अपने अपने लॉक डाउन - दिनेश डाक्टर

23 मई 2020   |  दिनेश डॉक्टर   (1104 बार पढ़ा जा चुका है)

अपने अपने लॉक डाउन - दिनेश डाक्टर

अपने अपने लॉक डाउन


दिनेश डाक्टर


"तो और क्या खबर है "- सिंह साहेब ने गुप्ता जी पूछा ।

"खबर तो वही कल वाली है । तब्लीगियों की वजह से केस बढ़ते जा रहे है । साले हरामी जगह जगह थूक रहें है , पेशाब कर रहे है, कमरों के सामने हग रहे है । अब तो मजदूर भी भाग रहें है । वैसे अमरीका का बहुत बुरा हाल है । लाखों बीमार है । हज़ारों मर रहे है । पर दारू उन्होंने बन्द नही की । सारे ठेके खुले हुए है ।"- गुप्ता जी ने मास्क लगाए लगाए जवाब दिया ।


" अमरीका ते स्पेन विच भी तब्लीगियों दा ही काम लगदा है मैंनू तो । एत्थे तो मोदी ने साड्डे हाथ विच थालियां पकड़ा दी है- बस उन्ही नू वजान्दे रहो । यार बंसल साब कित्थो दो बोतलां दा इंतज़ाम तो कराओ" कपूर ने खुंदक में फ़रमाया ।


"भाई साब मजदूरों का भोत बुरा हाल है । गुरुद्वारे वाले अगर लंगर नही लगाते तो भोत बुरा हाल हो जाता । वैसे कह रहे है कि शराब की दुकानें जल्दी खुलने वाली है" - छाबड़ा साहेब ने बीच में टपकते हुए ऊंची आवाज में घोषणा की ।


" ओ मेरी बात सुणो । साईं रसोई वाळे रोज एक हजार घरों से खाणे के पैकेट कट्ठे कर रहे है । मैंने भी रोज के बीस पैकेट देणे कर रक्खे है । किसी ने दारू चाहिए तो हरियाणे ते पूरी पेट्टी मंगवा सकूं । पर पूरी पेट्टी लेणी पड़ेगी" रोहतक के सांगवान साहब ने ठेठ हरियाणवी में दहाड़ कर कहा ।


"यार धंधा खत्म हो गिया । समझ नही आ रिया के क्या होगा । स्टाफ रोज़ फोन करके तनखा के पैसे मांग रिया है । अब कमाई तो है नइ खर्चे उतने ही है । परेसानी बढ़ रई हैगी । दो तीन पैग रोज़ लगा लेते थे - उसका भी जुगाड़ खत्म हो रिया है । हरियाणे की सराब में तो गड़बड़ी है । नक़ली ज्यादा है । मैंने एक बार पी थी - दो दिन सिर पकड़ गिया" - शुक्ला जी ने बड़ी नज़ाकत से फ़रमाया ।


"सुक्ला जी धंधा गया तेल लेणें । जान बचा लो वो ही बहोत है । दुनिया मरण लाग री है अर आपणे धंधे की पड़ी है । कोरोना हो ग्या और मौत आगी तो कित त धंधा करोगे । अर एक बात बता दयूं । म्हारे अपणे परिवार के सराब के ठेक्के है रोहतक म । नकली सराब मिलती होगी थारी यूपी में । " सांगवान ने हरियाणे की नकली शराब की तोहमत पर चिढ़ कर नथुने फुलाते हुए जवाब दिया ।


"एक बात बताऊं कोरोना की वैक्सीन अगर बनेगी तो बनेगी भारत में ही । मोदी जी दिन रात लगे हुए है । सारे साइंटिस्टों को डंडा कर रखा है भाई साहब । वैसे एक बात समझ नही आयी जब दाल चावल दूध साबुन तेल ब्रेड अंडे मीट मुर्गा सब मिल रहा है तो शराब क्यों बन्द कर दी । हम तो बोत्तल को भी सेनेटाइजर से साफ कर लेते । वैसे मै मोदी को मानता हूँ पर ये शराब बन्द करने वाली बात मेरे पल्ले नही पड़ी" - सिक्का साहब ने शिकायत भरे लहजे में थोड़ा दुखी होकर कहा ।


