आतंकवाद विरोधी दिवस- anti terrorism day

28 अप्रैल 2020   |  मोनिका चौधरी   (232 बार पढ़ा जा चुका है)

आतंकवाद विरोधी दिवस- anti terrorism day

आतंकवाद विरोधी दिवस - इस लेख में आप आतंकवादी विरोधी दिवस के बारे में पढ़ेंगे - anti terrorism day



इस संसार में हमें प्रतिदिन किसी ना किसी आतंकवादी के द्वारा फैलाये आतंक की घटना सुनने को मिल ही जाती है. इसके पीछे का कारण है कि सभी आतंकवादी संगठन दुनिया के हर इंसान के अंदर अपने नाम का डर पैदा करना चाहते हैं. इन आतंवादियों के अंदर इंसानियत और रहम नाम की भावनाएं बिलकुल भी नहीं होती है, इन भावनाओं को खत्म करने के लिए इनका ब्रैनवास किया जाता है. जिसकी वजह से इन लोगों को किसी भी मासूम को मारने में थोड़ी सी भी हिचकिचाहट नहीं होती है |


आतंकवाद सबसे बड़ा मुद्दा -

आज के समय में दुनिया जिन समस्याओं का सामना कर रही है, उनमें सबसे बड़ी और अहम समस्या आतंकवाद है। आतंकवाद के कारण हजारों लोगों को दुनिया में अपनी जान गंवानी पड़ी है , संसार के लगभग सभी देश आतंकवादियों के खिलाफ हैं, क्योंकि इन आतंकवादियों के बमों के धमाके हर देश में हजारों- लाखों की संख्या में निर्दोष लोगों की जान ले लेते हैं. इसी वजह से सभी देश एक साथ मिलकर आतंकवाद को जड़ से उखाड़कर फेकना चाहते हैं. लेकिन इस मिशन को पूरा करने के लिए हमें लोगों के अंदर शांति एवं इंसानियत की भावनायें जगानी होंगी. आतंकवाद जैसी समस्या से निपटने के लिए भारत ने 21 मई का दिन ही इसको समर्पित कर दिया है। हर साल 21 मई को पूरे देश में आतंकवाद विरोधी दिवस मनाया जाता है। इसका मकसद लोगों को आतंकवाद के समाज विरोधी कृत्य से लोगों को अवगत कराना है। आतंकवाद की वजह से लोगों को जानमाल का कितना नुकसान उठाना पड़ता है, उससे भी लोगों को अवगत कराया जाता है।


आतंकवाद विरोधी दिवस -

भारत के पूर्व प्रधान मंत्री वी पी सिंह ने 21 मई को आतंकवाद विरोधी दिवस मनाने की घोषणा की थी. तब से हर साल भारत में 21 मई को केंद्र सरकार एवं राज्य सरकार मिलकर इस दिन को मनाने के लिए तमाम तरह के कार्यक्रमों का आयोजन करती हैं. इस दिन सिर्फ भारत में नहीं बल्कि संसार के सभी देशों में होने वाली आतंकवादी गतिविधियों को ध्यान में रखकर ही आतंकवाद के खिलाफ फैसले लिए जाते हैं|


21 मई को ही क्यों मनाया जाता है ,आंतकवादी विरोधी दिवस -

भारत के प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के बाद भारत के प्रधानमंत्री के पद के लिए राजीव गाँधी को चुना गया था, भारत में सबसे कम उम्र में प्रधानमंत्री बनने का रिकॉर्ड राजीव गाँधी ने ही बनाया था, इनको जनता से जुड़कर रहने वाला प्रंधानमंत्री कहा जाता था. राजीव गाँधी ने बहुत से जनता हिट के काम किये, लेकिन कुछ आतंकवादियों संगठनों को राजीव गाँधी की इंसानियत से पसंद नहीं आयी ,और उन्हें लग रहा था कि राजीव गांधी उनके रास्ते में आ सकते हैं |

