दुआओं ने कहां पहुंचा दिया

31 मार्च 2020   |  ललिता बोथरा   (260 बार पढ़ा जा चुका है)

महारानी विक्टोरिया के बचपन की घटना है कि एक बार बाजार में एक गुड़िया को देखा। वह उसे बहुत पसंद आयी । वह उसे खरीदना
चाहती है पर पास में पैसे नहीं हैं। अतः खरीद न सकी। उसने पैसे
इकट्ठे किए। पर्याप्त पैसे इकट्ठे होने पर पुनः मार्केट गयी और दुकान में जाकर गुड़िया को खरीद लिया। बड़ी खुशी से नाचते नाचते बाहर
आ रही थी। क्योंकि इतने दिन से पैसे गुड़िया के खरीदने के लक्ष्य से
इकट्ठे किये थे।आज वह पसंद की गुड़िया हाथ में आ गयी थी। जैसे ही गुड़िया को लेकर दुकान से बाहर निकली कि बाहर एक दीन हीन
फटेहाल गरीब व्यक्ति मिला।जिसका पेट और पीठ एक हो रहा था।मानो कई दिन से भूखा है।चला नहीं जा रहा था बोल रहा था मेरा सहयोग करो। भगवान आपका सहयोग करेगा। विक्टोरिया का दिल उसे देखते ही पसीज गया और
कुछ देने के लिए उसके पास था नहीं अब वापस दुकान पर खरी और गुड़िया को को वापस दुकान दार को देकर बोली मुझे कोईजरूरी काम याद आ गया अभी इसे लेलो पैसे दे दो इसे फिर खरीद लुंगी। दुकान दार से पैसे लेकर उसने सारे पैसे उस गरीब को दे दिए।उस व्यक्ति ने उस बालिका को ढेर सारी दुवायें दी। विक्टोरिया आगे से आगे बढ़ती चली गयी। जिसका आज पूरे विश्व में नाम है।

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