हिंदी दिवस कब और क्यों मनाया जाता है ?

30 मार्च 2020   |  मोनिका चौधरी   (307 बार पढ़ा जा चुका है)

हिंदी दिवस कब और क्यों मनाया जाता है ?

हिंदी दिवस (hindi diwas) -इस लेख में आप पढ़ेंगे - HINDI DIWAS IN DETAIL भारत की राजभाषा हिंदी ,हिंदी दिवस कब मनाया जाता है ? ,कबसे मनाया जाता है ?

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भारत देश को भाई चारे का देश माना जाता है ,जहाँ अलग -अलग राज्यों में भाषाओं , संस्कृति,और वेश- भूषा के बहुत से अलग अलग रंग होकर भी एक हैं |हिंदी भारत की राजभाषा के रूप में जानी जाती है | दुनियाभर में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषाओँ में से तीसरे स्थान पर हिंदी भाषा आती है हिंदी भाषा को दुनिया भर में बहुत प्रतिष्ठित माना जाता है | भारतीयों को अलग पहचान दिलाने वाली हिंदी भाषा को हमारा नमन |

भारत से ही देवनागरी लिपि निकली हैं,जिसके बारे में कहा जाता हैं कि ये समस्त भाषाओँ की जननी हैं. लेकिन भारत की प्राचीनतम भाषाओं में संस्कृत भाषा को माना जाता हैं, हालांकि हिंदी का उद्भव भी संस्कृत से ही हुआ हैं, लेकिन भारत में तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम जैसी कुछ बहुत सी प्राचीन भाषाओं से सम्बन्धित साक्ष्य भी मिलते हैं इसलिए हिंदी के प्रचलन में कमी होना स्वाभाविक हैं.

भारत के एक से बढ़कर एक विद्वानों , कवियों और लेखकों द्वारा हिंदी भाषा में रचनाएं करके हिंदी को एक नया आसमान और सम्मान दिया | भारत के ज़्यदातर राज्यों म बोली जाने वाली हिंदी भाषा को राष्ट्रभाषा बनाने की मांग बहुत लम्बे अरसे से चल रही थी ,लेकिन संविधानिक तौर पर हिंदी भाषा को सिर्फ राजभाषा का ही औधा प्राप्त है |


हिंदी दिवस कब मनाया जाता है -

हिंदी दिवस (Hindi Diwas) हर साल 14 सितंबर (14 September) को मनाया जाता है. हिंदी विश्व की प्राचीन, समृद्ध और सरल भाषा है. हिंदी (Hindi) भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के कई देशों में बोली जाती है. हिंदी हमारी 'राजभाषा' (Hindi Rajbhasha) है.

हिंदी को राजभाषा का दर्जा 14 सितंबर, 1949 के दिन मिला था. तब से हर साल यह दिन 'हिंदी दिवस' के तौर पर मनाया जाता है.

हिंदी के महत्व को बताने और इसके प्रचार प्रसार के लिए राष्ट्रभाषा प्रचार समिति के अनुरोध पर 1953 से प्रतिवर्ष 14 सितंबर को हिंदी दिवस के तौर पर मनाया जाता है।


हिंदी दिवस का इतिहास (hindi diwas history )

वैसे तो भारत अनेक विभिन्न प्रकार की भाषा,वेश भूषा , संस्कृति वाला देश है | यहां हर राज्‍य की अपनी अलग सांस्‍कृतिक, राजनीतिक और ऐतिहासिक पहचान है. यही नहीं सभी जगह की बोली भी अलग है. इसके बावजूद हिन्‍दी भारत में सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा है. यही वजह है कि राष्‍ट्रपिता महात्‍मा गांधी ने हिन्‍दी को जनमानस की भाषा कहा था. उन्‍होंने 1918 में आयोजित हिन्‍दी साहित्‍य सम्‍मेलन में हिन्‍दी को राष्‍ट्र भाषा बनाने के लिए कहा था.

साल 1947 में जब अंग्रेजी हुकूमत से भारत आजाद हुआ तो उसके सामने भाषा को लेकर सबसे बड़ा सवाल था. क्योंकि भारत में सैकड़ों भाषाएं और बोलियां बोली जाती है. 6 दिसंबर 1946 में आजाद भारत का संविधान तैयार करने के लिए संविधान का गठन हुआ. संविधान सभा ने अपना 26 नवंबर 1949 को संविधान के अंतिम प्रारूप को मंजूरी दे दी. आजाद भारत का अपना संविधान 26 जनवरी 1950 से पूरे देश में लागू हुआ.