ये उस दौर की बात है ,जब प्रधानमंत्री आम जनता की परेशानी जानने उनसे बातचीत करने खुद उनसे मिलने जाया करते थे ,और बहुत सी रैलियां भी किया करते थे और प्रधानमंत्री की इतनी शख्त सिक्योरिटी नहीं हुआ करती थी. राजीव गाँधी से मिलने के लिए किसी भी नागरिक को बहुत इंतजार नहीं करना पड़ता था, ऐसी राजनीती करने की वजह से बहुत से आतंकवादी संगठन राजीव गाँधी से नाराज थे. क्योंकि राजीव गाँधी लोगों के अंदर इंसानियत एवं शांति की भावना जगा रहे थे. जिससे आतंकवाद संगठन प्रभावित होते थे. राजीव को रोकने के लिए इन्हें बहुत सी धमकियाँ दी गई, लेकिन इन्होंने अपनी राह पर चलते रहना उचित समझा.

बहुत से आतंकवादी संगठनों से धमकियाँ आने के बाद भी राजीव गाँधी जी ने तमिलनाडु में एक रैली करने का निश्चय किया . इसी रैली के दौरान एक महिला, राजीव गाँधी से मिलने की बार-बार गुजारिश कर रही थी. उस समय लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम नाम के संगठन ने प्रधानमंत्री को मारने की साजिश रची थी एवं इस महिला का सम्बन्ध इसी संगठन से था. किसी को भी उस समय इस साजिश का अंदाजा ही नहीं हुआ और महिला आतंकवादी को राजीव गाँधी से मिलने की इजाजत दे दी गई. जिसके चलते एलटीटीई की महिला आत्मघाती हमलावर (सुसाइड बॉम्बर) ने इन पर हमला किया और राजीव गाँधी का जीवन समाप्त हो गया. और वे सदा सदा के लिए दुनिया को अलविदा कह गए |उसी समय राजीव गाँधी के पास में खड़े 25 और लोग इस बम का शिकार हुए थे, इन हत्याओं के बाद सरकार ने आतंकवादी संगठनों के खिलाफ कड़े कदम उठाना शुरू कर दिया.


आतंकवादी विरोधी दिवस क्यों मनाया जाता है -

इस दिन को मनाने की शुरुआत करने के पीछे भारत में होने वाले आतंकी हमलों पर रोक लगाना था. आतंकवाद भविष्य में कितना खतरनाक साबित हो सकता है, इस बात का अंदाजा आतंकी हमले में देश के प्रधानमंत्री की जान जाने से ही लगाया जा चुका था. भारत के प्रधानमंत्री की हत्या हो जाना कोई मामूली बात नहीं थी, इस समय पूरा देश में राजीव गाँधी की मृत्यु के शोक में डूबा हुआ था. इसके साथ ही सरकार को देश के लोगों की सुरक्षा एवं आतंवादियों के खिलाफ नए फैसले लेना भी जरुरी हो चुका था. इसके लिए आतंकवादियों को समाप्त करने के लिए सरकार ने कई अहम फैसले लिए एवं राजीव की मृत्यु के बाद भारत के नए प्रधानमंत्री ने वी. पी. सिंह ने आतंकवाद विरोधी दिवस को मनाने की घोषणा कर दी. जिससे पूरे देश को आतंकवाद के खिलाफ एकजुट किया जाए एवं आतंकी संगठन को खत्म करने की मुहीम चलाई जा सके.


आतंकवादी विरोधी दिवस मनाने के ख़ास उद्देश्य -

1. शांति और मानवता का संदेश फैलाना

2. आतंकी गुटों और वे कैसे आतंकी हमलों को अंजाम देने की योजना बनाते हैं, उसके बारे में लोगों के बीच जागरूकता पैदा करना

3. लोगों के बीच एकता को बढ़ावा देना

4. युवाओं को शिक्षा और प्रशिक्षण प्रदान करना ताकि वे आतंकी गुटों में शामिल न हों

5. देश में आतंकवाद, हिंसा के खतरे और उनके समाज, लोगों और पूरे देश पर खतरनाक असर के बारे में जागरूकता पैदा करना


कैसे मनाया जाता है ,आतंकवादी विरोधी दिवस -

स्पेशल मीटिंग को बुलाना (Special meeting arrangement)

इस दिन आतंकवाद से निपटने के लिए सेमिनार कॉन्फ्रेंस एवं मीटिंग आदि का आयोजन सुचारु रूप से किया जाता है. 21 मई के दिन भारत के कई विशेषज्ञ आतंकवादियों को मिटाने के तरीके एवं योजनायें सबके सामने लाते रहते हैं.

