क्या कहेंगें आप...?

30 जुलाई 2020   |  अशोक सिंह 'अक्स'   (301 बार पढ़ा जा चुका है)

क्या कहेंगें आप...?


हम सभी जानते हैं कि प्रकृति परिवर्तनशील है। अनिश्चितता ही निश्चित, अटल सत्य और शाश्वत है बाकी सब मिथ्या है। बिल्कुल सच है, हमें यही बताया जाता है हमनें आजतक यही सीखा है। तो मानव जीवन का परिवर्तनशील होना सहज और लाज़मी है। जीवन प्रकृति से अछूता कैसे रह सकता है…? जीवन भी परिवर्तनशील है। यही तथ्य ग्राह्य है।

जीवन भी मानव को लगातार सही मायनों में मानव बनाने की दिशा में प्रयासरत है। पर जीवन सबक लेने में कोताही कर रहा है। दरअसल मानव इसके लिए पूरी तरह तैयार नहीं है। वह दुविधाओं में फंसा हुआ है। जबकि जीवन हमें हजार-हजार तरीकों से सबक सिखाने की कोशिश करता है, बस हमारा ही उस तरफ ध्यान नहीं जाता है। जरा गौर कीजिए क्या बचपन से लेकर आजतक आप, जो भी अवस्था हो आपकी क्या वैसे ही हैं..? बिलकुल नहीं। आपका बौद्धिक और शारिरिक विकास हुआ है। यह सत्य है और स्वीकार्य भी है। इसमें संदेह नहीं है। समय के साथ मनुष्य का अनुभव विकसित होता है।

चलिए हम इसे समझने की कोशिश करते हैं। दुनियाभर में मशहूर होता कोई शख्स अचानक किसी दुर्घटना का शिकार हो जाता है, दूसरा कोई लाइलाज बीमारी की चपेट में आ जाता है। कोई आजीवन अचेतावस्था में पड़े रहने के लिए अभिशप्त हो जाता है या फिर विकलांग बनकर अनावश्यक बोझ को ढोने के लिए विवश हो जाता है। अनअपेक्षित व अनिश्चितता से भरे इस जीवन को समझ पाना आसान नहीं है तो मुश्किल भी नहीं है। देखिए अपनें ख्वाबों, सपनों व लक्ष्यों के साथ भागती धड़धड़ाती जिंदगी अचानक कोरोना महामारी की गिरफ्त में आकर अपनी जगह ठहरने के लिए मजबूर कर दी जाती है। दूसरे ही पल कुछ भी हो सकता है। सोचिए जरा जीवन में पलभर का कोई ठिकाना नहीं है फिर भी इंसान सदियों की तैयारी कर रहा है। भविष्य को संवारने का अथक प्रयास कर रहा है। जबकि क़ायनात हमें बार-बार बहुत लंबी योजनाएं बनाना छोड़कर मौजूदा पल में जीने की आदत डालने को कह रही है… पर हम हैं कि सुनते ही नहीं...। खैर इसके लिए मनुष्य ही जिम्मेदार है क्योंकि उसने महत्त्वाकांक्षाएँ पाल रखी है। उन्हें ही पूरा करने के लिए सकारात्मक सोच और दृष्टिकोण को अपनाकर जीवन की आपाधापी में होड़ ले रहा है। ..मेरा तो बस यही मानना है, पर पता नहीं क्या कहेंगे आप…?


➖ अशोक सिंह

अगला लेख: स्वस्थ रहना है तो....