लेकिन भारत की कौन सी राष्ट्रभाषा चुनी जाएगी ये मुद्दा काफी अहम था, आजादी मिलने के बाद लंबे विचार-विमर्श के बाद आखिरकार 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा में हिन्‍दी को राज भाषा बनाने का फैसला लिया गया. भारतीय संविधान के भाग 17 के अध्‍याय की धारा 343 (1) में हिन्‍दी को राजभाषा बनाए जाने के संदर्भ में कुछ इस तरह लिखा गया है, 'संघ की राजभाषा हिन्दी और लिपि देवनागरी होगी. संघ के राजकीय प्रयोजनों के लिए प्रयोग होने वाले अंकों का रूप अंतर्राष्ट्रीय रूप होगा.'

देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने कहा कि इस दिन के महत्व देखते हुए हर साल 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाए. बतादें पहला हिंदी दिवस 14 सितंबर 1953 में मनाया गया था.


हिंदी के राजभाषा बनने पर विरोध -

14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने एक मत से निर्णय लिया कि हिंदी ही भारत की राजभाषा होगी ,हालांकि हिन्‍दी को राजभाषा बनाए जाने से काफी लोग खुश नहीं थे औरसाथ ही अंग्रेजी भाषा को हटाने पर भी लोग भड़के हुए थे और इसका विरोध करने लगे.तमिलनाडू में जनवरी 1965 में भाषा विवाद को लेकर दंगे हुए थे, इसी विरोध के चलते बाद में अंग्रेजी को भी राजभाषा का दर्जा दे दिया गया |


हिंदी दिवस क्यूँ मनाया जाता है ?

भारत सालों तक अंग्रेजों का गुलाम रहा. इसी वजह से उस गुलामी का असर लंबे समय तक देखने को मिला. यहां तक कि इसका प्रभाव भाषा में भी पड़ा, भारत के स्वाधीनता संग्राम क्रान्तिकारियों को जिस भाषा ने एक सूत्र में जोड़ रखा था,वो हिंदी ही थी. एक समय जब क्षेत्रीय भाषाओं का साहित्य मे महत्वपूर्ण स्थान था, तब हिंदी के साहित्यकारों ने जो परिवर्तन की क्रान्ति का आगाज किया, उसे भारतीय इतिहास कभी भुला नहीं सकता.भारतेंदु हरिश्चंद्र, निराला, मुंशी प्रेमचन्द, हरिवंश राय बच्चन जैसे साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं से हिंदी भाषा को एक अलग उचाईयों पर पहुँचाया ,

और फिर स्वतंत्रता के बाद भी हिंदी को सर्वप्रथम दर्जा और उसका मान बढ़ाने वालों की सूची बढ़ती ही गयी ,ऐसे में हिंदी को संविधान में जगह मिलना स्वाभाविक था. इसलिए ही 1949 में जब संविधान सभा संविधान संबधित महत्वपूर्ण निर्णय ले रही थी, तब 14 सितम्बर 1949 के दिन ही हिंदी भाषा को राजकीय भाषा का दर्जा दिया गया था. इस कारण ही इस दिन को प्रति वर्ष “हिंदी दिवस” के रूप में मनाने की रीति प्रारम्भ हुई, और तब ये किसी ने स्वप्न में भी नहीं सोचा था कि कालान्तर में ये दिवस हिंदी की पहचान और सम्मान के लिए ऑक्सिजन के जैसे काम करेगा.

हिंदी दिवस आज भी बहुत उत्साह और सम्मान से मनाया जाता है , हालाँकि सबके मन में ये सवाल रहता है ,जिनमे सबसे महत्वपूर्ण संशय हिंदी के राष्ट्र भाषा या राज भाषा होने के सन्दर्भ में होता हैं. वास्तव में हिंदी को भारत की राष्ट्र भाषा नहीं राज-भाषा घोषित किया था, जिसका अर्थ हैं की यहाँ की आधिकारिक भाषा हिंदी है. 13 जनवरी 2010 को गुजरात हाई कोर्ट ने भी एक आदेश में ये माना था कि हिन्दी भारत देश की राज भाषा हैं जबकि इसे राष्ट्र भाषा माना जाता हैं,जबकि रिकॉर्ड में ऐसा कोई प्रावधान मौजूद नहीं हैं जिसमें लिखा हो कि ये देश की राष्ट्र भाषा हैं. 14 सितम्बर को हिंदी दिवस मनाने के अलावा विश्व स्तर पर हिंदी साहित्य को पहचान दिलाने के लिए 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस भी मनाया जाता हैं. विश्व स्तर पर हिंदी भाषा को ये सम्मान मिलना वास्तव में गौरव का विषय हैं

