मुक्तक

24 जुलाई 2020   |  आलोक सिन्हा   (316 बार पढ़ा जा चुका है)

मुक्तक


आंसुओं के घर शमा रात भर नहीं जलती , आंधियां हों तो कली डाल पर नहीं खिलती | धन से हर चीज पाने की सोचने वालो ,

मन की शान्ति किसी दुकान पर नहीं मिलती |



जिन्दगी एक दर्द भी है , गीत भी है , जिन्दगी एक हार भी है , जीत भी है | तुम इसे यदि प्यार का एक साज समझो , तो यह सौ खुशियों भरा संगीत भी है |



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Shashi Gupta
01 अगस्त 2020

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