एक और महाभारत

28 मार्च 2020   |  pradeep   (272 बार पढ़ा जा चुका है)

एक गाना था " आज की रात बचेंगे तो सहर देखेंगे." वैसे ही इस महामारी से बचेंगे तो अच्छे दिन देंखेंगे. इसलिए अब इस धर्म और मजहब की बात छोड़ कर इस महामारी से बचने की सोचो. महाभारत में कोई नहीं जीता था, जो पांडवो की जीत बताते है, तो क्या वो पांडवो की तरह इस युद्ध को जीतना चाहते है ? पांडवों में पांचो भाइयों के अलावा कोई नहीं बचा था यहाँ तक कि उनके अपने बच्चे. कृष्ण ने अर्जुन को जब अपने विशाल दर्शन कराये थे तो बताया था आज मैं महाकाल के रूप में अवतरित हुआ हूँ, और उस महाकाल ने सभी को निगल लिया था. पांडवों ने अपनी जीत का जश्न नहीं मनाया था, क्योकि उनको इस जीत की एक बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ी थी. इसलिए इसे महाभारत का युद्ध ना बनने दे, इससे बचे, और हिन्दू-मुसलमान की राजनीति छोड़ धर्म( कर्तव्य ) की, सत्य की बात करे. आज मजहब के नाम पर लड़ने की बजाये इस महामारी से लड़ने की तैयारी की ज़रूरत है. (आलिम)


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