"अरे यार तुम्हे पता है - किसी ने हमारे ग्रुप की फोटो खींच कर पुलिस को कम्प्लेंट कर दी है । SHO का फोन आया था कि पार्क में कुछ लोग सुबह शाम बैठ कर गप्पबाज़ी करते है और सोशल डिस्टेंस का खयाल नही करते और मास्क भी नही लगाते । कभी भी सोसायटी में पुलिस की गश्त हो सकती है । अच्छा सुनो किसी को दारू चाहिए तो मुझे बताना । मेरी जान पहचान के एक दो पुलिस वाले है । थोड़ा बहुत ऊपर लेकर आराम से बंदोबस्त हो जाएगा । ठेक्के बन्द है हमारे आपके लिए । इन पुलिसियों का मामला तो पूरा सेट है" - मित्तल साहेब ने इधर उधर सावधानी से ताकते हुए धीरे से कहा ।


"अबे छठी मंजिल वाले उस कव्वे ने फोटो खींच कर भेजी होगी पुलिस को । वो ही हरामी ऊपर टंगा टंगा फोटुएं खींचता रहता है । पर यहां कौन डरता है पुलिस से । अबे अपने घर में बैठे है । सोसायटी हमारा घर है । ये पार्क हमारा ड्राइंग रूम है । देख लेंगे स्साले पुलिसियों को । हद से हद पाँच सौ रुपये स्सालों के मुंह पर मार देंगे । छोड़ो यार मस्ती लो । अच्छा बताओ आज बनाएं प्रोग्राम । पर यार पियेंगे कहाँ ?" जैन साहेब ने उम्मीद भरी आंखे चारों तरफ घुमाते हुए पूछा ।


"अच्छा भाई साहब ध्यान से सुनो । हमारे बाबा जी कोरोना खतम करने के लिए बहुत विशेष पाठ सुबह शाम कर रहे है । उनकी भविष्यवाणी है - जून में ग्रहों की चाल से और भैरों बाबा के आशीर्वाद से हिंदुस्तान से कोरोना भाग जाएगा । कल सबेरे तुस्सी मेरे नाल चलो पुराने किले वाले भैरों मंदिर में । वहां शराब चढ़ाते है । आपको पता है मैं तो पीता नही तो मेरे पास है भी नही । तो आप लोगों के पास तो भंडार है । एक बोतल भैरों बाबा को चढ़ा आते है ।" सोनी साहब ने बड़े भक्ति भाव से तजवीज़ दी ।


" तुम सारे मेरे से गरंटी लेलो । ये सारी बदमाशी चीन की है । मलेशिया में तब्लीगियों को चीन से ही कोरोना बम मिला है । भाई साब बहुत वड्डी कन्सपेरिसी हुई है । चीन ने वैक्सीन भी बना रक्खी है । अब पूरी दुनिया को कंट्रोल करेगा । ये साले चपटे बहुत हरामी है । मैं तो अक्सर चीन जाता रहता हूँ । भाई साब कभी अपने दिल की बात नही बताते । साले बड़ी मुश्किल से हंसते है । बस बिजनस की बात और कोई बात नही । वहां की बीयर तो फिर भी ठीक है पर व्हिस्की मुझे ज्यादा समझ नही आयी । दो बोतलें लाया था । एक अभी भी पड़ी है " - अरोड़ा साहेब ने सब पर चीन ज्ञान का रौब जमाते हुए कहा ।


फिर कपूर का फोन बजा । उसने हाँ हूँ कहा और घबराहट में उठ खड़ा हुआ । "अबे यार सोसायटी विच पुलिस दी गड्डी आ गयी है" कहते हुए सोसायटी के पार्क से बाहर लपका । उसकी देखा देखी बाकी सब लोग भी घबराहट में अपने अपने ब्लॉक्स की तरफ तेजी से चल पड़े । थोड़ी देर में सोसायटी पार्क में सिर्फ खाली कुर्सियां पड़ी थी ।


सब लोग खुद ही जाकर अपने अपने लॉक डाउन में घुस गए थे ।

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