विश्व जनसंख्या दिवस- world population day 2020 in hindi

30 अप्रैल 2020   |  मोनिका चौधरी   (369 बार पढ़ा जा चुका है)

विश्व जनसंख्या दिवस-  world population day 2020 in hindi

विश्व जनसंख्या दिवस 2020 - world population day 2020 in hindi


आज पूरी दुनिया विश्व जनसंख्या दिवस मना रही है। आज से 30 साल पहले यानी 1989 में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम की गवर्निंग काउंसिल द्वारा इसे शुरू किया गया था। माना जाता है कि 11 जुलाई 1987 को विश्व की जनसंख्या 500 करोड़ हो गई थी। वैश्विक जनसंख्या मुद्दों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के प्रयासों के तहत इसे शुरू किया गया। जिसमें परिवार नियोजन, लिंग समानता, गरीबी, मातृ स्वास्थ्य और मानव अधिकारों का महत्व शामिल हैं।


संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर आबादी बढ़ने की रफ्तार इतनी ही बनी रही तो जल्द ही वैश्विक स्तर पर इसका आंकड़ा 10 अरब के आस-पास पहुंच जाएगा। आपको बता दें कि वर्तमान में दुनिया की कुल आबादी 7.7 अरब को पार कर गई है। जिसमें दुनिया की कुल आबादी का आधे से भी बड़ा हिस्सा केवल एशिया महाद्वीप में रहता है। एक रिपोर्ट के अनुसार, पहली बार ऐसा हुआ है जब 65 साल से अधिक उम्र के लोगों की आबादी पांच साल के बच्चों की आबादी से ज्यादा हो गई है। साल 1900 के पहले तक दुनिया की सबसे बड़ी समस्या शिशु मृत्यु दर था जिस कारण जन्मे बच्चों में से एक चौथाई ही जिंदा बच पाते थे। इसके अलावा उस समय लोगों की औसत आयु भी 30 साल ही थी। लेकिन चिकित्सा विज्ञान के प्रगति ने इन आंकड़ों को बदलकर रख दिया। वर्तमान में भारत समेत कई विकासशील देश भी मेडिकल टूरिज्म के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। विकसित देशों में इलाज की लागत को देखते हुए पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, म्यांमार, मालदीव समेत दुनिया के कई देशों से लोग मेडिकल टूरिज्म के लिए भारत आ रहे हैं


जनसँख्या बढ़ने के कारण -

1 आज भी हमारे देश में कई ऐसे पिछड़े इलाके व गांव हैं, जहां बाल विवाह की परंपरा प्रचलित है जिसके कारण कम उम्र से ही बच्चे पैदा होने शुरू हो जाते

हैं, फलस्वरूप अधिक बच्चे पैदा होते हैं।

2 शिक्षा का अभाव जनसंख्या वृद्धि की एक बड़ी वजह है।

3 रूढ़िवादी सोच और पुरुष-प्रधान समाज में लड़के की चाह में लोग कई बच्चे पैदा कर लेते हैं।

4 आज भी कई ऐसी जगहें हैं, जहां बड़े-बुजुर्गों की ऐसी सोच होती है कि यदि उनकी पुश्तैनी धन-संपत्ति अधिक है, तो उसे आगे बढ़ाने और संभालने के लिए ज्यादा लड़के पैदा किए जाएं। कई मामलों में शादीशुदा जोड़ों पर बच्चे पैदा करने का दबाव तक बनाया जाता है।

5 शिक्षित और मध्यमवर्गीय परिवार की यह सोच कि 'अधिक बच्चे विशेष तौर पर लड़के यानी उनके बुढ़ापे का सहारा'।

6 परिवार नियोजन के महत्व को समझाए बगैर ही युवाओं की शादी कर देना भी एक मुख्य कारण है। इस तरह की बातों पर आज भी घर-परिवारों में चर्चा करना गलत समझा जाता है और बिना अपने युवा बच्चों को संबंधों और उनके परिणामों के बारे में बताए बगैर ही सीधे उनकी शादी कर दी जाती है। ऐसे में कई मामलों में लोग अज्ञानतावश ही बच्चे पैदा कर बैठते हैं।

