नशे से मुक्ति की ओर

10 मई 2020   |  शिल्पा रोंघे   (363 बार पढ़ा जा चुका है)

नशे से मुक्ति की ओर

दीनदयालउज्जैन के सहकारी बैंक में मैनेजर थे, उनका एक पुत्र था अविनाश और दो पुत्रियां, पद्मिनी और सुरेखा। उनकी बेटियां बहुत ही खूबसूरत थी तो उन्हें उनके लिए रिश्ता ढूंढने के लिए ज्यादा मशक्कत नहीं करनी पड़ी। 20 की उम्र पार करते ही दोनों की शादी अच्छे घरों में तय हो गई, दोनों बेटियां पढ़ने में भी तेज थी लेकिन जल्दी शादी होने की वजह से ग्रेजुएशन के बाद पढ़ नहीं पाई और घर गृहस्थी में ही रम गई हालांकि वो इतने जल्द शादी नहीं करना चाहती थी लेकिन पिता की जिद के आगे उन्हें झुकना ही पड़ा, कभी कभी दीनदयाल को भी लगता कहीं उसने जल्दबाजी तो नहीं कर दी लड़कियों की शादी में, तो बेटियों को अपने अपने घरों में खुशहाल देखकर कर ये शंका भी दूर हो जाती और वो ये सोचते कि अच्छे वर और अवसर मिलना भाग्य की ही बात होती है। नौकरी करने के अलावा उनके पास खेती योग्य कुछ एकड़ जमीन और दो घर भी थे। सब कुछ था उनके पास खुश रहने के लिए लेकिन एक ही बात खलती थी कि लाड़ प्यार में उनका लड़का अविनाश बहुत बिगड़ चुका था, उसने एक इंजिनियरिंग कॉलेज में दाखिला लिया लेकिन उसका पढ़ाई में मन नहीं लगा तो दूसरे साल ही उसने पढ़ाई छोड़ दी और यहां वहां भटकने लगा, रात को देर से घर आता, आवारा लड़कों के साथ घूमना उसका शौक बन चुका था,

26 साल की उम्र पार कर चुका था काम धंधे का कुछ अता पता नहीं था एक दो जगह नौकरी की लेकिन मन नहीं लगा तो छोड़ दी, दीनदयाल ने उसे खेती बाड़ी में भी लगाने का प्रयत्न किया लेकिन उसे अपनी आवारागर्दी से फुर्सत ही कहां थी, कई बार बेटे को समझाया डांटा यहां तक की जब वो शराब के नशे में धुत होकर घर आया तो दरवाजा भी नहीं खोला। उनकी पत्नी भी अपने बेटे की इस आदत से बेहद परेशान थी, वो यही सोचा करती थी कि कैसे उनका सीधा सादा बेटा खराब संगत में आकर एक नशेड़ी बन चुका है, कई बार उसकी तबीयत भी शराब के ओवरडोज़ से खराब हो चुकी थी डॉक्टर भी कह चुके थे कि अगर ये लत नहीं छूटी तो इसका असर उसकी किडनियों पर भी हो सकता है, ऐसे बात सुनकर वो फिर अपने माता पिता से ही कुतर्क करता कि अगर मरना हो तो कैसे भी मर सकते है क्या जो शराब नहीं पीते उनकी अकाल मृत्यु नहीं होती है?

उनके दुख की सीमा उस दिन पार कर गई जब लोगों के फोन उनके यहां आने लगे कि आपका लड़का शराब पीकर सड़क किनारे बेसुध पड़ा है या किसी के घर के सामने पड़ा हुआ है। अब उन्हें अपने लड़के को खुद घर लाना पड़ता नशे की हालत में, वो सोचते काश उनकी दो बेटियां ही होती ऐसा कपूत होने का फ़ायदा ही क्या ?

