लक्ष्मण चरित्र भाग - ३३ :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

17 मई 2020   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (425 बार पढ़ा जा चुका है)

लक्ष्मण चरित्र भाग - ३३ :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

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‼️ *भगवत्कृपा हि केवलम्* ‼️


🐍🏹 *लक्ष्मण* 🏹🐍


🌹 *भाग - ३३* 🌹


🩸🍏🩸🍏🩸🍏🩸🍏🩸🍏🩸


*➖➖➖ गतांक से आगे ➖➖➖*




मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम विशाल बानर सेना के साथ दुर्गम रास्तों को पार करते ही समुद्र तट पर पहुंचे | उस विशाल सेना में *लक्ष्मण जी* की महिमा का वर्णन करते हुए तुलसीदास जी ने *बरवै रामायण* में लिखा है :----


*विविध बाहनी विलसत सहित अनंत !*

*जलधि सरिस को कहै राम भगवंत !!*


*श्री लक्ष्मण जी* के साथ (वानर और भालओं की ) नाना प्रकार की सेना शोभा पा रही है | श्री राम की सेना विशालता समुद्र को भी लज्जित कर रही है , क्योंकि समुद्र की भी एक सीमा होती है | एक सीमा के बाद उसका भी क्षेत्र समाप्त हो जाता है परंतु जिस सेना में *लक्ष्मण जी* के रूप में साक्षात भगवान अनन्त (शेष जी ) विराजमान थे और जो स्वयं श्री राम ( नारायण ) की सेना थी उसे प्राकृतिक समुद्र के समान नहीं कहा जा सकता , क्योंकि समुद्र तो ससीम है परंतु श्री राम जी की सीमा सेना में अनन्त ,असीम *लक्ष्मण जी* स्वयं हैं | इस प्रकार से सेना जब समुद्र तट पर पहुंच गई तो वहीं शिविर बन गये | एक दिन श्रीराम अपने शिविर में बैठे हुए थे तभी गुप्तचरों ने आकर सूचना दी कि रावण का अनुज भ्राता *विभीषण* अपने निजी सचिवों के साथ श्री राम के दर्शन को आया है | भगवान श्रीराम ने सुग्रीव से उनकी राय पूछी तो सुग्रीव ने कहा :- हे भगवन ! राक्षसों की माया बड़ी विचित्र है | हो सकता है कि वह हमारा भेद लेने आया हो इसलिए उसे बांधकर रखा जाए | भगवान श्री राम ने कहा:- मित्र ! वह हमारी शरण में आया है और मेरी और मेरे रघुकुल की मर्यादा शरणागत वत्सल की है | भगवान कहते हैं :---;


*रघुकुल की रीति रही शरणागत वत्सल की ,*

*शरण में जो आया उसे हृदय से लगाएंगे !*

*क्रूर हो कुचाली चाहे वधिक पातकी भारी ,*

*शरणागत होय तो सब पातक भुलाएंगे !!*

*मन में दुर्भावना समेटे हुए पापी जीव ,*

*सम्मुख हुआ तो सब दोष मिट जाएंगे !*

*"अर्जुन" विभीषण की स्थिति हो जैसी भी ,*

*उनको सम्मान सहित अपना बनाएंगे !!*


श्री राम कहते हैं कि हे सुग्रीव ! हमारे रकुल रीति है कि यदि कोई पाती , हत्यारा , क्रूर भी शरण में आ जाता है तो वह अभयदान पा जाता है | और हे मित्र ! विचार करो कि कोई दुष्ट हृदय का व्यक्ति क्या मेरे सामने आ सकता है ?? यदि मान लिया आ भी जाता है तथा उसके हृदय में कोई दुर्भावना भी हुई तो आप शायद हमारे अनुज भ्राता *लक्ष्मण* को भूल रहे हो | सुग्रीव को बड़ा आश्चर्य हुआ कि भगवान आखिर क्या कहना चाहते हैं | भगवान कहते हैं:---


*जग महुँ सखा निशाचर जेते !*

*लछिमन हनहिं निमिष महुँ तेते !!*


हे सुग्रीव ! यहां तो एक विभीषण अपने कुछ सचिवों के साथ आ रहा है तो आप भयभीत हो रहे हैं कि वह भेद लेने आ रहा है | मित्र ! एक रहस्य की बात सुन लो ! मात्र लंका एवं रावण ही नहीं अपितु इस सृष्टि में जितने भी निशाचर एवं आततायी हैं उन सबका वध हमारा *लक्ष्मण* एक क्षण में कर सकता है | श्री राम के श्रीमुख से *लक्ष्मण जी* के बलाबल की महिमा सुनकर बांदर मंडल हतप्रभ रह गया | विभीषण को श्रीराम ने अपनी शरण देकर उसका राज्याभिषेक कर दिया | बिना रावण का वध किये ही राघव ने विभीषण को लंका पति की उपाधि दे दी | सुग्रीव ने कहा :- हे प्रभु ! आप ने विभीषण को लंका का राजा तो बना दिया परंतु यदि हम रावण को हम ना जीत पाए तो क्या आपका वचन झूठा नहीं हो जाएगा ???? भगवान श्रीराम कहते हैं :- हे सुग्रीव !


*मारि दशानन राज विभीषण कहँ देइहौं यह आन हमारी !*

*जौं न मरा दशकण्ठ तबहुँ नहिं असत् होय यह आन विचारी !!*

*छाँड़ि अयोध्या रहब वन महँ भाइन्ह संग महँ सगरौ महतारी !*

*"अर्जुन" लंक को छाँड़ि विभीषण का करि देइहौं अवधविहारी !!*


भगवान श्री राम की इस बात को सुनकर रघुनंदन की जय जयकार होने लगी | भगवान श्रीराम ने अपने सखा सुग्रीव के साथ-साथ विभीषण जी से भी पूछा कि हे मित्रों ! लंका के तट तक तो हम आ गए हैं परंतु इसे समुद्ररूपी विशाल बाधा को कैसे पार किया जाय ? कृपा कर आप सभी उचित सलाह बताइए जिससे कि इस विशाल सागर को पार करके हम अपनी सेना के साथ लंका तक पहुंच सके | समुद्र को पार करने का उपाय सभी लोग अपने-अपने विवेकानुसार बताने लगे |



*शेष अगले भाग में :----*


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आचार्य अर्जुन तिवारी

प्रवक्ता

श्रीमद्भागवत/श्रीरामकथा

संरक्षक

संकटमोचन हनुमानमंदिर

बड़ागाँव श्रीअयोध्याजी

(उत्तर-प्रदेश)

9935328830


🍀🌟🍀🌟🍀🌟🍀🌟🍀🌟🍀

अगला लेख: महाभारत :--- आचार्य अर्जुन तिवारी



जय जय सियाराम
आचार्य श्री

Abhishek Mishra
17 मई 2020

दिब्य प्रस्तुति 🙏🌹🚩

जय हो बहुत सुन्दर लक्ष्मण चरित्र जय जय सीताराम

जय श्री राम
जय लखन लाल

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