किसी को छोटा न समझें :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

11 अप्रैल 2020   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (330 बार पढ़ा जा चुका है)

किसी को छोटा न समझें :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*इस पृथ्वी पर अनेकों छोटे बड़े जीव हैं सबका अपना - अपना महत्त्व है | इन जीवों के अतिरिक्त अनेक जीवाणु एवं विषाणु भी पृथ्वीमण्डल में भ्रमण किया करते हैं जो कि मवुष्य जैसे बलवान प्राणी के लिए घातक सिद्ध होते रहे हैं | हाथी से लेकर चींटी तक कोई भी महत्वहीन नहीं है , पृथ्वी का सबसे विशलकाय प्राणी हाथी जब चींटी के चंगुुल में आता है तो उसकी भी मृत्यु हो जाती है | मनुष्य ने जब जब किसी को छोटा समझकर उसका मजाक उड़ाने का प्रयास किया है तब तब वह संकट में घिरता रहा है | इतिहास साक्षी है कि त्रैलोक्यविजयी रावण के नाम से देवता , दानव , मानव सब थर्राते थे , उस रावण की अशोक वाटिका का विध्वंय करके अनेक राक्षवीरों के साथ रावणपुत्र अक्षयकुमार का वध करके हनुमान जी ने उसे सावधान हो जाने का संकेत कर दिया था परंतु अपने मद में चूर रावण इस संकेत को समझ नहीं पाया और मेघनाद हनुमान जी को बांधकर सभा में ले आया | विभीषण को छोड़कर रावण की सभा में उपस्थित सभी राक्षसों ने हनुमान जी को तुच्छ वानर समझकर उनका मजाक उड़ाते हुए हंसने लगे | अनेक प्रकार से समझाने पर भी रावण की समझ में नहीं आया और उसने हनुमान जी की पूंछ में आग लगा दी जिसका परिणाम हुआ लंकादहन | रावण के अनेकों वीर मृतक तो हुए ही साथ ही त्रिभुवन में विख्यात उसकी स्वर्ण लंका भी राख हो गयी | ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि रावण ने हनुमान जी को गम्भीरता से न लेते हुए उनका मजाक उड़ाया | रावण की ही भाँति जो भी मनुष्य किसी तुच्छ से तुच्छ जीवाणु को अनदेखा करके उसका मजाक बनाने का प्रयास करता है उसका हाल रावण की लंका की ही भाँति हो जाता है | सभी जीव अपने स्थान पर महत्वपूर्ण हैं जब तक वे मनुष्य के अनुकूल हैं तब तक तो ठीक परंतु जब वे मनुष्य के विपरीत हो जाते हैं तो विध्वंसकारी ही सिद्ध होते रहे हैं |*


*आज विश्व में एक छोटे सा संक्रमणीय विषाणु (कोरोना) विंध्वंसक बना हुआ है | नित्यप्रति हजारों लोग उसकी मार से काल कवलित हो रहा है | विश्व के अनेक देश श्मशान बनते जा रहे हैं | ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि प्रारम्भ में मनुष्य ने अपने समक्ष इस नन्हें से विषाणु को गौड़ समझकर इसका मजाक उड़ाया था | जिसका परिणाम आज सबके सामने है | इतनी भयावहता को देखते हुए भी आज कुछ लोग इस संक्रमण का मजाक उड़ा रहे हैं | मैं "आचार्य अर्जुन तिवारी" देख रहा हूँ कि सरकार के द्वारा आमजनमानस की प्राणरक्षा के लिए अनेकों उपाय किये जा रहे हैं यहाँ तक कि लोगों को इस संक्रमण को विनाशक बताते हुए अपने घरों से न निकलने की अपील लगातार की जा रही है परंतु कुछ लोग ऐसे हैं जो किसी भी अपील को सुनना ही नहीं चाहते हैं | कोरोना जैसे घातक संक्रमण को तुच्छ समझते हुए उसका मजाक उड़ाने वाले ही समाज को मृत्यु के मुंह में ढकेल रहे हैं यह हमारे देश में कुछ ज्यादा ही देखने को मिल रहा है | हम लोग देख रहे हैं कि इटली , स्पेन , ईरान , अमेरिका जैसे विकसित देश भी इस संक्रमण के आगे घुटने टेक चुके हैं तो हमारी क्या बिसात है , परंतु यह सब देखकर भी कुछ लोग नहीं समझना चाहते हैं और समाज के लिए घातक सिद्ध हो रहे हैं | अभी भी समय है कि सचेत होकर इस घातक संक्रमणीय विषाणु को समझने का प्रयास करें अन्यथा सोने की लंका की तरह हम भी राख हो जायेंगे | ईश्वर द्वारा प्रदत्त बुद्धि - विवेक का प्रयोग करते हुए इस संक्रमण की भयावहता को पहचानकर इससे स्वयं को बचाने का प्रयास करते हुए अपने समाज व देश की भी रक्षा करें |*


*अपना भला बुरा पहचानने की शक्ति लगभग सब में है , अपनी , अपने परिवार , समाज व राष्ट्र की भलाई जिसमें निहित हो वही कार्य मनुष्य को करना चाहिए अन्यथा अनेक प्रकार की प्रताड़ना झेलकर काल का ग्रास बन जाना पड़ता है |*

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