आतंकवाद से निपटने के लिए नए लोगों को जोड़ना (Anti Terrorist day pledge)

भारत के कई शिक्षा संस्थानों में आतंकवाद को खत्म करने से होने वाले फायदे बताये जाते हैं, इसके साथ-साथ स्कूल या कॉलेज के बच्चों को आतंकवाद खत्म करने में अपना सहयोग देने के लिए उत्साहित किया जाता है.

रैली का आयोजन (Rally)

आतंकवाद विरोधी दिवस के दिन भारत के कई शहरों में आतंकवाद के खिलाफ रैलियां निकालकर लोगों को आतंकवाद से होने वाले नुकसान के बारे में जागरूक किया जाता है. इन रैलियों के आयोजन करने का कारण लोगों को आतंकवाद के खिलाफ एक साथ खड़ा करना है.

राजीव गाँधी को श्रद्धांजलि (tribute to Rajiv Gandhi)

इस दिन आतंकवाद का शिकार हुए हमारे देश के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी जी को नमन किया जाता है. सभी स्कूलों एवं कॉलेजों में राजीव गाँधी की आत्मा को शांति के प्रदान करने के लिए 2 मिनट का मौन रखा रखा जाता है.


आतंकवाद विरोधी कविता ( Anti Terrorism Day Poem )

क्या नज़ारा हैं हैवानियत का

मासूमों के कत्ले आम का

कहते हैं लिया हैं बदला

अपने बीवी बच्चो का

ओ कायरो

कभी शेर सा दहाड़ कर देखों

क्यूँ गीदड़ की तरह वार करते हो

लड़ना हैं तो सामने आओ

क्यूँ बीवी के पल्लू में छीपते हो

माना

ये आतंक हुआ दुश्मन के धरातल पर

पर, इंसानियत हैं हमारे अन्दर भर-भर कर

देंगे अपने भाईयों का साथ

लेकर हाथों में हाथ

हैं भारत माँ के लाल हम

लड़ेंगे और जीतेंगे हर एक जंग |


आतंकवाद विरोधी दिवस पर कोट्स (anti terrorism day quotes in hindi )-

इस संसार के दो पहलु हो सकते हैं पहला शांति और अमन का, दूसरा आतंक और डर से भरा. इन दोनों पहलुओं में से आप किस की तरफ जाना चाहते हैं, आपके ऊपर ही निर्भर करता है.

आतंकवाद हमारे समाज का सबसे खतरनाक दीमक है, अगर इस खतरनाक दीमक को समय रहते इस समाज नहीं निकाला गया तो ये हमारे समाज को काफी मात्रा में हानि पहुंचा सकता है.

आतंकवाद किसी एक जाति एवं धर्म से जुड़ा हुआ नहीं हैं, इन लोगों का केवल एक ही मकसद है लोगों के अंदर खौफ पैदा करना. क्योंकि आतंकवाद इस दुनिया पर डर की मदद से राज करना चाहता हैं.

बन्दूक से निकली गोली सामने वाले व्यक्ति की जाति, धर्म या शिक्षा देखकर नहीं लगती हैं. इसलिए इस आतंकवाद के चलते हर किसी को नुकसान हैं और हमारी भलाई इसी में है कि हम एक साथ मिलकर ऐसे अहिंसात्मक लोगों का खत्मा कर दें.

किसी भी देश का पिता ये नहीं चाहेगा कि उसका बेटा बचपन से बन्दूक उठाकर आतंकवादी बन जाए, क्योंकि बच्चों के हाथ में पेन शोभा देता है ना कि बन्दूक.

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