश्यकता है |*

भय बिनु होइ न प्रीति :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

अगला लेख: सनातन में समाजिक दूरी की मान्यता :-- आचार्य अर्जुन तिवारी



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
29 मार्च 2020
*अपने संपूर्ण जीवन काल में मनुष्य में अनेक गुणों का प्रादुर्भाव होता है | अपने गुणों के माध्यम से ही मनुष्य समाज में सम्मान या अपमान अर्जित करता है | यदि मनुष्य के गुणों की बात की जाए तो धैर्य मानव जीवन में एक ऐसा गुण है जिसके गर्भ से शेष सभी गुण प्रस्फुटित होते है
29 मार्च 2020
29 मार्च 2020
*अपने संपूर्ण जीवन काल में मनुष्य में अनेक गुणों का प्रादुर्भाव होता है | अपने गुणों के माध्यम से ही मनुष्य समाज में सम्मान या अपमान अर्जित करता है | यदि मनुष्य के गुणों की बात की जाए तो धैर्य मानव जीवन में एक ऐसा गुण है जिसके गर्भ से शेष सभी गुण प्रस्फुटित होते है
29 मार्च 2020
27 मार्च 2020
*सनातन धर्म पूर्ण वैज्ञानिकता पर आधारित है , हमारे पूर्वज इतने दूरदर्शी एवं ज्ञानी थे कि उन्हेंने आदिकाल से ही मानव कल्याण के लिए कई सामाजिक नियम निर्धारित किये थे | मानव जीवन में वैसे तो समय समय पर कई धटनायें घटित होती रहती हैं परंतु मानव जीवन की दो महत्त्वपूर्ण घटनायें होती हैं जिसे जन्म एवं मृत्य
27 मार्च 2020
22 मार्च 2020
*मनुष्य जिस स्थान / भूमि में जन्म लेता है वह उसकी जन्म भूमि कही जाती है | जन्मभूमि का क्या महत्व है इसका वर्णन हमारे शास्त्रों में भली-भांति किया गया है | प्रत्येक मनुष्य मरने के बाद स्वर्ग को प्राप्त करना चाहता है क्योंकि लोगों का मानना है कि स्वर्ग में जो सुख है वह और कहीं नहीं है परंतु हमारे शास्
22 मार्च 2020
06 अप्रैल 2020
*इस समस्त सृष्टि में ईश्वर ने एक से बढ़कर एक बहुमूल्य , अमूल्य उपहार मनुष्य को उपभोग करने के लिए सृजित किये हैं | मनुष्य अपनी आवश्यकता एवं विवेक के अनुसार उस वस्तु का मूल्यांकन करते हुए श्रेणियां निर्धारित करता है | संसार में सबसे बहुमूल्य क्या है इस पर निर्णय देना बह
06 अप्रैल 2020
07 अप्रैल 2020
*मनुष्य को ईश्वर ने विवेक दिया है जिसका प्रयोग वह उचित - अनुचित का आंकलन करने में कर सके | मनुष्य के द्वारा किये गये क्रियाकलाप पूरे समाज को किसी न किसी प्रकार से प्रभावित अवश्य करते हैं | सामान्य दिनों में तो मनुष्य का काम चलता रहता है परंतु मनुष्य के विवेक की असली परीक्षा संकटकाल में ही होती है |
07 अप्रैल 2020
24 मार्च 2020
*ईश्वर ने सृष्टि के रचनाक्रम में पंचतत्वों (भूमि , जल , वायु , अग्नि एवं आकाश) की रचना की फिर इन्हीं पंचतत्वों के सहारे जीवों का सृजन किया | अनेक प्रकार के जीवों के मध्य मनुष्य का सृजन करके उसको असीमित शक्तियाँ भी प्रदान कीं | मनुष्य की इन शक्तियों में सर्वश्रेष्ठ ज्ञान एवं बुद्धि को बनाया , अपनी बु
24 मार्च 2020
22 मार्च 2020
*मनुष्य जिस स्थान / भूमि में जन्म लेता है वह उसकी जन्म भूमि कही जाती है | जन्मभूमि का क्या महत्व है इसका वर्णन हमारे शास्त्रों में भली-भांति किया गया है | प्रत्येक मनुष्य मरने के बाद स्वर्ग को प्राप्त करना चाहता है क्योंकि लोगों का मानना है कि स्वर्ग में जो सुख है वह और कहीं नहीं है परंतु हमारे शास्
22 मार्च 2020
25 मार्च 2020
*हमारे देश भारत में समय-समय पर अनेकों त्योहार मनाए जाते हैं | भारतीय सनातन परंपरा में प्रत्येक त्योहारों का एक वैज्ञानिक महत्व होता है इन्हीं त्योहारों में से एक है "नववर्ष संवत्सर" जो कि आज चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को माना जाता है | आदिकाल से यदि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को नववर्ष माना जा रहा है तो इसका का
25 मार्च 2020
26 मार्च 2020
*मानव जीवन में अनेकों प्रकार की एवं मित्र बना करते हैं कुछ शत्रु तो ऐसे भी होते हैं जिनके विषय में हम कुछ भी नहीं जानते हैं परंतु वे हमारे लिए प्राणघातक सिद्ध होते हैं | शत्रु से बचने का उपाय मनुष्य आदिकाल से करता चला आया है | अपने एवं अपने समाज की सुरक्षा करना मनुष्य का प्रथम कर्तव्य है , अपने इस क
26 मार्च 2020
01 अप्रैल 2020
*सनातन धर्म में प्रत्येक व्यक्ति को धर्म का पालन करने का निर्देश बार - बार दिया गया है | धर्म को चार पैरों वाला वृषभ रूप में माना जाता है जिसके तीन पैरों की अपेक्षा चौथे पैर की मान्यता कलियुग में अधिक बताया गया है , धर्म के चौथे पैर को "दान" कहा गया है | तुलसीदास जी मामस में लिखते हैं :-- "प्रगट चार
01 अप्रैल 2020
24 मार्च 2020
*ईश्वर ने सृष्टि के रचनाक्रम में पंचतत्वों (भूमि , जल , वायु , अग्नि एवं आकाश) की रचना की फिर इन्हीं पंचतत्वों के सहारे जीवों का सृजन किया | अनेक प्रकार के जीवों के मध्य मनुष्य का सृजन करके उसको असीमित शक्तियाँ भी प्रदान कीं | मनुष्य की इन शक्तियों में सर्वश्रेष्ठ ज्ञान एवं बुद्धि को बनाया , अपनी बु
24 मार्च 2020
23 मार्च 2020
*संपूर्ण विश्व में हमारा देश भारत एकमात्र ऐसा देश है जहां अनेक धर्म , संप्रदाय के लोग एक साथ निवास करते हैं | धर्म , भाषा एवं जीवनशैली भिन्न होने के बाद भी हम सभी भारतवासी हैं | किसी भी संकट के समय अनेकता में एकता का जो प्रदर्शन हमारे देश में देखने को मिलता है वह अन्यत्र कहीं दर्शनीय नहीं है | हमें
23 मार्च 2020
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x