कल्पना

18 जुलाई 2020   |  AYESHA MEHTA   (294 बार पढ़ा जा चुका है)

ये वो काल है जो लोगों को उसकी वास्तविकता से अवगत कराया है ! कल्पना की उड़ान बहुत ऊँची होती है और ये इतनी ऊँची होती है कि लोगों का सोच उसी मनोदशा में जीना सीख लेती है ! जब कभी कल्पनाओं का आसमान उनके ऊपर से हट जाता है तो वो वास्तविकता को ढूंढने लग जाते हैं जो उनके कल्पनाओं की तरह बहुत ऊपर नहीं अपितु बहुत नीचे होती है !ऊँचाई के उस मुकाम से जब कोई नीचे आना चाहे तो नाश तो संभव है !यह उस ख्वाब की तरह है जैसे कोई गरीब भूखा आदमी स्वपन में रोटी का निवाला अपने मुँह में रखने ही वाला हो लेकिन वो ख्वाब से जाग जाये !हम और आप ही नहीं इस दुःख को तो पशु पक्षी भी महसूस कर सकते हैं ा

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