अतीत का सुख

19 जुलाई 2020   |  शिल्पा रोंघे   (367 बार पढ़ा जा चुका है)

अतीत का सुख

एक बार कि बात है एक कस्बे में पति और पत्नी रहते थे, दोनों की उम्र 25 साल थी वो दोनों ही विवाह के लिए मानसिक रुप से तैयार नहीं थे हालांकि दोनों की पढ़ाई पूरी हो चुकी थी। दोनों ही सजातीय थे और दोनों के परिवार एक ही गांव में रहते थे तो उनके परिवार वालों ने सोचा क्यों ना इन दोनों का ब्याह कर दिया जाए। काफी ना नुकूर के बाद दोनों मान गए। लड़का बेहद गोरा था और लड़की का रंग गेहुआं और आकर्षक व्यक्तित्व था। दोनों गांव से दूर एक कस्बें में एक किचन और एक कमरे वाले घर में रहने लगे। लड़का शहर में एक छोटी सी नौकरी करने लगा जिसमें उसे केवल 5-6 हजार ही मिला करता था। दो हजार किराए में ही चले जाते थे। शादी के कुछ दिन तो ठीक चला फिर लड़का लड़की में थोड़ी अनबन होने लगी। लड़की कहने लगी दिनभर वो काम करके थक जाती है तो उसका मन होता है कि बाहर घुमने जाए लेकिन उसका पति बचत का बहाना बनाकर टाल जाता। लड़की ने भी एक दो स्कूल में टीचर की जगह के लिए अप्लाई किया था लेकिन उन्होंने कहा कि वो उसे बीएड होने के बाद ही लेंगे। लड़की को भी लगने लगा कि उसकी सहेलियों के पति अच्छा-खासा कमाते है तो उनका लाइफ़स्टाइल उनसे काफी अच्छा है और वो काफी पीछे रह गई है उनसे।

हालांकि दोनों पढ़ाई में बहुत अच्छे थे लेकिन अभी उनका वक्त नहीं आया था, लड़की अंग्रेजी में ग्रेजुएट थी और लड़का गणित में।

कई बार वो एक दूसरे की कमियां ढूंढते हुए बहस करने लगते, कई दिन बातचीत भी नहीं होती लेकिन एक वजह से दोनों को बात करनी पड़ती वो थी कि वो दोनों ही प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे थे तो लड़का लड़की को गणित पढ़ा देता और लड़की लड़के को अंग्रेजी।

शादी के दो साल बाद दोनों का चयन अधिकारी के तौर पर हो गया ऐसे में दोनों बहुत ख़ुश थे लेकिन एक बात पर दुखी थे कि दोनों का चयन अलग-अलग जिलों के लिए हुआ, शायद उनके एक जगह ट्रांसफर में कई साल लग जाए ये बात उन्हें खटक रही थी और वो सोच रहे थे जो पुराना वक्त था वो असल में एक अच्छा वक्त था शायद आगे कि व्यस्त ज़िंदगी में उन्हें पद पैसा और आराम मिल सकता है लेकिन उस साथ के लिए वो तरस जाएंगे जिसके लिए वो अपने नसीब को कोसते थे। ख़ैर स्थिती जैसी भी हो सुनहरे भविष्य के लिए वर्तमान के सुख को अनदेखा करना ही उनकी सबसे बड़ी भूल थी ये वो समझ चुके थे।


© सर्वाधिकार सुरक्षित, कहानी के सभी पात्र काल्पनिक है जिसका जीवित या मृत व्यक्ति से कोई संबंध नहीं है।