उनके घर की सपन्नता और लड़के की आकर्षक कद काठी देखकर उनके यहां रिश्ते आने लगे लेकिन वो मन ही मन डरने लगे कि ऐसे लड़के की शादी करके क्या किसी लड़की ज़िंदगी बर्बाद करना ठीक रहेगा ? लोगभी उन्हें सलाह देने लगे कि शादी के बाद सुधर जाएगा, दीनदयाल भी लड़की वालों से यही कहते कि उनका लड़का शराब तो क्या चाय को भी हाथ नहीं लगाता लेकिन उनकी अंतरआत्मा इस बात को मान नहीं पा रही थी कि कैसे किसी की लड़की की ज़िंदगी बर्बाद करे।

एक दिन उन्हें एक उपाय सुझा जिसके तहत उन्होंने अपने लड़के से झूठ मूठ कह दिया कि मैंने अपने सारी संपत्ती से तुम्हें बेदखल कर दिया और मैं सारी वसियत अपनी लड़कियों के नाम करने जा रहा हूं। तुम्हारे पास बस एक ही रास्ता है कि तुम शराब छोड़ दो दस दिन के भीतर या फिर परिणाम के लिए तैयार रहो।

ना जाने उस दिन क्या हुआ कि अविनाश का स्वाभिमान जाग उठा और उसने कह दिया क्या आप ये सोच रहे है कि मैं आपके टुकड़ो पर पल रहा हूं मैं खुद ही ये सब छोड़ता हूं लेकिन तब तक आपसे मिलने नहीं आउंगा जब तक आपसे ज्यादा नहीं कमाने वाला ना बन जाउं।

उस रात अविनाश ने ना आव देखा ना ताव बस अपने घर से निकल पड़ा, तब दीनदयाल की पत्नी ने कहा कि आपने गुस्से में आकर क्या कह दिया पता नहीं कहां निकल गया वो, अब घर वापस आएगा कि नहीं?”

अविनाश गणित में बहुत अच्छा था लेकिन उसका मन गलत संगत में आकर पढ़ाई से उचट चुका था।जब वो घर से निकला तो उसने सोचा कि क्या वह जो बड़ी बड़ी बातें कह चुका है क्या उसे पूरा कर पाएगा,वह अपने बचपन के दोस्त किशोर के यहां पहुंचा और उसके साथ करीब एक महीने उसके फ्लैट पर रहा, उसका दोस्त सॉफ्टवेयर से जुड़ा काम करता था, वहां रहकर अविनाश ने छोटी मोटी नौकरी करना शुरु कर दी, सारी जिम्मेदारी खुद पर पड़ते ही उसकी अक्ल ठिकाने आ गई थी, शराब की लत लगभग छूट गई। धीरे धीरे उसने अपने दोस्त किशोर का काम सीखना शुरु किया, किशोर भी उसकी मेहनत और छिपी हुई प्रतिभा देखकर हैरान था उसका तकनीकी नॉलेज डिग्रीधारी लोगों से भी तेज था, दोनों ने अपनी खुद की कंपनी शुरु की जिससे धीरे धीरे अन्य देशों भी से उन्हें काम मिलना शुरु हो गया, पांच वर्षों में उन्होंने काफी तरक्की कर ली थी। अब अविनाश के पास खुद के तीन फ्लैट हो गए थे।

लेकिन वो काम में इतना मशगूल हो गया कि अपने घर पर जाना ही भूल गया। पांच साल तक अविनाश के आने की आस दीनदयाल खो चुके थे। एक दिन अविनाश की कंपनी में पुलिस आई और पूछने लगी “मिस्टर अविनाश क्या यही नाम है आपका”? अविनाश थोड़ा चौंक गया और बोला जी यही नाम है मेरा।

पुलिस वालों ने कहा कि हम आपकी ही तलाश में यहां आए है। अविनाश ने कहा मेरी तलाश में क्यों ?”

आपके पिता दीनदयाल ने आपकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई है।

तभी पुलिस वाले ने अविनाश के पिता को आवाज दी “मिस्टर दीनदयाल क्या यही है आपका बेटा” ?

अविनाश अपने पिता को देखकर हैरान हुआ बोला “सॉरी पापा मेरी वजह से आपको इतनी परेशानी उठानी पड़ी”।

उसके पिता ने कहा माफ़ी तो मुझे मांगनी चाहिए कि गुस्से में बिना सोचे समझे मैंने अपना फ़ैसला सुना दिया।

अविनाश ने कहा नहीं पिताजी गलती तो मेरी थी जो मैंने नशे को अपना साथी बनाया।

अविनाश के पिता कहा ये किसकी कपंनी में काम करता है तू अविनाश ने कहा ये मेरी ही कपंनी है और मेरे दो फ्लैट भी है यहां

