गोशानशीं

29 मार्च 2020   |  pradeep   (304 बार पढ़ा जा चुका है)

गोशानशीं* तो उस रोज़ ही हो गए थे हम,

जिस रोज़ उसने मेरे दिल को तोड़ा था,

सपुर्दे ख़ाक कर आतश ए ज़िगर* अपना,

अब तो गोशानशिनी* एक फ़ाक़ामस्ती है. (आलिम)

* एकांतवासी, प्रेम की आग, एकांतवास

अगला लेख: तारीख़



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें

शब्दनगरी से जुड़िये आज ही

सम्बंधित
लोकप्रिय
04 अप्रैल 2020
05 अप्रैल 2020
29 मार्च 2020
शि
29 मार्च 2020
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x