भारत में बढ़ती आबादी चिंता का विषय है

11 जुलाई 2020   |  शोभा भारद्वाज   (312 बार पढ़ा जा चुका है)

भारत में बढ़ती आबादी चिंता का विषय है

भारत में बढ़ती आबादी चिंता का विषय है

डॉ शोभा भारद्वाज

कोरोना महामारी ने विश्व के देशों की अर्थव्यवस्था की ग्रहण लग गया महामारी से बचाने के लिए लाक डाउन मजबूरी थी लेकिन बेरोजगारी बढ़ती जा रही था | भारत सरकार कोरोना से पीड़ित भारतीयों की स्वदेश वापसी करवाई क्या वह वापिस जा सकेंगे यदि नहीं उनके रोजगार की व्यवस्था करना क्या आसान है ?आज विश्व जनसंख्या दिवस है सोच्नना पड़ेगा किसी भी देश की तरक्की स्वस्थ जनसंख्या पर निर्भर है जनसंख्या इतनी होनी चाहिए जिसका भरण पोषण आसानी से हो सके सबको रोजगार के अवसर मिलें अनियमित रूप से जनसंख्या की वृद्धि हो रही चिंता का विषय है देश का विकास गरीब बिमार, अस्वस्थ और बेरोजगारों की भीड़ से संभव नहीं है किसी भी देश का बजट ऐसे लोगों को ज़िंदा रखने उनके भरण पोषण कमजोर भूखी सूखी जनता का पेट भरने, स्वास्थ्य सेवा में निकल जाएगा भूखों की भीड़ सब कुछ चुग जायेंगे धरती पर पेड़ भी दिखाई नहीं देंगे विकास कहाँ से होगा ?टैक्स पेयर भी कहाँ तक ऐसे गरीब वर्ग का बोझ ढो सकेंगे |

पाकिस्तान अफगानिस्तान एवं बंगलादेश में हिन्दू ,सिख पारसी जैन बौद्ध यहाँ अल्पसंख्यक बेजुबान हैं उनकी जर जमीन धर्म ,बच्चियाँ ,जीवन ,मरणोपरान्त संस्कार का हक कुछ भी सुरक्षित नहीं है कम उम्र की नादान बच्चियां उठा लेते हैं कलमा पढ़ा कर उनका अधेड़ बाल बच्चे दारों से निकाह पढ़वा दिया जाता है अब लोग पांच साल उमर की बेटी को भी स्कूल भेजने से डरते हैं वह भारत में शरणागत हैं उनके लिए संसद में सीएए कानून पास किया गया लेकिन संविधान रक्षा के नामपर भारत में मुस्लिम महिलाओं से धरने प्रदर्शन करवाए गये जबकि पाकिस्तान ,अफगानिस्तान बंगला देश उनके अपने मुस्लिम देश हैं मुस्लिम देश हैं कोशिश की गयी सबको समान समझा जाए आये दिन बंगलादेश से मुस्लिम रोजी को खोज में भारत आते हैं अफगानिस्तान बर्बाद हो रहा है और पाकिस्तान से बसने आये लोगों को भी नागरिकता दी जाए इन्हें वर्क परमिट दिया जाता है न की नागरिकता क्या भारत इतना बड़ा जनसंख्या का बोझ उठा सकता है ?

पहली बार जनसंख्या दिवस सन् 1987 में मनाया गया था क्योंकि इस दिन दुनिया की जनसंख्या ने 500 करोड़ के आँकड़े को छुआ था। विश्व के तीसरी दुनिया के गरीब देशों के नौजवानों को संदेश देने की कोशिश की गयी थी कि बेतहाशा बढ़ती जनसंख्या के कारण विकास क्या सम्भव है, स्वास्थ्य सुविधायें, बेरोजगारी दूर करना आसान होगा ? हमारे विकास शील देश के लिये जनसंख्या पर कंट्रोल करना अत्यावश्यक है । प्रदूषित गटर और नालों के किनारे झोंपड़ियाँ बना कर नारकीय जीवन जीने के लिये इन्सान मजबूर हैं। शहरों की गंदगी ढोते- ढोते नदियाँ प्रदूषित हो रहीं है जनसंख्या को खिलाने के लिए धरती का कितना दोहन किया जा सकता है ,देश भी लोक कल्याणकारी राज्य कब तक रह पायेगा ?

