पहली किरण

26 जनवरी 2015   |  सुशील चन्द्र तिवारी   (263 बार पढ़ा जा चुका है)

रश्मि स्वर्णिम सूर्य से धरती पे लाई प्रात को,


लो बढ़ाकर हाथ अपना थाम लो सौग़ात को,





चक्षुओं से बोझ पलकों का हटा देखो घड़ी,


स्वप्न में जिसके तू खोया सामने तेरे खड़ी,


चाँद तारों को समेटा,दी विदाई रात को । लो बढ़ाकर......





ये नई स्फूर्ति की प्रतिमा,ये जीवन रागिनी,


हृदय का आवेग,मन मन्दिर की पावन वादिनी,


मलय का ये ध्रुपद मानों सुरों की बरसात हो । लो बढ़ाकर......





खिलखिलाते पुष्प,कलियों के चटक जाने का शोर,


तैरते पक्षी गगन में, झुरमुटों में नाचें मोर,


मानो अगवानी में पुलकित, रश्मि की बारात को ।


लो बढ़ाकर हाथ अपना थाम लो सौग़ात को ।।




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धन्यवाद,दिनेश जी

DINESH
26 जनवरी 2015

बहुत अच्छा है सर पोएम,

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