अपनी भूलों से घबराएँ नहीं, उनसे शिक्षा लें

13 जुलाई 2020   |  कात्यायनी डॉ पूर्णिमा शर्मा   (310 बार पढ़ा जा चुका है)

अपनी भूलों से घबराएँ नहीं,  उनसे शिक्षा लें

अपनी भूलों से घबराएँ नहीं, उनसे शिक्षा लें

हमारे पास किसी समस्या से त्रस्त होकर कंसल्टेशन के लिए जो लोग आते हैं तो कई बार वे प्रश्न कर बैठते हैं कि डॉ पूर्णिमा, हमने तो जीवन में कभी कोई भूल नहीं की – कभी कोई अपराध नहीं किया – फिर हमारे साथ ऐसा क्यों हो रहा है ? कल भी कुछ ऐसा ही हुआ | किन्हीं सज्जन से फोन पर बात हो रही थी और उनका यही प्रश्न था कि हमने कभी किसी का बुरा नहीं किया, न ही कोई ऐसा कार्य किया जो हमें नहीं करना चाहिए था – फिर हमारे साथ ऐसा क्यों हो रहा है ? हमारा ऐसे लोगों को यही उत्तर होता है कि हर व्यक्ति जीवन में कुछ न कुछ ऐसा कर बैठता है जो उसे नही करना चाहिये | भूल करना, ग़लतियाँ करना मनुष्य का स्वभाव है – हममें से कोई भी इससे अछूता नहीं है | हम सभी जीवन में कभी न कभी जाने अनजाने ऐसा कर बैठते हैं जो हमें नहीं करना चाहिए | देखा जाए तो ये भूलें - ये ग़लतियाँ मनुष्य की सबसे बड़ी गुरु होती हैं | ग़लतियाँ करने में कोई बुराई नहीं है, लेकिन बार बार उनको दोहराना वास्तव में अपराध की श्रेणी में आता है |

साथ ही हमें अपनी भूलों को हृदय से स्वीकार करना भी आना चाहिए | हमने कोई भूल की और उस भूल के लिए स्वयं को अपराधी मान लिया, या किसी अन्य व्यक्ति को उसके लिए अपराधी मान लिया, या परिस्थितियों पर उस भूल का ठीकरा फोड़ दिया तो ऐसा करके हम और एक भूल कर रहे हैं - और एक ग़लती कर रहे हैं | क्योंकि इससे हमारे द्वारा किया गया वह अपराध या वह भूल भूतकाल में जाकर सुधारी नहीं जा सकती | ऐसा करने की अपेक्षा उचित तो यही रहेगा कि हम अपनी उस भूल से एक सीख लें और भविष्य में उस भूल को यदि सुधारा भी नहीं जा सकता है तो कम से कम उसकी पुनरावृत्ति न करके अपने व्यवहार और स्वभाव में सुधार अवश्य कर सकते हैं |

जीवन में उन्नति के लिए – आगे बढ़ने के लिए - भूलें करना आवश्यक है | उनसे हमें शिक्षा प्राप्त होती है, कुछ अलग करने की – कुछ नया करने की - प्रेरणा प्राप्त होती है, हमारी बुद्धि और हमारे स्वभाव तथा व्यवहार में परिपक्वता आती है | प्रकृति का हर प्राणी अपनी उन्नति के क्रम में कभी न कभी कोई न कोई भूल अवश्य करता है - जब तक कि वह अपने कार्य में निपुण नहीं हो जाता |

कोई भी व्यक्ति प्रथम दिन से ही कुशल नहीं होता है | बार बार गिरता है, बार बार उसकी भूलों के लिए उसका तिरस्कार किया जाता है - उपेक्षा की जाती है – उसकी भूलों के कारण बार बार उसकी भावनाएँ आहत होती हैं - तब कहीं जाकर उसे अपने प्रयास में सफलता और कर्म में कुशलता प्राप्त होती है |

कुछ लोग अपनी बार बार होती भूलों और समस्याओं के कारण इतने भयभीत हो जाते हैं कि वे परिस्थितियों का सामना करने से ही घबराने लगते हैं - दूर भाग जाना चाहते हैं | एक बार असफल होकर फिर से प्रयास ही नहीं करना चाहते | जबकि शारीरिक स्तर पर नहीं, लेकिन मानसिक स्तर पर वे उसी कार्य को कर रहे होते हैं जिसमें उनकी किसी भूल के कारण उन्हें असफलता प्राप्त हुई है | हर पल वे इसी का विश्लेषण मन ही मन कर रहे होते हैं कि उनसे ऐसी क्या भूल हो गई जो उन्हें असफलता का सामना करना पड़ा | तो क्यो न शारिरिक और मानसिक दोनों स्तरों पर उस परिस्थिति को स्वीकार करके उस कार्य को पुनः करने का प्रयास किया जाए ? जो भूल पहले हुई है, प्रयास किया जाए कि वो फिर से न हो | उस भूल को सुधारने का प्रयास किया जाए और भूतकाल में न देखकर वर्तमान और भविष्य के विषय में विचार किया जाए |