भारतीय रोजी रोटी अच्छे जीवन की आस में कमाने जाते हैं हैं? ,विदेश में किन कष्टों से गुजरते हैं वही जानते हैं क्या अब जाना संभव है? लेकिन अब विदेशों में भी रोजगार खत्म होते जा रहे है विदेशियों को कौन झेलेगा तेल की कीमते कम होने से तेल उत्पादक देशों की अर्थ व्यवस्ता पर बहुत असर पड़ा है वहाँ रोजगार के अवसर घटे हैं | बहुत बड़ी संख्या में केरल में कुवेत में काम करने वाल प्रवासी भारतीय लौटने वाले हैं |

,योरोप स्वयं मंदी की आग में जल रहा है,हर योरोपियन देश की सीमा पर ईराकी ,सीरिया और अफगानी ही नहीं अफ्रीकन देशों के नागरिक भी दस्तक दे रहे हैं भारत में कुछ प्रान्तों के नौजवान अपने खाते पीते घरों के हैं लेकिन अपना सब कुछ बेच कर किसी भी तरह यूएस , कनाडा एवं योरोपियन देशों में जाने के इच्छुक रहते हैं ‘देश में शाह परदेस में बेहाल’, लेकिन अब योरोप के देशों में राष्ट्रवाद की प्रवृति बढ़ती जा रही है उन्हीं दलों को वोट दिया जाता है जो प्रवासियों को देश से निकाल कर अपनों को रोजगार देने का वायदा करते हैं जब अपने नागरिक बेरोजगार है कौन उनको बर्दाश्त करेगा प्रवासियों के खिलाफ क्राईम बढ़ रहा है कई देशों से प्रवासियों का सब कुछ छींन कर उन्हें निकाल दिया गया | अब तो अमेरिका में ट्रम्प प्रशासन अपने देश के दरवाजे रिफ्यूजियों के लिए बंद कर रहा है उनके अपने लोग बेरोजगार हैं वह दूसरों को बसने की इजाजत कैसे देगा |

विकसित देशों की अपनी आबादी कम हो रही है लोग बच्चे पैदा करने से डरते हैं दूसरे देश वासी उनका स्थान भरना चाहते हैं प्रजातन्त्रात्मक व्यवस्था में धीरे-धीरे प्रवासी ही सत्ता पर अपना दबदबा बना लेते हैं |मिडिल ईस्ट के मुस्लिम देश किसी को नागरिकता नहीं देते आप काम कीजिये आपको वर्क परमिट मिलेगा सुउदिया में पहली नागरिकता दी गयी वह भी एक रोबर्ट को लेकिन अन्य देशों में शरणार्थियों के लिए मानवाधिकार वादी आगे आ जाते हैं मानवाधिकार वादियों ने हंगामा खड़ा कर दिया | भारत में रोहनगिया मुस्लिम को शरण देने की वकालत करने के लिए जलूस निकाले गये जबकि मुस्लिम देशों के द्वार उनके लिए बंद हैं|