आज मैं तुम्हारी प्रगति देखकर बेहद खुश हूं बेटा तुम्हें याद है ना तुमने कहा था कि तुम मुझसे भी ज्यादा हैसियत बनाकर दिखाओगे वो आज तुमने करके दिखा दियादीनदयाल ने कहा।

अविनाश ने कहा नहीं पिताजी आज मैं एक नशेड़ी से एक स्वस्थ मानसिकता का इंसान बन चुका हूं यही मेरे लिए बड़ी बात है पैसा तो कभी भी कमाया जा सकता है आपने अगर उस दिन कड़ा फैसला नहीं लिया होता तो शायद मैं अपनी क्षमता को नहीं पहचान पाता

अविनाश के पिता ने बड़ी ही बेताबी से उसे गला लगा लिया और उसके बिना कटे दिनों को याद करके उनकी आंखों में आंसू आ गए।

शिल्पा रोंघे

© सर्वाधिकार सुरक्षित, कहानी के सभी पात्र काल्पनिक है जिसका जीवित या मृत व्यक्ति

से कोई संबंध नहीं है।

आप इस कहानी को नीचे दिए गए ब्लॉग लिंक पर क्लिक करके भी पढ़ सकते है।

नशे से मुक्ति की ओर

http://koshishmerikalamki.blogspot.com/2020/05/blog-post_9.html

नशे से मुक्ति की ओर

अगला लेख: प्रेम का आखिरी पड़ाव



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
30 अप्रैल 2020
प्रतिमा नाम था उसका, हमेशा मुस्कुराती रहती, ऐसा लगता कि मानों ज़िंदगी बहुत आसान है उसके लिए, ना पढ़ाई को गंभीरता से लेती ना जीवन को, उसकी हमेशा की ये आदत थी सभी क्लॉस में पढ़ने वाली सभी लड़कियों से कहना कि आज पार्टी दो ना, मजबूर कर देती थी उन लड़कियों को घर से पैसे मांगने के लिए, खुद भी देती थी, हाल
30 अप्रैल 2020
16 मई 2020
श्
श्यामा नाम था उसका, ठीक उसके श्वेत रंग केविपरीत, हर दिन हमारे घर के सामने आ खड़ी होती। ऐसा उसने करीब 10 दिन तक किया,हमने कहा ये तो अब पराए घर जा चुकी है फिर यहां क्यों आती है तो घर वालों ने कहाकि ये गाय है इंसान नहीं जो किसी को इतनी जल्दी भूल जाए, भूलना तो इंसानी फ़ितरतहै
16 मई 2020
19 मई 2020
35 साल की वोऔरत माथे पर बड़ा सा तिलक, आंखों में गहरा काजल लगाकर अपने लंबे केश लहराने लगी।“ हां मुझेमहसूस हो रही है, हां मेरे शरीर में उसका प्रवेश हो चुका है....हां उसकी उपस्थितीमुझे महसूस हो रही है...जय मां...जय मां...” मनोरमा ऐसाकहने लगी।अपने मिट्टीसे बने कमरें में लकड़ी
19 मई 2020
03 मई 2020
माधव और अजीत नाम केदो भाई अर्जुननगर नाम के गांव में रहते थे। दोनों भाईयों में काफी प्यार था वोदोनों गेंहू का व्यापार किया करते थे, उनके खेतों में उगाया गया गेंहू दूर दूर तकमशहूर था लेकिन अभी भी वो दोनों मध्यवर्गीय स्थिती में ही थे और सोचा करते थे किखेतों में दिन रात पसीना
03 मई 2020
16 मई 2020
श्
श्यामा नाम था उसका, ठीक उसके श्वेत रंग केविपरीत, हर दिन हमारे घर के सामने आ खड़ी होती। ऐसा उसने करीब 10 दिन तक किया,हमने कहा ये तो अब पराए घर जा चुकी है फिर यहां क्यों आती है तो घर वालों ने कहाकि ये गाय है इंसान नहीं जो किसी को इतनी जल्दी भूल जाए, भूलना तो इंसानी फ़ितरतहै
16 मई 2020
18 मई 2020
