लकी ड्रेस - एक प्रेरणादायी कथा

12 मई 2020   |  शिल्पा रोंघे   (377 बार पढ़ा जा चुका है)

लकी ड्रेस - एक प्रेरणादायी कथा

संजीवनी का आज कॉलेज में प्रथम वर्ष का फायनल एग्ज़ाम है, उसका पेपर सुबह 8 बजे है, लेकिन ये क्या वो तो 6.30 बजने के बाद भी उठी ही नहीं। उसकी मां ने आवाज़ देकर उसे जगाया कहा बेटा तुम्हारा आज इम्तिहान है और तुम सो ही रही हो, रोज तो सुबह 4 बजे उठ जाती हो आज क्या हुआ

संजीवनी ने कहा मम्मी मैं एक्ज़ाम नहीं देना चाहती है हूं आज क्योंकि मुझे लगता है कि ये पेपर बहुत कठिन होगा मैं शायद इसमें पास नहीं हो पाउंगी, इससे अच्छा है कि पेपर ही ना दो।

संजीवनी की मम्मी लेकिन तुमने तो साल भर मेहनत की है, मुझे नहीं लगता कि ये तुम्हारे लिए कठिन होगा

संजीवनी मम्मी मुझे ऐसा लगता है कि पेपर ना ही दो तो अच्छा है

संजीवनी की मम्मी देखो बेटा मैं तुम्हें एक राज की बात बताना चाहती हूं वो जो तुम्हारी नीले रंग कीस्कर्ट है ना वो बहुत ज्यादा लकी है अगर वो पहनकर तुम परीक्षा देने जाओगी तो ज़रुर अपना पेपर क्लियर कर लोगी संजीवनी ऐसा कैसा हो सकता है मम्मी?”

संजीवनी की मम्मी ऐसा मुझे एक ज्योतिषी ने कहा था। तुम सिर्फ पेपर दे कर आ जाओ ज्यादा चिंता मत करो सब ठीक हो जाएगा

संजीवनी जल्दी से अपने बिस्तर से उठी और फटाफट नहाकर दो बिस्किट खाकर एग्ज़ाम देने चली गई।

घर आकार उसकी मम्मी ने पूछा क्या हुआ तब वो बोली मैनें सारे सवाल अपनी तरफ से हल कर दिए कितने सही है मुझे नहीं पता है

उसकी मां ने कहा चलो तुमने एग्ज़ाम तो दिया अब तुम असफल हो या सफल इससे मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता है। कुछ दिनों बाद रिजल्ट आया तो उस विषय में संजीवनी के अच्छे नंबर आए जो उसे बहुत कठिन लगता था। उसने अपनी मम्मी का शुक्रिया अदा किया कि उन्होंने उसे वो लकी ड्रेस दिया

तब उसकी मम्मी ने कहा कि उसने उसके भले के लिए झूठ बोला कि वो लकी ड्रेस है असल में ऐसा कुछ भी नहीं, ऐसा तो उसने सिर्फ उसका हौंसला बढ़ाने के लिए किया और कहा कि हमें जीवन में सफलता और असफलता की चिंता किए बगैर की संघर्ष करना चाहिए, तभी हम सफल हो पाएंगे

तब से संजीवनी ने अपने ज़हन में ये गांठ बांध ली कि उसका काम सिर्फ कर्म करना है ना कि परिणाम के बारे में सोचना।