वास्तविकता तो यह है कि हम लोग परिणाम की चिन्ता करते हैं इसलिए घबराते रहते हैं - भयभीत रहते हैं कि हमसे कुछ ग़लत न हो जाए | हम अपनी प्रतिष्ठा के प्रति इतने अधिक सचेत रहते हैं कि असफल हो जाने या उपेक्षित हो जाने के भय से प्रयास ही नहीं करना चाहते | जबकि होना यह चाहिए कि हम अच्छे से अच्छा प्रयास करें, परिणाम की चिन्ता किये बिना – या इस बात की चिन्ता किये बिना कि जो कार्य हम कर रहे हैं वह छोटे स्तर का है या बड़े स्तर का | स्तर का लेबल जहाँ लग गया वहाँ फिर प्रयास करना कठिन हो जाता है – क्योंकि वहाँ प्रश्न प्रतिष्ठा का हो जाता है |

ध्यान रहे कोई भी लक्ष्य छोटा या बड़ा नहीं होता, लेकिन उसके लिए जब प्रयास करते हैं तो मार्ग में इतने कुछ रोमाँचक क्षण होते हैं जो हमारे उत्साह वर्धन के लिए आवश्यक होते हैं | जब हम केवल लक्ष्य की ओर देखते हैं और मार्ग के समस्त रोमाँचों से भय खाते हैं तो बहुत कुछ नहीं कर पाते | इसलिए यदि जीवन में सफलता की कामना रखते हैं तो लक्ष्य प्राप्ति के मार्ग में हुई भूलों से घबराए बिना उनमें सुधार करते हुए और उनसे शिक्षा लेते हुए आगे बढ़ते रहना चाहिये | ये ग़लतियाँ - ये जाने अनजाने की हुई भूलें - जीवन में उन्नति के मार्ग में चुनौती हैं, इनसे घबराकर इन्हें अपनी दुर्बलता न बनने दें, बल्कि इनसे सीख लेकर इन्हें अपनी शक्ति बनाएँ... जैसे एक नन्ही सी चींटी बार बार गिरकर भी अन्त में अपना भोजन अपने बिल तक पहुँचाने में समर्थ हो ही जाती है...

हम सभी अपनी भूलों से सीखते हुए आगे बढ़ते रहें यही कामना है..