7. आज भी लड़कियों को गर्भ निरोधक के उपाय संबंधित जानकारी शादी के पहले नहीं दी जाती है और कई मामलों में शादी के बाद भी कैसे अनचाहे गर्भ से बचें, उन्हें इसकी जानकारी तक नहीं होती है।

8. गरीबी भी जनसंख्या बढ़ने का मूल कारण है।

9. हमारे देश में बहुत से बच्चे कुपोषण का शिकार हैं। रोजगार की समस्या, यह साफतौर पर बताता है कि आपके बच्चे और देश के विकास में ज्यादा जनसंख्या रुकावट बनती है।साल 1951 में भारत की आबादी 36 करोड़ थी जो अब बढ़कर 133 करोड़ हो गई है। कई रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि जनसंख्या के मामले में हम साल 2027 तक चीन को पीछे छोड़कर नंबर एक की कुर्सी पर काबिज हो जाएंगे। हालांकि इसका हमारी अर्थव्यवस्था ही नहीं कई क्षेत्रों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

शहरों में पलायन के साथ ही गरीबी, अशिक्षा, बेरोजगारी, निवास, खेती के लिए जमीन इत्यादि समस्याएं बहुत तेजी से आगे बढ़ेंगी। अगर जनसंख्या पर लगाम नहीं लगती है तो सरकार का पांच ट्रिलियन इकोनामी का सपना भी दूर की कौड़ी हो जाएगी।


तेजी से बढ़ रही है दुनिया -

संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार पहली बार ऐसा हुआ है जब 65 साल से अधिक उम्र के लोगों की आबादी पांच साल के बच्चों की आबादी से ज्यादा हो गई है। आशंका जताई जा रही है कि साल 2050 तक दुनिया में बुजुर्गों की आबादी बच्चों की आबादी की दोगुनी हो जाएगी।

हिस्ट्री डॉटाबेस ऑफ द ग्लोबल एनवॉयरमेंट रिपोर्ट के अनुसार 12 हजार साल में दुनिया में जन्में लोगों में से चीन में 19.9 फीसदी तो भारत में 29.8 फीसदी लोग पैदा हुए हैं। अगर इन दोनों देशों के आंकड़ों को जोड़ दिया जाए तो दुनिया की कुल आबादी का आधा हिस्सा इन दोनों देशों में ही जन्मा है।

आपको यह जानकर भी आश्चर्य होगा कि साल 1800 में दुनिया की आबादी ने 100 करोड़ के आंकड़े को छूआ था जबकि 1989 में यह बढ़कर 500 करोड़ तक पहुंच गया। आज यह आंकड़ा 770 करोड़ पहुंच गया है।

बढ़ती आबादी के कारण न केवल आवास और रोजगार की कमी होने वाली है बल्कि आने वाले दिनों में लोगों को खाने के लिए अनाज और पीने के लिए पानी की कमी होने वाली है। एक रिपोर्ट के अनुसार दुनिया में 400 करोड़ लोगों को स्वच्छ पानी नहीं मिल रहा है जिसमें 25 फीसदी भारतीय भी शामिल हैं।

वाटर एड संस्था की रिपोर्ट के अनुसार विश्व के कुल जमीनी पानी का 24 फीसदी भारतीय उपयोग करते हैं। देश में 1170 मिमी औसत बारिश होती है, लेकिन हम इसका सिर्फ 6 फीसदी पानी ही सुरक्षित रख पाते हैं।

एक रिपोर्ट में भारत को चेतावनी दी गई है कि यदि भूजल का दोहन नहीं रूका तो देश को बड़े जल संकट का सामना करना पड़ सकता है। 75 फीसदी घरों में पीने के साफ पानी की पहुंच ही नहीं है। केंद्रीय भूगर्भ जल बोर्ड द्वारा तय मात्रा की तुलना में भूमिगत पानी का 70 फीसदी ज्यादा उपयोग हो रहा है।