शिल्पा रोंघे


© सर्वाधिकार सुरक्षित, कहानी के सभी पात्र काल्पनिक है जिसका जीवित या मृत व्यक्ति

से कोई संबंध नहीं है।


मेरी इस कहानी को नीचे दी गई लिंक पर क्लिक करके मेरे ब्लॉग पर भी पढ़ सकते है।

लकी ड्रेस - एक प्रेरणादायी कथा

लकी ड्रेस - एक प्रेरणादायी कथा

अगला लेख: प्रेम का आखिरी पड़ाव



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
22 मई 2020
सुरेश की उम्र करीब तीस साल और कद 5 फीट 4 इंचथा, सामने से सिर पर बाल थोड़े कम हो रखे थे, एक लंबा कुर्ता और खादी का झोला,हमेशा यही लुक था उसका। ज्यादातर उन विषयों पर लिखना पसंद करता था जिस पर लोगध्यान ही नहीं द
22 मई 2020
19 मई 2020
35 साल की वोऔरत माथे पर बड़ा सा तिलक, आंखों में गहरा काजल लगाकर अपने लंबे केश लहराने लगी।“ हां मुझेमहसूस हो रही है, हां मेरे शरीर में उसका प्रवेश हो चुका है....हां उसकी उपस्थितीमुझे महसूस हो रही है...जय मां...जय मां...” मनोरमा ऐसाकहने लगी।अपने मिट्टीसे बने कमरें में लकड़ी
19 मई 2020
16 मई 2020
शशांक ने कहा “हैलो स्मिता मैं बैंगलुरु पहुंच गयाहूं। यहां की एक फ़ार्मा कपंनी में मैनेज़र के तौर पर मेरा प्रमोशन हो गया है,30 साल का हो गया हूं। कोई अच्छी सी लड़की बताओं ना बिल्कुल तुम्हारीतरह”। “मैं क्या को
16 मई 2020
21 मई 2020
“कम्मो...अरी क्या हुआ...? कुछ बोल तो सही... कम्मो... देख हमारेपिरान निकले जा रहे हैं... बोल कुछ... का कहत रहे साम...? महेसकब लौं आ जावेगा...? कुछ बता ना...” कम्मो का हाल देख घुटनोंके दर्द की मारी बूढ़ी सास ने पास में रखा चश्मा चढ़ाया, लट्ठीउठाई और चारपाई से उतरकर लट्ठी टेकती कम्मो तक पहुँच उसे झकझोरने
21 मई 2020
19 मई 2020
35 साल की वोऔरत माथे पर बड़ा सा तिलक, आंखों में गहरा काजल लगाकर अपने लंबे केश लहराने लगी।“ हां मुझेमहसूस हो रही है, हां मेरे शरीर में उसका प्रवेश हो चुका है....हां उसकी उपस्थितीमुझे महसूस हो रही है...जय मां...जय मां...” मनोरमा ऐसाकहने लगी।अपने मिट्टीसे बने कमरें में लकड़ी
19 मई 2020
26 मई 2020
उसने उसके भिगोए हुएदो बादाम खा लिए, ये अब उसकी नियमित दिनचर्या का हिस्सा बन चुका था। वो हमेशाअस्वस्थ रहती थी, वो भी सिर्फ 23 साल की उम्र में जब उसका यौवन और सौंदर्य किसी कोभी प्रभावित कर सकता था लेकिन चांद में दाग की तरह कमजोरी के निशान उसके चेहरे परभी दिखाई देने लगे।उसके
26 मई 2020
02 मई 2020
डा
शाम कोविद्यालय से घर वापिस आते ही श्रीमती जी का आदेश हुआ की कुछ जरुरी सामान लानाहै...भागते हुए बाजार गया...वापिस आते-आते रात्रि के आठ बज चुके थे...आते ही भोजनपर टूट पड़ा....अभी प्रथम निवाला ही मुंह को गया था की फोन घनघना उठा...निवालागटकते-गटकते जेब में हाथ डाला और मोबा
02 मई 2020
18 मई 2020
आज मनोहर घरआया तो उसकी मां उसे देखकर हक्की बक्की रह गई, चेहरे की हवाईयां उड़ी हुई और कपड़ों पर मिट्टीऔर धूल के धब्बे ऐसे प्रतीत हो रहे थे किमानो मिट्टी में लोट कर आया हो।तब उसकी मांने पूछा बेटा “ये क्या हाल
18 मई 2020
18 मई 2020
आज मनोहर घरआया तो उसकी मां उसे देखकर हक्की बक्की रह गई, चेहरे की हवाईयां उड़ी हुई और कपड़ों पर मिट्टीऔर धूल के धब्बे ऐसे प्रतीत हो रहे थे किमानो मिट्टी में लोट कर आया हो।तब उसकी मांने पूछा बेटा “ये क्या हाल
18 मई 2020
03 मई 2020