मेरे इस ब्लॉग को नीचे दी गई लिंक पर क्लिक करके भी पढ़ सकते हैं ।

koshishmerikalamki.blogspot.com: अतीत का सुख



अतीत का सुख

अगला लेख: कोरोना संकट के वक्त हिलती आर्थिक स्थिती चिंताजनक।



आलोक सिन्हा
22 जुलाई 2020

अच्छा कथानक है |

धन्यवाद

शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
05 जुलाई 2020
खैर समय गुजरा मन्नू जी चीफ मैनेजर बन गए और उन्हें मुम्बई भेज दिया गया. एक साल रह गया था रिटायर होने में और ऐसे में तो दिल्ली ही रखना चाहिए था पर मुम्बई भेज दिया. कमबख्त एच आर डी का दिमाग उलटा ही चलता है. खैर हो सकता है इसी बहाने करीना से मुलाकात हो जाए! मनोहर नरूला जी
05 जुलाई 2020
08 जुलाई 2020
Humayun’s TombFriends!from today on WOW India channel, we are going to start a new program – भारत भ्रमण – tour of India –with an executive member of WOW India, Sunanda Srivastava, who was an officerin archaeological department of India. Through this program we will give youthe information about vari
08 जुलाई 2020
11 जुलाई 2020
- सुनो नाश्ता लगा दिया.- आया. - अचार लोगे ?- नहीं.- कल की खबर सुनी?- क्या?- वो जो कोने वाला मकान है दो मंजिला?- हाँ गोयल पेट्रोल पंप वाले का?- वही वही. कल बड़ा तमाशा हुआ. कल शाम को एक औरत गाड़ी चला कर एक बच्चे के साथ आई. गोयल के मकान के सामने गाड़ी खड़ी करके अंदर चली गई. जा क
11 जुलाई 2020
13 जुलाई 2020
रात के 10 बजेथे। 18 साल की रज्जो अपनी साइकिल से खेतसे गुजरने वाले रास्ते से तेज-तेज गति में निकल रही थी। तभी धनिया वहां कुछ काम कररहा था, बोला “ अरे इतनी रात को क्या काम है तुझे ? क्या प्रेमी से मिलने जा रही है जो अंधेरे का वक्त चुना है तुने, कुछ डरहै कि नहीं तुझे, औरत ज
13 जुलाई 2020
01 अगस्त 2020
बैंक से रिटायर हुए गोयल सा को तीन महीने हो गए था. वजन पहले ही ज्यादा था अब मशीन में चेक करते हैं तो पता लग रहा है की और बढ़ रहा है. बकौल पत्नी के 'सारा दिन खाते रहते हो और बिस्तर पर पड़े टीवी देखते रहते हो तो वजन कैसे घटेगा?' इस तरह के शब्द चुभते थे इसलिए बड़ी हिम्मत करके सा
01 अगस्त 2020
27 जुलाई 2020
23साल की शालिनी अपनी नई जॉब को पाकर बेहद ख़ुश थी चलो कि अब उसे अपनी पॉकेट मनी केलिए अपने घरवालों के सामने हाथ तो नहीं फैलाना पड़ेगा। साथ ही वो अपने पैशन को भीफॉलो कर सकेगी।3महीने की इंटर्नशिप के बाद उसकी छोटे से युट्यूब चैनल में जॉब पक्की ह
27 जुलाई 2020
30 जुलाई 2020
समुंदर की विशाल लहरें विशाखा के पैरों से टकरा रही थीवो समुंदर के और भीतर चली जा रही थी। जैसे कि अपना सारा दुख दर्द वो पानी से कहदेना चाहती हो। आज वो पूरी तरह भय मुक्त हो चुकी थी। तभी विष्णु की आवाज आई। येविशाल लहरें तुम्हें निगल जाएंगी क्या इसका आभास नहीं तुम्हें। कौन सा
30 जुलाई 2020
30 जुलाई 2020
समुंदर की विशाल लहरें विशाखा के पैरों से टकरा रही थीवो समुंदर के और भीतर चली जा रही थी। जैसे कि अपना सारा दुख दर्द वो पानी से कहदेना चाहती हो। आज वो पूरी तरह भय मुक्त हो चुकी थी। तभी विष्णु की आवाज आई। येविशाल लहरें तुम्हें निगल जाएंगी क्या इसका आभास नहीं तुम्हें। कौन सा
30 जुलाई 2020
24 जुलाई 2020
को
पिछले चार महीनें से कोरोना वायरस का प्रकोप चारो ओर फैला हुआ है। कोरोना महामारी के कारण लोंगों का जीना मुहाल है। ऐसे में मुसलमान भाइयों के बकरीद पर्व का आगमन हो रहा है। पूरा विश्व आज कोरोना से त्राहि त्राहि कर रहा है तो ऐसे में बकरीद का पर्व इससे अछूता कैसे रह सकता है। कोरोना के चलते विश्वव्यापी मंदी
24 जुलाई 2020
13 जुलाई 2020
अपनी भूलों से घबराएँ नहीं, उनसे शिक्षालेंहमारे पास किसी समस्या से त्रस्त होकर कंसल्टेशन के लिए जो लोग आते हैं तोकई बार वे प्रश्न कर बैठते हैं कि डॉ पूर्णिमा, हमने तो जीवन में कभी कोईभूल नहीं की – कभी कोई अपराध नहीं किया – फिर हमारे साथ ऐसा क्यों हो रहा है ? कलभी कुछ ऐसा ही हुआ | किन्हीं सज्जन से फोन
13 जुलाई 2020
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x