विश्व हिंदी दिवस - हिंदी दिवस के होते हुए भी विश्व हिंदी दिवस मनाने का उद्देश्य विश्व भर में हिंदी साहित्य के पक्ष में एक माहौल बनाना और भारत की तरफ से इस भाषा को प्रतिनिधि के रूप में प्रस्तुत करना हैं. यही कारण हैं कि विदेशों में भी इस दिन विशेष आयोजन किया जाता हैं. वास्तव में 10 जनवरी 1975 को नागपुर में विश्व-हिंदी सम्मेलन का आयोजन किया गया था. अत: कालान्तर में 10 जनवरी 2006 के दिन तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इस दिन को विश्व हिंदी दिवस के रूप में मनाये जाने की घोषणा की.


हिन्‍दी से जुड़ी 8 दिलचस्प बातें-

हिंदी विश्व की तीसरी ऐसी भाषा है , जो सबसे ज्यादा बोली जाती है ,ताजा आंकड़ों के मुताबिक वर्तमान में भारत में 43.63 फीसदी लोग हिन्‍दी भाषा बोलते हैं. जबकि 2001 में यह आंकड़ा 41.3 फीसदी था. तब 42 करोड़ लोग हिन्दी बोलते थे. जनगणना के आंकड़ों के अनुसार 2001 से 2011 के बीच हिन्दी बोलने वाले 10 करोड़ लोग बढ़ गए. साफ है कि हिन्दी देश की सबसे तेजी से बढ़ती भाषा है.

अभी विश्‍व के सैंकड़ों व‍िश्‍वविद्यालयों में हिन्‍दी पढ़ाई जाती है और पूरी दुनिया में करोड़ों लोग हिन्‍दी बोलते हैं. यही नहीं हिन्‍दी दुनिया भर में सबसे ज्‍यादा बोली जाने वाली पांच भाषाओं में से एक है.

इसे आप हिन्‍दी की ताकत ही कहेंगे कि अब लगभग सभी विदेशी कंपनियां हिन्‍दी को बढ़ावा दे रही हैं. यहां तक कि दुनिया के सबसे बड़े सर्च इंजन गूगल में पहले जहां अंग्रेजी कॉनटेंट को बढ़ावा दिया जाता था वही गूगल अब हिन्‍दी और अन्‍य क्षेत्रीय भाषा वाले कॉन्‍टेंट को प्रमुखता दे रहा है. हाल ही में ई-कॉमर्स साइट अमेजन इंडिया ने अपना हिन्दी ऐप्‍प लॉन्च किया है.

इंटरनेट के प्रसार से किसी को अगर सबसे ज्‍यादा फायदा हुआ है तो वह हिन्‍दी है. 2016 में डिजिटल माध्यम में हिन्दी समाचार पढ़ने वालों की संख्या 5.5 करोड़ थी, जो 2021 में बढ़कर 14.4 करोड़ होने का अनुमान है.

2021 में हिन्दी में इंटरनेट उपयोग करने वाले अंग्रेजी में इंटरनेट इस्तेमाल करने वालों से अधिक हो जाएंगे. 20.1 करोड़ लोग हिन्दी का उपयोग करने लगेंगे. गूगल के अनुसार हिन्दी में कॉन्‍टेंट पढ़ने वाले हर साल 94 फीसदी बढ़ रहे हैं, जबकि अंग्रेजी में यह दर सालाना 17 फीसदी है.

पाकिस्‍तान, नेपाल, बांग्‍लादेश, अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, न्‍यूजीलैंड, संयुक्‍त अरब अमीरात, युगांडा, गुयाना, सूरीनाम, त्रिनिदाद, मॉरिशस और साउथ अफ्रीका समेत कई देशों में हिन्‍दी बोली जाती है.

दक्षिण प्रशान्त महासागर के मेलानेशिया में फिजी नाम का एक द्वीप है. फिजी में हिन्‍दी को आधाकारिक भाषा का दर्जा दिया गया है. इसे फि‍जियन हिन्दी या फि‍जियन हिन्दुस्तानी भी कहते हैं. यह अवधी, भोजपुरी और अन्य बोलियों का मिलाजुला रूप है.

