संगत का असर

18 मई 2020   |  शिल्पा रोंघे   (479 बार पढ़ा जा चुका है)

संगत का असर

आज मनोहर घर आया तो उसकी मां उसे देखकर हक्की बक्की रह गई, चेहरे की हवाईयां उड़ी हुई और कपड़ों पर मिट्टी और धूल के धब्बे ऐसे प्रतीत हो रहे थे कि मानो मिट्टी में लोट कर आया हो।

तब उसकी मां ने पूछा बेटा ये क्या हालत बना रखी है?”

मनोहर कॉलेज से लौटा था उसने सोचा अगर सच बताया तो शायद उसकी मां नाराज़ होगी और बिना कोई सफाई दिए वो नहाने चला गया और अपने कमरे में लेट गया।

काफी देर तक सोते देख उसकी मां ने कहा आज इतनी थकान क्यों हो रही है तुम्हें?”

मनोहर ने कहा अब शायद सब कुछ साफ साफ बता देना ही ठीक रहेगा।

मां मैं अपने दोस्त मंदार के यहां कॉलेज के खत्म होने के बाद उसके रुम पर हालचाल पूछने गया क्योंकि वो कॉलेज नहीं आया था दो तीन दिन से। तब देखा कि वो शराब के नशे में धुत था।उसने मुझे कहा चल ना यार क्या पढ़ाई वढ़ाई के पीछे लगा रहता है तू आज फ़िल्म देखकर आते है उसने जिद की, कि मेरी बाईक वही चलाएगा लेकिन मैंने कहा कि नशे में ड्राईव करना सही नहीं है, लेकिन वो नहीं माना और जबर्दस्ती मुझे पीछे बिठाकर बाईक चलाने लगा वो भी फुल स्पीड पर, मुझे लगा ही की आज कोई अनहोनी होने वाली है और उसने एक बाईक को टक्कर मार दी फिर क्या उस पर बैठे दो हट्टे कट्टे आदमी गिर गए। मैंने सॉरी कहने की कोशिश भी की लेकिन उन्होंने हमें दो चार थप्पड़ देकर ज़मीन पर गिरा दिया मंदार नशे में धुत था तो अपने आप को संभाल ही नहीं पा रहा था, क्योंकि ये हादसा सिग्नल के थोड़ी ही दूर हुआ था तो ट्रैफ़िक पुलिस वालों ने आकार उन लोगों को समझा कर शांत किया और हमें भी कम से कम एक घंटे लेक्चर सुनाया, मंदार के मुहं से शराब की बू आ रही थी, ये देखकर वो और ज्यादा चिढ़ गए और कहने लगे अपने माता पिता को फोन कर बुलाओ, मैंने जैसे तैसे मामला शांत किया ये कहकर की उसकी मानसिक हालत ठीक नहीं है और किसी तरह बाईक पर मनोज को उसके कमरे पर छोड़कर आया। मां इस तरह मेरी हालत होगी मैंने कभी सोचा ही नहीं था मनोज की वजह से मुझे कितनी बेइज्जती झेलनी पड़ी

मनोहर की मां ने कहा देखो बेटा तुमने वो तो कहानी सुनी ही होगी जिसमें कहा गया है कि सड़े हुए सेब के बगल में अगर अच्छा सेब रख दो तो वो भी सड़ जाता है। बुरी संगत के वजह से हमारी भी छवि खराब हो जाती है तुम अपने दोस्त को अपने हाल पर छोड़ दो। उसे बदलना होगा तो वो खुद ही बदल जाएगा। अगर किसी और के कर्मों के भागीदार बनोगे तो सजा तो तुम्हें भी भुगतनी ही होगी

मनोहर ने कहा “आप सही कह रही हो, गलती तो मुझसे भी हुई चाहे वो अंजाने में ही क्यों ना हो”।

शिल्पा रोंघे


© सर्वाधिकार सुरक्षित, कहानी के सभी पात्र काल्पनिक है जिसका जीवित या मृत व्यक्ति

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