अगला लेख: पावस



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
29 जून 2020
देवशयनी एकादशी, आषाढ़ी एकादशी, विष्णु एकादशी,पद्मनाभा एकादशी हिन्दू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्त्व है| प्रत्येक वर्ष चौबीस एकादशी होती है, और अधिमास हो जाने पर ये छब्बीस हो जाती हैं | इनमेंसे आषाढ़ शुक्ल एकादशी को देवशयनी एकादशी के नाम से जाना जाता है | साथ ही आषाढ़ मास में होने के कारण इसे आषाढ़
29 जून 2020
24 जुलाई 2020
यात्री मार्ग और लक्ष्ययदि मैं देखतीरही बाहरतलाशती रही यहाँ वहाँ येन केन प्रकारेणमन की शान्ति और आनन्द कोतो होना पड़ेगा निराशक्योंकि कोई बाहरी वस्तु, सम्बन्ध, या कुछभी औरनहीं दे सकता आनन्द के वो क्षण / शान्तिके वो पलजो मिलेंगे मुझे केवल अपने ही भीतरइसीलिए तो करती हूँ प्रयास झाँकने का अपनेभीतर...डूब जा
24 जुलाई 2020
19 जुलाई 2020
सफलताप्राप्ति के लिए क्या करेंअक्सर लोग इस बात पर मार्गदर्शन के लिए आते हैं कि उन्हें अपने कार्यों मेंसफलता प्राप्त नहीं होती, क्या करें इसके लिए ? कई बार लोग कहते हैं किहमारी जन्मपत्री देखकर कोई उपाय बताइये | हम उन सबसे यही कहते हैं कि भाईजन्मपत्री अपनी जगह है, प्रयास तो आपको स्वयं ही करना होगा |अन
19 जुलाई 2020
03 जुलाई 2020
रात दिन चौबीस घंटे बरखा रानी अपनी सखी दमयन्तीदेवी की स्वर्णिम पायल झंकारती सखा मेघराज के मृदंग की थाप पर रिमझिम का गानसुनाती मस्त पवन के साथ मादक नृत्य दिखाती हो – लेकिन इसी बीच शाम को उनकी सखी धवलधूप इन्द्रधनुष का बाण चढ़ाए कुछ पलों के लिए उपस्थित हो जाएँ – और अपनी सखी बरखासे मिलकर वापस लौट जाएँ बरख
03 जुलाई 2020
01 जुलाई 2020
जीवन मेंअनगिनती पल ऐसे आते हैं जब माता पिता की याद अनायास ही मुस्कुराने को विवश कर देतीहै | ऐसा ही कुछ कभी कभी हमारे साथ भी होता है | माँ क्या होती है – इसके लिए तोवास्तव में शब्द ही नहीं मिल पाते | माँ की जब याद आती है तो बस इतना ही मन करताहै: माँ तेरी गोदीमें सर रख सो जाऊँ मैं पल भर को, तो लोरी तू
01 जुलाई 2020
19 जुलाई 2020
अभावों और पीड़ा को गान बना देने वाले प्रेम और विरहके साधक, बादलों से सलाम लेने वाले,विभावरी, आसावरी और अंतर्ध्वनि के गायक पद्मभूषणश्री गोपालदास नीरज – जिनके गीतों, ग़ज़लों, दोहों के एक एक शब्द में – एक एक छन्द में मानों एक नशा सा भरा हुआ है...जो कभी दार्शनिक अन्दाज़ में कहते हैं... “नींद भी खुली नथी कि
19 जुलाई 2020
05 जुलाई 2020
अज्ञान्तिमिरान्धस्य ज्ञानांजनशलाकयाचक्षुरुन्मीलितं येन तस्मै श्री गुरवे नमःआजगुरु पूर्णिमा का पावन पर्व है | कल प्रातः 11:35 के लगभग पूर्णिमा तिथि का आगमन हुआथा | जो आज सवा दस बजे तक रहेगी | उदया तिथि होने के कारण गुरु पूजा का पर्व आज हीमनाया जाएगा | पूर्णिमा काव्रत क
05 जुलाई 2020
19 जुलाई 2020
एक बार कि बात है एक कस्बे में पति औरपत्नी रहते थे, दोनों की उम्र 25 साल थी वो दोनों ही विवाह के लिए मानसिक रुप सेतैयार नहीं थे हालांकि दोनों की पढ़ाई पूरी हो चुकी थी। दोनों ही सजातीय थे औरदोनों के परिवार एक ही गांव में रहते थे तो उनके परिवा
19 जुलाई 2020
30 जून 2020
बरखा की सुहानी रुत में मेघों की बात न हो, उनकी प्रिय सखी दमयन्ती की बात न हो, प्रकृति के कण को में व्याप्त मादकता की बात न हो -ऐसा तो सम्भव ही नहीं... निश्चित रूप से कोई योगी या कोई विरह वियोगी ही होगा जोइस सबकी मादकता से अछूता रह जाएगा... तो प्रस्तुत है हमारी आज की रचना "मेघइठलाए रहे हैं"... सुनने
30 जून 2020
18 जुलाई 2020
कमलपत्र पर गिरी हुई जल की कुछ बूँदें...गर्मी के बाद आरम्भिक वर्षा में जल की अमृत बूँदें धरा सोख लेती है... परिणामतःचारों ओर हरीतिमा फैल जाती है... लेकिन धरा को देखिये, मेघों से अमृतजल का दान लेती है... साराउपवन हरा भरा हो जाता है... पर पतझड़ के आते ही धरा उसकी ओर झुक जाती है और उपवन कीहरियाली सूख जात
18 जुलाई 2020
08 जुलाई 2020
Humayun’s TombFriends!from today on WOW India channel, we are going to start a new program – भारत भ्रमण – tour of India –with an executive member of WOW India, Sunanda Srivastava, who was an officerin archaeological department of India. Through this program we will give youthe information about vari
08 जुलाई 2020
29 जून 2020
देवशयनी एकादशी, आषाढ़ी एकादशी, विष्णु एकादशी,पद्मनाभा एकादशी हिन्दू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्त्व है| प्रत्येक वर्ष चौबीस एकादशी होती है, और अधिमास हो जाने पर ये छब्बीस हो जाती हैं | इनमेंसे आषाढ़ शुक्ल एकादशी को देवशयनी एकादशी के नाम से जाना जाता है | साथ ही आषाढ़ मास में होने के कारण इसे आषाढ़
29 जून 2020
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x