पढ़े लिखे जवान विवाह की जिम्मेदारी से घबरा रहे हैं | प्राईवेट नौकरियों में अनिश्चितता बनी रहती है कभी भी काम से निकाले जाने का भय अत :सन्तान को जन्म देने से डरते हैं ज्यादातर काफी उम्र होने के बाद लड़का हो या लड़की एक बच्चे को जन्म देने की हिम्मत करते हैं उनके भी भविष्य का पूरा हिसाब किताब पहले ही तय होता है उनको वह सब कुछ देना चाहते हैं जिनका उनके पास अभाव था |लोअर मिडिल क्लास विवाह भी करते हैं दो बच्चे भाई बहन का जोड़ा चाहते हैं लेकिन एक ऐसा वर्ग हैं जाहिलता में बच्चों की संख्या बढ़ाता रहता है भगवान भरोसे या सरकार भरोसे ? बेटे की चाहत में बालिकाओं की संख्या बढ़ाते जाते हैं जबकि बेटियाँ भी अपने माता पिता का ध्यान रखतीं है |महानगरों में झुग्गियों में बसे लोगों के बच्चों की संख्या देख कर हैरानी होती है कुछ बच्चों के सहारे अच्छे दिनों का इंतजार करते हैं कुछ बच्चों को अल्लाह या ईश्वर की देन मान कर पैदा करते हैं ऐसे विचारों वाले पढ़े लिखे भी है एक या दो बच्चों पर संतुष्ट नहीं होते कम से कम चार बच्चों की इच्छा रखते हैं बच्चों को जन्म देना आसान हैं लेकिन उनका भरण पोषण ? धरती जनसंख्या के हिसाब से खिच कर बड़ी ,‘छोटी या चपटी नहीं होती गोल धरती अपनी धुरी पर घूमती रहती है अब जनसंख्या के बोझ को ढोने में असमर्थ हो चुकी है तपने लगी है |

जीने के लिए शुद्ध हवा स्वच्छ पानी पैर टिकाने के लिए जमीन भी चाहिये बढ़ती जनसंख्या में स्वच्छ हवा का महत्व ही खत्म कर दिया है बढ़ते प्रदूष्ण से बड़े और छोटे बेहाल हैं पीने के लिए स्वच्छ जल महानगरों में पहुंचाना मुश्किल है कुछ क्षेत्रों में सूखे के कारण त्राहि त्राहि मची रहती है लोग गंदा पानी पीने के लिए मजबूर, जब इन्सान के लिए पानी नहीं है तो जानवरों को कहाँ से मिलेगा गावों, कस्बों ,शहरों में तालाब पाट कर घर बना लिए पहले बरसात में तालाब लबालब जल से भर जाते थे धरती में भी पानी समाता रहता था जिससे पूरे वर्ष कुओं से जल मिलता था , हैंड पंप से भी कुछ हाथ की दूरी पर पानी मिल जाता था लेकिन अब पानी धरती में बहुत नीचे तक खोदने पर मिलता है 2030 आते-आते पीने का पानी मुश्किल हो जायेगा बिना जल के जीने की कल्पना असम्भव है अटल जी ने कहा था अगली लड़ाई जल के लिए होगी |

बढ़ती जनसंख्या रहने के लिए नदियों के और भी करीब घर बनाने लगते हैं नदियाँ अपना मार्ग कभी नहीं छोडती जैसे ही जम कर पानी बरसता है सब कुछ बहा कर ले जाती हैं महानगरों में जमीन कम है उनके आसपास बसे शहरों में बिल्डर गगन चुम्बी इमारते बन रहीं है अपने अपार्टमेन्ट तक पहुंचने के लिए लिफ्ट की जरूरत पड़ती है | खेती के लिए उपजाऊ जमीन पर कंक्रीट के जंगल बन गये है बारिश के समय जल निकासी के लिए यदि बड़े नाले नहीं होंगे तो शहरों में जबर्दस्त जल भराव , सडकों पर जाम ,घर पहुंचने के लिए तैर कर जाना पड़ेगा सब कुछ सिकुड़ा लगता है सडकों के किनारे तक बाजार बन गये ठेले लगते हैं रोज रोजी रोटी की जद्दोजहद देखने में आती है देश में 35 करोड़ युवा हैं सब को रोजगार देना असम्भव है | राजनीतिक दल चुनाव के अवसर पर बड़े-बड़े वादे कर चुनाव जीतते हैं जनता के लिए कुछ करना भी चाहते हैं लेकिन सुरसा के मुहँ की तरह बढ़ती जनसंख्या के आगे हाथ खड़े कर देते हैं अपना समय काट कर चले जाते हैं इंदिरा जी की सरकार के समय आपतकालीन स्थित के दौरान जनसंख्या पर सख्ती से नियन्त्रण की कोशिश की गयी हम दो हमारे दो का नारा दिया वह बुरी तरह चुनाव हार गयी उनके बाद किसी सत्ता प्राप्त दल ने जनसंख्या नियन्त्रण की बात नहीं की |