माधव और अजीत नाम केदो भाई अर्जुननगर नाम के गांव में रहते थे। दोनों भाईयों में काफी प्यार था वोदोनों गेंहू का व्यापार किया करते थे, उनके खेतों में उगाया गया गेंहू दूर दूर तकमशहूर था लेकिन अभी भी वो दोनों मध्यवर्गीय स्थिती में ही थे और सोचा करते थे किखेतों में दिन रात पसीना
03 मई 2020
23 मई 2020
भो
ठीक 30 बरस की उम्रमें हैजे से उसकी मौत हो गई, गांव से शहर ले जाया गया उसे। इससे पहले कि उसेअस्पताल ले जाया जाता, यमराज ने उसकी जीवन यात्रा को स्वर्ग तक मोड़ दिया, शायदवहीं गया
23 मई 2020
30 अप्रैल 2020
प्रतिमा नाम था उसका, हमेशा मुस्कुराती रहती, ऐसा लगता कि मानों ज़िंदगी बहुत आसान है उसके लिए, ना पढ़ाई को गंभीरता से लेती ना जीवन को, उसकी हमेशा की ये आदत थी सभी क्लॉस में पढ़ने वाली सभी लड़कियों से कहना कि आज पार्टी दो ना, मजबूर कर देती थी उन लड़कियों को घर से पैसे मांगने के लिए, खुद भी देती थी, हाल
30 अप्रैल 2020
14 मई 2020
चंद्रपुर नाम के गांव में बिना किसी गुनाह केसभी पंचो के आगे सर झुकाकर खड़ी रही विनिता और उसे फ़रमान सुना दिया गया कि उसेअपने माता-पिता के घर वापस भेज जाए, उसी दोपहर उसका पति उसे अपनी कार में बिठाकरउसके मायके की तरफ़ निकल पड़ा। दोनों के बीच एक अजीब सी ख़ामोशी पसरी हुई है, तभीकार की खिड़की से खेतों की
14 मई 2020
19 मई 2020
35 साल की वोऔरत माथे पर बड़ा सा तिलक, आंखों में गहरा काजल लगाकर अपने लंबे केश लहराने लगी।“ हां मुझेमहसूस हो रही है, हां मेरे शरीर में उसका प्रवेश हो चुका है....हां उसकी उपस्थितीमुझे महसूस हो रही है...जय मां...जय मां...” मनोरमा ऐसाकहने लगी।अपने मिट्टीसे बने कमरें में लकड़ी
19 मई 2020
16 मई 2020
श्
श्यामा नाम था उसका, ठीक उसके श्वेत रंग केविपरीत, हर दिन हमारे घर के सामने आ खड़ी होती। ऐसा उसने करीब 10 दिन तक किया,हमने कहा ये तो अब पराए घर जा चुकी है फिर यहां क्यों आती है तो घर वालों ने कहाकि ये गाय है इंसान नहीं जो किसी को इतनी जल्दी भूल जाए, भूलना तो इंसानी फ़ितरतहै
16 मई 2020
19 मई 2020
35 साल की वोऔरत माथे पर बड़ा सा तिलक, आंखों में गहरा काजल लगाकर अपने लंबे केश लहराने लगी।“ हां मुझेमहसूस हो रही है, हां मेरे शरीर में उसका प्रवेश हो चुका है....हां उसकी उपस्थितीमुझे महसूस हो रही है...जय मां...जय मां...” मनोरमा ऐसाकहने लगी।अपने मिट्टीसे बने कमरें में लकड़ी
19 मई 2020
18 मई 2020
आज मनोहर घरआया तो उसकी मां उसे देखकर हक्की बक्की रह गई, चेहरे की हवाईयां उड़ी हुई और कपड़ों पर मिट्टीऔर धूल के धब्बे ऐसे प्रतीत हो रहे थे किमानो मिट्टी में लोट कर आया हो।तब उसकी मांने पूछा बेटा “ये क्या हाल
18 मई 2020
17 मई 2020
अपने स्टील के डब्बेमें रखे कुछ गुलाब जामुन में से एक को निकालकर प्रीति ने अनिमेष के हाथ मेंजबर्दस्ती थमा दिया। उसके बाद अपने दो साल के बच्चें को खिलाने के बाद अपने पति केजबरन मुंह में ठूंस दिया। ऐसी मिठाई खाकर भी ख़ुश नहीं महसूस कर रहा था अ
17 मई 2020
20 मई 2020
मा
सचिन को सुबह-सुबह उसके दोस्त का फ़ोन आया वोकहने लगा “अरे वाह तूने तो सच में शहर का नाम रोशन कर दिया”सचिन ने कहा“ अरेक्या हुआ ऐसा”नवनीत ने कहा “तेरा इंटरव्यू छपा था जबलपुर केएक अखबार में”सचिन ने कहा “ओह उसकी बात कररहा है तू”हेडलाईन छपी “शहर
20 मई 2020
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x