आज मनोहर घरआया तो उसकी मां उसे देखकर हक्की बक्की रह गई, चेहरे की हवाईयां उड़ी हुई और कपड़ों पर मिट्टीऔर धूल के धब्बे ऐसे प्रतीत हो रहे थे किमानो मिट्टी में लोट कर आया हो।तब उसकी मांने पूछा बेटा “ये क्या हाल
18 मई 2020
16 मई 2020
शशांक ने कहा “हैलो स्मिता मैं बैंगलुरु पहुंच गयाहूं। यहां की एक फ़ार्मा कपंनी में मैनेज़र के तौर पर मेरा प्रमोशन हो गया है,30 साल का हो गया हूं। कोई अच्छी सी लड़की बताओं ना बिल्कुल तुम्हारीतरह”। “मैं क्या को
16 मई 2020
08 मई 2020
संगीता के विवाह को 6 साल हो चुके थे उसकी 4 साल की एकबेटी थी, वो फिर एक बार मां बनने वाली थी।उसने ये खबर सबसे पहले अपने पति को सुनाई फिर अपनी सासको, जैसे ही उसकी सास ने ये खबर फोन पर सुनी वो बेहद ख़ुश हुई, संगीता गर्मियों कीछुट्टियों में अपनी बेटी को लेकर अपने मायके जबलपुर
08 मई 2020
19 मई 2020
35 साल की वोऔरत माथे पर बड़ा सा तिलक, आंखों में गहरा काजल लगाकर अपने लंबे केश लहराने लगी।“ हां मुझेमहसूस हो रही है, हां मेरे शरीर में उसका प्रवेश हो चुका है....हां उसकी उपस्थितीमुझे महसूस हो रही है...जय मां...जय मां...” मनोरमा ऐसाकहने लगी।अपने मिट्टीसे बने कमरें में लकड़ी
19 मई 2020
02 मई 2020
शीला देखने में काफी सुंदर है, बड़ी बड़ी आंखे,घुंघराले बाल और दूध सी दमकती त्वचा और साथ गुणवंती भी थी, उसके ससुर को वो देखतेही भा गई तो उसने अपनी बेटे मनोज का रिश्ता उसके साथ तय कर दिया, मनोज टॉप केकॉलेज से पढ़ा लिखा था और सिर्फ अंग्रेजी में ही बात करना पसंद करता था, तो वहीशीला संस्कृत में एम ए पास थ
02 मई 2020
03 मई 2020
माधव और अजीत नाम केदो भाई अर्जुननगर नाम के गांव में रहते थे। दोनों भाईयों में काफी प्यार था वोदोनों गेंहू का व्यापार किया करते थे, उनके खेतों में उगाया गया गेंहू दूर दूर तकमशहूर था लेकिन अभी भी वो दोनों मध्यवर्गीय स्थिती में ही थे और सोचा करते थे किखेतों में दिन रात पसीना
03 मई 2020
12 मई 2020
संजीवनी का आज कॉलेजमें प्रथम वर्ष का फायनल एग्ज़ाम है, उसकापेपर सुबह 8 बजे है, लेकिन ये क्या वो तो 6.30 बजने के बाद भी उठी ही नहीं। उसकीमां ने आवाज़ देकर उसे जगाया कहा “बेटा तुम्हारा आज इम्तिहान है और तुम सो हीरही हो, रोज तो सुबह 4 बजे उठ
12 मई 2020
21 मई 2020
सुरेखा की शहर के बीचों-बीच कपड़े कीबहुत बड़ी दुकान थी। हर तरह की महंगी साड़ियां और सलवार कमीज के कपड़े वहां मिलतेथे। अच्छी ख़ासी आमदानी होती थी उसकी। क्योंकि अकेले दुकान संभालना मुश्किल था तोउसने कांता को अपनी दुकान पर काम करने के लिए रख लि
21 मई 2020
02 मई 2020
डा
शाम कोविद्यालय से घर वापिस आते ही श्रीमती जी का आदेश हुआ की कुछ जरुरी सामान लानाहै...भागते हुए बाजार गया...वापिस आते-आते रात्रि के आठ बज चुके थे...आते ही भोजनपर टूट पड़ा....अभी प्रथम निवाला ही मुंह को गया था की फोन घनघना उठा...निवालागटकते-गटकते जेब में हाथ डाला और मोबा
02 मई 2020
22 मई 2020