आइए जानें जनसंख्या बढ़ने व अधिक बच्चे पैदा करने से क्या नुकसान हैं-

1. ज्यादा बच्चों का भरण-पोषण करना मुश्किल होगा। इससे आपका जीवन तो कष्टमय बीतेगा ही, साथ ही बच्चों का भी भविष्य खराब होगा।

2. असमानता बढ़ेगी जिसके लिए बाद में आप सरकार को दोष देंगे। लेकिन इसकी असल शुरुआत तो आपके अपने घर से ही हुई है। घर में ज्यादा बच्चे यानी स्कूल में भी ज्यादा, कॉलेज में भी ज्यादा, नौकरी पाने की दौड़ में भी ज्यादा, फलस्वरूप प्रतिस्पर्धा ज्यादा और इस प्रकार पूरे समाज, दुनिया में असमानता व भेदभाव को बढ़ावा मिलेगा।

3. नक्सलवाद जैसी समस्याओं का मूल कारण भी यही सामाजिक असमानता है, जो आगे जाकर लोगों में गरीबी-अमीरी के बीच फासले बढ़ाती है।

4. यदि आबादी कम होगी तो विकास का लाभ सभी को बराबरी से मिल सकेगा। कहीं चोरी नहीं होगी और कोई बंदूक नहीं उठाएगा।

5. जनसंख्या अधिक होने से समाज की तरक्की धीमी होती है।


विश्व जनसंख्या दिवस का इतिहास-

11 जुलाई को सालाना पूरे विश्व में विश्व जनसंख्या दिवस के रुप में एक महान कार्यक्रम मनाया जाता है। पूरे विश्व में जनसंख्या मुद्दे की ओर लोगों की जागरुकता को बढ़ाने के लिये इसे मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम की संचालक परिषद के द्वारा वर्ष 1989 में इसकी पहली बार शुरुआत हुई। लोगों के हितों के कारण इसको आगे बढ़ाया गया था जब वैश्विक जनसंख्या 11 जुलाई 1987 में लगभग 5 अरब (बिलीयन) के आसपास हो गयी थी।


2012 विश्व जनसंख्या दिवस उत्सव के थीम (विषय) के द्वारा पूरे विश्व भर में ये संदेश “प्रजनन संबंधी स्वास्थय सुविधा के लिये सार्वभौमिक पहुँच” दिया गया था जब पूरे विश्व की जनसंख्या लगभग 7,025,071,966 थी। लोगों के चिरस्थायी भविष्य के साथ ही ज्यादा छोटे और स्वस्थ समाज के लिये सत्ता द्वारा बड़े कदम उठाये गये थे। प्रजनन संबंधी स्वास्थ देख-रेख की माँग और आपूर्ति पूरी करने के लिये एक महत्वपूर्णं निवेश किया गया है। जनसंख्या घटाने के द्वारा सामाजिक गरीबी को घटाने के साथ ही जननीय स्वास्थ्य बढ़ाने के लिये कदम उठाये गये थे।


ये विकास के लिये एक बड़ी चुनौती थी, जब वर्ष 2011 में पूरे धरती की जनसंख्या 7 बिलीयन के लगभग पहुँच गयी थी। वर्ष 1989 में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम के संचालक परिषद के फैसले के अनुसार, ये अनुशंसित किया गया था कि हर साल 11 जुलाई को वैश्विक तौर पर समुदाय द्वारा सूचित करना चाहिये और आम लोगों के बीच जागरुकता बढ़ाने के लिये विश्व जनसंख्या दिवस के रुप में मनाना चाहिये तथा जनसंख्या मुद्दे का सामना करने के लिये वास्तविक समाधान पता करना चाहिये। जनसंख्या मुद्दे के महत्व की ओर लोगों का जरुरी ध्यान केन्द्रित करने के लिये इसकी शुरुआत की गयी थी।