साल 2017 में ऑक्‍सफोर्ड डिक्‍शनरी में पहली बार 'अच्छा', 'बड़ा दिन', 'बच्चा' और 'सूर्य नमस्कार' जैसे हिन्‍दी शब्‍दों को शामिल किया गया.


हिंदी भाषा का लुप्त होना -

इसे हिन्‍दी का दुर्भाग्‍य ही कहा जाएगा कि इतनी समृद्ध भाषा कोष होने के बावजूद आज हिन्‍दी लिखते और बोलते वक्‍त ज्‍यादातर अंग्रेजी भाषा के शब्‍दों का इस्‍तेमाल किया जाता है. और तो और हिन्‍दी के कई शब्‍द चलन से ही हट गए. ऐसे में हिन्‍दी दिवस को मनाना जरूरी है ताकि लोगों को यह याद रहे कि हिन्‍दी उनकी राजभाषा है और उसका सम्‍मन व प्रचार-प्रसार करना उनका कर्तव्‍य है. हिन्‍दी दिवस मनाने के पीछे मंशा यही है कि लोगों को एहसास दिलाया जा सके कि जब तक वे इसका इस्‍तेमाल नहीं करेंगे तब तक इस भाषा का विकास नहीं होगा.


हिन्‍दी दिवस कैसे मनाया जाता है?(how we celebrate hindi diwas

हिंदी दिवस को देश में काफी सम्मान और हर्ष के साथ मनाया जाता हैं. यहाँ सम्मान का तात्पर्य उस वर्ग के लिए है, जिसने अपने आम-जीवन में अंग्रेजी को प्राथमिकता दी है, लेकिन इस दिवस पर वो भी हिंदी को सम्मान देते देखे जा सकते हैं|

हिन्‍दी दिवस के मौके पर कई कार्यक्रमों का आयोजन होता है. स्‍कूलों, कॉलेजों और शैक्षणिक संस्‍थानों में निबंध प्रतिया, वाद-विवाद प्रतियोगता, कविता पाठ, नाटक, और प्रदर्शनियों का आयोजन किया जाता है. इसके अलावा सरकारी दफ्तरों में हिन्‍दी पखवाड़े का आयोजन होता है. यानी कि 14 सितंबर से लेकर अगले 15 दिनों तक सरकारी दफ्तों में विभिन्‍न प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं. यही नहीं साल भर हिन्‍दी के विकास के लिए अच्‍छा काम करने वाले सरकारी दफ्तरों को पुरस्‍कार से भी सम्‍मानित किया जाता है.

औपचारिक रूप से राष्ट्रीय भवन भी इस दिवस को मनाने में पीछे नहीं रहता. देश के राष्ट्रपति हिंदी साहित्य में योगदान देने वाले व्यक्ति का सम्मान करते हैं, इस पुरूस्कार से हिंदी साहित्य अब भी अपना अस्तित्व सम्मान के साथ बनाये हुए हैं. इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय बैंक, मिनिस्ट्री और कुछ विभागों को भी राज-भाषा सम्बन्धित अवार्ड दिए जाते हैं. 25 मार्च 2015 को इन पुरूस्कारों के नामों में कुछ परिवर्तन किया गया था, जिनमें राजीव गाँधी ने राष्ट्रीय ज्ञान-विज्ञान मौलिक पुस्तक लेखन पुरूस्कार का नाम बदलकर राजभाषा गौरव पुरूस्कार किया गया था, जबकि इंदिरा गांधी राजभाषा पुरूस्कार का नाम भी राजभाषा कीर्ति पुरूस्कार रखा गया.


लेकिन आज के समय में हिंदी भाषा लोगों के बीच से कहीं-न-कहीं गायब होती जा रही है और इंग्लिश ने अपना प्रभुत्व जमा लिया है। यदि हालात यही रहे तो वो दिन दूर नहीं जब हिंदी भाषा हमारे बीच से गायब हो जाएगी। हमें यदि हिंदी भाषा को संजोए रखना है तो इसके प्रचार-प्रसार को बढ़ाना होगा। सरकारी कामकाज में हिंदी को प्राथमिकता देनी होगी। तभी हिंदी भाषा को जिंदा रखा जा सकता है।

आशा करते हैं आपको इस लेख में हिंदी भाषा और हिंदी दिवस से जुडी जानकारी मिल गयी होगी और दी गयी जानकारी आपके लिए लाभदायक रहेगी |








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