सुरेश की उम्र करीब तीस साल और कद 5 फीट 4 इंचथा, सामने से सिर पर बाल थोड़े कम हो रखे थे, एक लंबा कुर्ता और खादी का झोला,हमेशा यही लुक था उसका। ज्यादातर उन विषयों पर लिखना पसंद करता था जिस पर लोगध्यान ही नहीं द
22 मई 2020
22 मई 2020
सुरेश की उम्र करीब तीस साल और कद 5 फीट 4 इंचथा, सामने से सिर पर बाल थोड़े कम हो रखे थे, एक लंबा कुर्ता और खादी का झोला,हमेशा यही लुक था उसका। ज्यादातर उन विषयों पर लिखना पसंद करता था जिस पर लोगध्यान ही नहीं द
22 मई 2020
14 मई 2020
चंद्रपुर नाम के गांव में बिना किसी गुनाह केसभी पंचो के आगे सर झुकाकर खड़ी रही विनिता और उसे फ़रमान सुना दिया गया कि उसेअपने माता-पिता के घर वापस भेज जाए, उसी दोपहर उसका पति उसे अपनी कार में बिठाकरउसके मायके की तरफ़ निकल पड़ा। दोनों के बीच एक अजीब सी ख़ामोशी पसरी हुई है, तभीकार की खिड़की से खेतों की
14 मई 2020
20 मई 2020
मा
सचिन को सुबह-सुबह उसके दोस्त का फ़ोन आया वोकहने लगा “अरे वाह तूने तो सच में शहर का नाम रोशन कर दिया”सचिन ने कहा“ अरेक्या हुआ ऐसा”नवनीत ने कहा “तेरा इंटरव्यू छपा था जबलपुर केएक अखबार में”सचिन ने कहा “ओह उसकी बात कररहा है तू”हेडलाईन छपी “शहर
20 मई 2020
16 मई 2020
शशांक ने कहा “हैलो स्मिता मैं बैंगलुरु पहुंच गयाहूं। यहां की एक फ़ार्मा कपंनी में मैनेज़र के तौर पर मेरा प्रमोशन हो गया है,30 साल का हो गया हूं। कोई अच्छी सी लड़की बताओं ना बिल्कुल तुम्हारीतरह”। “मैं क्या को
16 मई 2020
26 अप्रैल 2020
चंद्रा साब ने ताला खोला और बेडरूम में आ गए. टॉवेल उठाया और इत्मीनान से नहा लिए. चिपचिपे मौसम से कुछ तो राहत मिली. दाल गरम की, एक प्याज काटा और प्लेट में चावल डाल कर डाइनिंग टेबल पर आ गए. एक व्हिस्की का पेग बना कर टेबल पर रख लिया. पर बंद घर में अलग सी महक आ रही थी तो उठकर
26 अप्रैल 2020
16 मई 2020
श्
श्यामा नाम था उसका, ठीक उसके श्वेत रंग केविपरीत, हर दिन हमारे घर के सामने आ खड़ी होती। ऐसा उसने करीब 10 दिन तक किया,हमने कहा ये तो अब पराए घर जा चुकी है फिर यहां क्यों आती है तो घर वालों ने कहाकि ये गाय है इंसान नहीं जो किसी को इतनी जल्दी भूल जाए, भूलना तो इंसानी फ़ितरतहै
16 मई 2020
19 मई 2020
35 साल की वोऔरत माथे पर बड़ा सा तिलक, आंखों में गहरा काजल लगाकर अपने लंबे केश लहराने लगी।“ हां मुझेमहसूस हो रही है, हां मेरे शरीर में उसका प्रवेश हो चुका है....हां उसकी उपस्थितीमुझे महसूस हो रही है...जय मां...जय मां...” मनोरमा ऐसाकहने लगी।अपने मिट्टीसे बने कमरें में लकड़ी
19 मई 2020
21 मई 2020
सुरेखा की शहर के बीचों-बीच कपड़े कीबहुत बड़ी दुकान थी। हर तरह की महंगी साड़ियां और सलवार कमीज के कपड़े वहां मिलतेथे। अच्छी ख़ासी आमदानी होती थी उसकी। क्योंकि अकेले दुकान संभालना मुश्किल था तोउसने कांता को अपनी दुकान पर काम करने के लिए रख लि
21 मई 2020
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x