फूटा_घड़ा हिंदी और अंग्रेजी दोनों में

28 जून 2020   |  अबतक हिंदी न्यूज   (287 बार पढ़ा जा चुका है)

*प्रेरणादायक कहानी _
फूटा_घड़ा

बहुत समय पहले की बात है , किसी गाँव में एक किसान रहता था . वह रोज़ भोर में उठकर दूर झरनों से स्वच्छ पानी लेने जाया करता था . इस काम के लिए वह अपने साथ दो बड़े घड़े ले जाता था , जिन्हें वो डंडे में बाँध कर अपने कंधे पर दोनों ओर लटका लेता था .

उनमे से एक घड़ा कहीं से फूटा हुआ था ,और दूसरा एक दम सही था . इस वजह से रोज़ घर पहुँचते -पहुचते किसान के पास डेढ़ घड़ा पानी ही बच पाता था .ऐसा दो सालों से चल रहा था .


सही घड़े को इस बात का घमंड था कि वो पूरा का पूरा पानी घर पहुंचता है और उसके अन्दर कोई कमी नहीं है , वहीँ दूसरी तरफ फूटा घड़ा इस बात से शर्मिंदा रहता था कि वो आधा पानी ही घर तक पंहुचा पाता है और किसान की मेहनत बेकार चली जाती है . फूटा घड़ा ये सब सोच कर बहुत परेशान रहने लगा और एक दिन उससे रहा नहीं गया , उसने किसान से कहा , “ मैं खुद पर शर्मिंदा हूँ और आपसे क्षमा मांगना चाहता हूँ ?”

“क्यों ? “ , किसान ने पूछा , “ तुम किस बात से शर्मिंदा हो ?”

“शायद आप नहीं जानते पर मैं एक जगह से फूटा हुआ हूँ , और पिछले दो सालों से मुझे जितना पानी घर पहुँचाना चाहिए था बस उसका आधा ही पहुंचा पाया हूँ , मेरे अन्दर ये बहुत बड़ी कमी है , और इस वजह से आपकी मेहनत बर्वाद होती रही है .”, फूटे घड़े ने दुखी होते हुए कहा.

किसान को घड़े की बात सुनकर थोडा दुःख हुआ और वह बोला , “ कोई बात नहीं , मैं चाहता हूँ कि आज लौटते वक़्त तुम रास्ते में पड़ने वाले सुन्दर फूलों को देखो .”


घड़े ने वैसा ही किया , वह रास्ते भर सुन्दर फूलों को देखता आया , ऐसा करने से उसकी उदासी कुछ दूर हुई पर घर पहुँचते – पहुँचते फिर उसके अन्दर से आधा पानी गिर चुका था, वो मायूस हो गया और किसान से क्षमा मांगने लगा .

किसान बोला ,” शायद तुमने ध्यान नहीं दिया पूरे रास्ते में जितने भी फूल थे वो बस तुम्हारी तरफ ही थे , सही घड़े की तरफ एक भी फूल नहीं था . ऐसा इसलिए क्योंकि मैं हमेशा से तुम्हारे अन्दर की कमी को जानता था , और मैंने उसका लाभ उठाया . मैंने तुम्हारे तरफ वाले रास्ते पर रंग -बिरंगे फूलों के बीज बो दिए थे , तुम रोज़ थोडा-थोडा कर के उन्हें सींचते रहे और पूरे रास्ते को इतना खूबसूरत बना दिया . आज तुम्हारी वजह से ही मैं इन फूलों को भगवान को अर्पित कर पाता हूँ और अपना घर सुन्दर बना पाता हूँ . तुम्ही सोचो अगर तुम जैसे हो वैसे नहीं होते तो भला क्या मैं ये सब कुछ कर पाता ?”

दोस्तों हम सभी के अन्दर कोई ना कोई कमी होती है , पर यही कमियां हमें अनोखा बनाती हैं . उस किसान की तरह हमें भी हर किसी को वो जैसा है वैसे ही स्वीकारना चाहिए और उसकी अच्छाई की तरफ ध्यान देना चाहिए, और जब हम ऐसा करेंगे तब “फूटा घड़ा” भी “अच्छे घड़े” से मूल्यवान हो जायेगा.

* Inspirational Story _
Cracked

A long time ago, a farmer lived in a village. He used to get up at dawn every day and go to get clean water from distant waterfalls. For this purpose, he used to take two big pitches with him, which he used to tie in a pole and hang it on both sides of his shoulder.

One of them was broken from somewhere, and the other was absolutely right. Due to this, only one and a half pot of water could be saved with the farmer who reached home every day. This had been going on for two years.


The right pitcher was proud that the whole water reaches the house and there is no shortage in it, while on the other hand the broken pot was ashamed of the fact that only half the water reached the house and the hard work of the farmer It goes waste. The potted pot became very upset thinking all this and one day it did not go away, he said to the farmer, "I am ashamed of myself and want to apologize to you?"

"Why? "The farmer asked," What are you ashamed of? "

"Maybe you don't know but I am torn from one place, and for the last two years I have been able to get only half of the water that I should have brought home, I have a huge shortage in it, and because of this your hard work would have been wasteful." Has been. ”, The broken pitcher said grieving.

The farmer was a little sad to hear the pitcher and said, "Never mind, I want you to look at the beautiful flowers coming in the way while returning today."


The pitcher did the same, he kept looking at the beautiful flowers all the way, his sadness was overcome by doing so, but by reaching home, half the water had fallen from inside, he became disillusioned and started apologizing to the farmer.

The farmer said, "Perhaps you did not notice that all the flowers that were on the way were just on your side, there was not a single flower on the right pitcher. This is because I always knew the deficiency in you, and I took advantage of it. I sowed seeds of colorful flowers on the road on your side, you watered them a little bit every day and made the whole road so beautiful. Today, because of you, I am able to offer these flowers to God and make my house beautiful. Think you, if you were not the way you are, would I have done all this? "

Friends, there is some deficiency in all of us, but these deficiencies make us unique. Like that farmer, we should also accept everyone as he is and pay attention to his goodness, and when we do this, the "broken pitcher" will also be valued as a "good pitcher".

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