जिन राज्यों में जनसंख्या वृद्धि दर अधिक है वहां जन्म देने के चक्कर में मृत्यु दर भी बढ़ती है कमजोर बच्चे को कब तक बचाया जा सकता है । इससे जन्म, मृत्यु और बुरे स्वास्थ्य का दोषपूर्ण चक्र प्रारम्भ हो जातै है। यह समस्त विकास पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। कोई भी धार्मिक तर्क जनसंख्या वृद्धि के पक्ष में चल नहीं सकता | सूखे भूखे बिमार मतदाता को मतदान क्षेत्र तक लाना भी मुश्किल हो जायेगा |एक समय था जब परिवार नियोजन के साधनों का अभाव था मजबूरी थी यदि सन्तान ईश्वर की देन होती तो धरती भी फैलती और पैदावार उगलती ईश्वर ने अक्ल दी है अच्छी सन्तान माता पिता के लिए सुखकारी है उसकी शिक्षा दीक्षा से उनको संतोष मिलता है,गरीबी बेरोजगारी नौजवानों को अपराध की तरफ मोड़ देगी या मुस्लिम समाज के पढ़े लिखे होनहार बच्चे धर्म के नाम पर बरगलाये जा रहे हैं माता पिता की आखों में छिपे आंसू देखें है. ?

छोटा परिवार सुखी परिवार महिलाओं की समझ में आसानी से आ जाता है जरूरत हैं महिलाओं की शिक्षा पर जोर देने की, शिक्षित माँ अच्छी तरह समझती है छोटा परिवार सुख का संसार होता है जनसंख्या की बढ़ोत्तरी में सरकार की भी जबाबदेही होनी चाहिए परिवार नियोजन के साधनों का प्रचार किया जाए अस्पतालों में नसबंदी की सुविधायें हो कुछ परिवार अधिक सन्तान नहीं चाहते लेकिन अनभिज्ञता के कारण अनचाहे बच्चे पैदा हो जाते हैं मीडिया का भी रोल है वह ऐसे विज्ञापन दे , समझाये भीड़ कभी जनहित कारी नहीं हो सकती केवल सस्ती लेबर ही मिल सकता है लेकिन देश में या विदेश में हड्डियों के ढांचों से कोई मजदूरी भी नही कराएगा | भारत की जनसंख्या अनियमित रूप से इतनी बढ़ चुकी है जिससे हर और भीड़ ही भीड़ दिखाई देती है रोजी रोटी की खोज में राज्यों से रोज बहुत बड़ी जनसंख्या में लोग दिल्ली आते हैं दिल्ली में बढ़ती जनसंख्या को सम्भालना मुश्किल है छोटे से एक कमरे में पूरा परिवार रहता है | एक कमरे में दस-दस लड़के तक रहते हैं सुबह जब लोग अपने आफिस या काम पर जाते है पूरा जन समूह नजर आता हैं बम्बई का तो और भी बुरा हाल है |

सरकारें निवेश की चिंता से परेशान रहती हैं निवेश आयेगा तब जाकर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे | टेक्नोलोजी का जमाना है जितनी विकसित टेक्नोलोजी देश के पास होगी उतना ही समर्थ शाली देश बनेगा | देश के जवानों ने बड़ी संख्या में विदेश जा कर अपनी प्रतिभा के बल पर सम्मानित स्थान बनाया वह बड़े-बड़े पदों पर कार्य कर रहे है | कम्प्यूटर का क्षेत्र हो या वैज्ञानिक खोज देश में विदेशी मुद्रा का भंडार बढ़ा है |अस्पतालों में दूसरे देशों से असाध्य रोगों का निदान करवाने रोगी आ रहें हैं उनके सफल आपरेशन हो रहे हैं| सरकारे शिक्षा का स्तर बढ़ायें नौजवान हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो लेकिन जनसंख्या का बोझ इतना बढ़ गया हैं जवानों में असंतोष ,हताशा और कुंठा बढ़ती जा रही है आत्महत्या की घटनाओं में भी बढ़ोत्तरी हो रही हैं |

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