गुरु वन्दना

05 जुलाई 2020   |  रेणु   (3856 बार पढ़ा जा चुका है)

गुरु वन्दना

मेरे समस्त स्नेही पाठकवृन्द को गुरु पूर्णिमा की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं ---


तुम कृपासिन्धु विशाल , गुरुवर !

मैं अज्ञानी , मूढ़ , वाचाल गुरूवर !

पाकर आत्मज्ञान बिसराया .

छल गयी मुझको जग की माया ;

मिथ्यासक्ति में डूब -डूब हुआ

अंतर्मन बेहाल , गुरुवर !


तुम्हारी कृपा का अवलंबन ,

पाया अजपाजाप पावन ,

गुरुविमुख हो सब खोया

उलझा गया मुझे भ्रमजाल गुरुवर !


कुटिल वचन , वाणी दूषित ,

मैं अकिंचन , विकारी, जीव पतित ,

तुम्हारी करूणा से पाऊँ त्राण

धुलें मन के सभी मलाल गुरुवर!


सह्जों ने नित गुरुगुण गाया ,

मीरा ने गोविन्द को पाया ,

रत्नाकर बन गये बाल्मीकि

गुरुकृपा का था ये कमाल गुरुवर !


वेदवाणी के प्रणेता तुम ,

मानवता के सुघढ अध्येता तुम ;

साकार रूप परमब्रहम के

करो दया हो जाऊं निहाल गुरुवर !

चित्र - गूगल से साभार

=======================


अगला लेख: आत्मा हमारी अपनी चेतना



रेणु
28 जुलाई 2020

सादर आभार आदरणीय आलोक जी

आलोक सिन्हा
07 जुलाई 2020

बहुत अच्छी रचना |

शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x