विश्व जनसंख्या दिवस कैसे मनाया जाता है-

बढ़ती जनसंख्या के मुद्दों पर एक साथ कार्य करने के लिये बड़ी संख्या में लोगों के ध्यानाकर्षण के लिये विभिन्न क्रियाकलापों और कार्यक्रमों को आयोजित करने के द्वारा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विश्व जनसंख्या दिवस मनाया जाता है। सेमिनार, चर्चा, शैक्षिक प्रतियोगिता, शैक्षणिक जानकारी सत्र, निबंध लेखन प्रतियोगिता, विभिन्न विषयों पर लोक प्रतियोगिता, पोस्टर वितरण, गायन, खेल क्रियाएँ, भाषण, कविता, चित्रकारी, नारें, विषय और संदेश वितरण, कार्यशाला, लेक्चर, बहस, गोलमोज चर्चा, प्रेस कॉन्प्रेंस के द्वारा खबर फैलाना, टीवी और न्यूज चैनल, रेडियो और टीवी पर जनसंख्या संबंधी कार्यक्रम आदि कुछ क्रियाएँ इसमें शामिल हैं। कॉन्प्रेंस, शोधकार्य, सभाएँ, प्रोजेक्ट विश्लेषण आदि को आयोजित करने के द्वारा जनसंख्या मुद्दों का समाधान करने के लिये विभिन्न स्वास्थ्य संगठन और जनसंख्या विभाग एक साथ कार्य करते हैं।


विश्व जनसंख्या दिवस का थीम-

वर्ष 2019 में विश्व जनसंख्या दिवस के लिए थीम "फैमिली प्लानिंग: इम्पावरिंग पीपल, डिवेलपिंग नेशन्स" था।

वर्ष 2018 में विश्व जनसंख्या दिवस के लिए थीम "परिवार नियोजन एक मानव अधिकार है" था।

वर्ष 2017 में विश्व जनसंख्या दिवस के लिए थीम "परिवार नियोजन: लोगों को सशक्त बनाना, राष्ट्र विकसित करना" था।

वर्ष 2016 में विश्व जनसंख्या दिवस के लिए थीम "किशोर लड़कियों में निवेश" था।

2015 का थीम था “आपातकाल में अतिसंवेदनशील जनसंख्या”।

2014 का थीम था “जनसंख्या प्रचलन और संबंधित मुद्दे पर चिंता के लिये एक समय” और “युवा लोगों में निवेश करना”।

2013 का थीम था “किशोर पन में गर्भावस्था पर ध्यान”।

2012 का थीम था “जननीय स्वास्थ्य सेवा के लिये विश्वव्यापी पहुँच”।

2011 का थीम था “7 बिलीयन कार्य”।

2010 का थीम था “जोड़े जाओ: कहो क्या चाहिये तुम्हे”।

2009 का थीम था “गरीबा से लड़ो: लड़कियों को शिक्षित करो”।

2008 का थीम था “अपना परिवार नियोजन करो: भविष्य नियोजन करो”।

2007 का थीम था “मनुष्य कार्य पर है”।

2006 का थीम था “युवा होना कठिन है”।

2005 का थीम था “समानता से सशक्तिकरण”।

2004 का थीम था “10 पर आईसीपीडी”।

2003 का थीम था “1,000,000,000 किशोरवस्था”।

2002 का थीम था “गरीबी, जनसंख्या और विकास”

2001 का थीम था “जनसंख्या, पर्यावरण और विकास”।

2000 का थीम था “महिलाओं का जीवन बचाना”।

1999 का थीम था “6 बिलीयन के दिन से गिनना शुरु करें”।

1998 का थीम था “आनेवाला 6 बिलीयन”

1997 का थीम था “किशोर जननी स्वास्थ्य देख-रेख”।

1996 का थीम था “जननीय स्वास्थ्य और एड्स”।

विश्व जनसंख्या दिवस पर विचार

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