अर्जुन के तीर

22 मई 2020   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (410 बार पढ़ा जा चुका है)

अर्जुन के तीर

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‼ *भगवत्कृपा हि केवलम्* ‼


🏹 *अर्जुन के तीर* 🏹


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*मनुष्य का जीवन कैसा होगा ? उसके क्रियाकलाप कैसे होंगे ? यह उसकी विचारधारा पर आधारित होता है | साहित्य जगत में दो प्रकार की विचारधारा कहीं गई है | प्रथम उत्कृष्ट विचारधारा एवं द्वितीय निकृष्ट विचारधारा | उत्कृष्ट विचारधारा के चलते मनुष्य प्रत्येक समाज में अपने विचारों के माध्यम से सम्मान पाता है , क्योंकि उत्कृष्ट विचारधारा सदैव प्रेम , सौहार्द , आपसी सामंजस्य एवं एक दूसरे का सम्मान करने का बीजारोपण करती है , वहीं दूसरी और निकृष्ट विचारधारा कलह , कटुती के बीज बोती है एवं व्यक्ति को निरादर , मुसीबत अविश्वास एवं असहयोग का पात्र तोबना ही देती है साथ ही ऐसी विचारधारा मनुष्य को असम्मानित भी कराती रहती है इसलिए प्रत्येक मनुष्य को सकारात्मक एवं उत्कृष्ट विचारधारा को अपने जीवन में बनाए रखने का प्रयास करना चाहिए |*


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*शुभम् करोति कल्याणम्*


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