Why I am not a Buddhist but an Ambedkarite?

04 मई 2020   |  डॉ. देशराज सिरसवाल   (291 बार पढ़ा जा चुका है)

Why I am not a Buddhist but an Ambedkarite?

आजकल भारत में एक नया दौर चल पड़ा है, किन्तु बहुत पुराना नहीं कह सकते है। कुछ लोग भारत को बुद्धमय देखने का सपना सँजोए दलितों को एक विशेष राजनैतिक विचारधारा की तरफ मोड़ रहे हैं और जो लोग उस विचारधारा को नहीं मानते उन्हें निकृष्ट प्राणी की तरह व्यवहार करते है और अपने को "सच्चा अम्बेडकरवादी" स्थापित करते हैं।
जब हम भारत में संवैधानिक मूल्यों को स्थापित करने की बात कर रहें है तब इस तरह की बातें मुझे थोड़ी अटपटी लगती हैं। आप "ड़ा अम्बेडकर" को किसी विशेष जाति या धर्म के साथ जोड़ कर नहीं देख सकते। उनके द्वारा किये गए संस्थागत प्रयासों के कारण आज भारत के दलित, औरतें और अन्य पिछडे वर्ग सम्मान और स्वतंत्रता की जिंदगी जीने में सक्षम हो पा रहे है। बेशक आज भी भारत में कुछ ऐसी संस्थाएं और "मानसिक रूप से अक्षम" लोग हैं जो इस नए भारत को समझ नहीं पा रहें और विमुल्यों के प्रसार में लगे हैं ऐसे में हम बिल्कुल अलगाव की नीति नहीं अपना सकते। बल्कि उन लोगों को रास्ता दिखाना चाहिए जो "लोकतांत्रिक भारत" के सार्वभौम मूल्यों को अभी नहीं देख पाते हैं।
जो लोग सिर्फ "बौद्ध" होने को ही अम्बेडकरवादी होना मानते हैं, मेरे उनसे कुछ प्रश्न हैं:
1. क्या आप अपने आपको "minority" में शामिल कर चुके हो?
2. क्या आपने अनुसूचित जाति या जनजाति का फायदा लेना छोड़ दिया है?
3. क्या आप अपने से अलग लोगो को समानता भाई चारे के साथ व्यवहार करते हो?
4. क्या आपने पाखण्डवाद और ब्राह्मणवाद को छोड़ दिया है?
5. क्या आप दूसरों के हक का खाना छोड़ चुके हो?

इनमे से यदि एक भी चीज़ नहीं है तो आप कभी अम्बेडकरवादी नहीं हो सकते।

हमारे दलित समाज में बहुत से ऐसे लोग हैं या यूं कहूँ की कुछ विशेष जातियां है जो अपने से तथाकथित निम्न जातियों के हक को राजनीतिक और सामाजिक रुतबे के कारण उन तक नहीं पहुंचने दे रही। साथ ही अपने को पक्का अम्बेडकरवादी और बौद्ध बताती हैं।

डॉ भीमराव अंबेडकर मेरे लिए मेरा आस्तित्व है और महात्मा बुद्ध जीवन जीने का एक सकारात्मक दृष्टिकोण है। आपकी तरह मैं इन्हें राजनीतिक और अपने ही समाज के साथ शोषण का जरिया नहीं बना सकता।
मेरे लिए सर्वप्रथम संवैधानिक मूल्य हैं, फिर मेरा सामाजिक जीवन और उसके बाद मेरा आध्यत्मिक दृष्टिकोण।

जय हिंद, जय भीम, जय संविधान

अगला लेख: डॉ भीमराव अंबेडकर और राजनीतिक लोकतंत्र



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x