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
10 अगस्त 2020
को
कोविड की तानाशाहीहम कहते हैं बुरा न मानोमुँह को छिपाना जरूरी हैअपनेपन में गले न लगाओदूरियाँ बनाना जरूरी हैकोरोना महामारी तोएक भयंकर बीमारी हैकहने को तो वायरस हैपर छुआछूत बीमारी हैहट्टे कट्टे इंसानों पर भी एक अकेला भारी हैआँख मुँह और नाक कान सेकरता छापेमारी हैएक पखवाड़े के भीतर हीअपना जादू चलाता हैकोर
10 अगस्त 2020
02 अगस्त 2020
जी
जीवित हो अगर, तो जियो जीभरकर...जीते तो सभी हैं पर सभी का जीवन जीना सार्थक नहीं है। कुछ लोग तो जिये जा रहे हैं बस यों ही… उन्हें खुद को नहीं पता है कि वे क्यों जी रहे हैं? क्या उनका जीवन जीना सही मायनें में जीवन है। आओ सबसे पहले हम जीवन को समझे और इसकी आवश्यकता को। जिससे कि हम कह सकें कि जीवित हो अगर
02 अगस्त 2020
20 जुलाई 2020
जीवन क्या है..? या मृत्यु क्या है..? क्या कभी आपने इसे समझने की चेष्टा की है..? नहीं, जरूरत ही नहीं पड़ी। मनुष्य ऐसा ही है.. तो क्या सोच गलत है...जी बिल्कुल नहीं, ये तो मनुष्यगत स्वभाव है। जरा उनके बारे में सोचिए जिन्होंने हमें ज्ञान की बाते
20 जुलाई 2020
05 अगस्त 2020
जय बोलो प्रभु श्री राम कीजय बोलो प्रभु श्री राम कीअयोध्या नगरी दिव्य धाम कीपावन नगरी के उस महिमा कीतुलसीदास जी के गरिमा कीजो जन्म भूमि कहलाता हैत्रेतायुग से जिसका नाता हैसुनि रामराज्य मन भाता है।जय बोलो प्रभु श्री राम कीअयोध्या नगरी दिव्य धाम कीजग के पालनहारी श्री रामबिगड़ी सबके बनाते कामभ्राता भरत क
05 अगस्त 2020
22 जुलाई 2020
कर्म करते जाओ फल की चिंता मत करो….हम अपने आस - पास अक्सर लोंगों को बोलते हुए सुनते हैं, हर कोई आध्यात्मिक अंदाज में संदेश देते रहता है - 'कर्म करते जाओ फल की चिंता मत करो…...।' वस्तुतः ठीक भी है। एक विचार यह है कि फल की चिंता कर्म करने से पहले करना कितना उचित है अर्थात निस्वार्थ भाव से कर्म को बखूब
22 जुलाई 2020
01 अगस्त 2020
आत्माराम उसके घर का रास्ता बनारस की जिस प्रमुख मंडी से होकर गुजरता था। वहाँ यदि जेब में पैसे हों तो गल्ला-दूध , घी-तेल, फल-सब्जी, मेवा-मिष्ठान सभी खाद्य सामग्रियाँ उपलब्ध थीं।लेकिन, इन्हीं बड़ी-बड़ी दुकानों के मध्य यदि उसकी निगाहें किसी ओर उठती,तो वह सड़क के नुक्कड़ पर स्थित विश्वनाथ साव की कचौड़
01 अगस्त 2020
09 अगस्त 2020
मै
मैं सड़क …अरे साहबकोरोना महामारी के कारणफुर्सत मिलीआपबीती सुनाने कामौका मिला।सदियों से सेवाव्रतीदिन-रात सजग तैनातसीनें पर सरपट दौड़ती गाड़ियों का अत्याचार।हाँ साहब.. 'अत्याचार'तेजगति से बेतहाशाचीखती - चिल्लातीभागती गाड़ियाँ..।क्षमता से अधिकबोझ लादे…आवश्यकता से अधिकरफ़्तार में भागती गाड़ियाँ...।मेरे चिथड़े
09 अगस्त 2020
17 जुलाई 2020
"सत्याग्रही हिंदी और विकास "हिंदी बढती लो बिंदी चढती और हमें सिखाती |समूह बना बोलियाँ मिलाती औ बाजार बढ़ाती ||हिंदी पर बात हो, भाषा पर विचार हो ऐसे में बाल गंगाधर तिलक को कौन भूल सकता है | उनहोंने कहा है कि-'मैं उन लोगों में से हूँ जिनका विचार है और जो चाहते हैं कि हिंदी ही राष्ट्र भाषा हो सकती है
17 जुलाई 2020
21 जुलाई 2020
यह फूल इस सृष्टि का अनमोल उपहार है। कितना सुंदर, मनमोहक और आकर्षक है। वास्तव में प्रकृति की दी हुई हर चीज सुंदर होती है। जिसमें फूलों की तो बात ही कुछ और होती है। रंग विरंगे फूल अपने रंग रूप और सुगंध को फैला देते हैं। जिससे प्रकृति के रूप सौंदर्य में और अधिक निखार आ जाता है। जबकि इन फूलों का जीवन स
21 जुलाई 2020
07 अगस्त 2020
मे
मेहतर….साहबअक्सर मैंने देखा हैअपने आस-पासबिल्डिंग परिसर व कालोनियों मेंकाम करते मेहतर परडाँट फटकार सुनातेलोंगों कोजिलालत करतेमारते भर नहींपार कर देते हैं सारी हदेंथप्पड़ रसीद करने में भी नहीं हिचकते।सच साहबकिसी और पर नहींबस उसी मेहतर परजो साफ करता हैउनकी गंदगीबीड़ी सिगरेट की ठुंठेंबियर शराब की खाली बो
07 अगस्त 2020
23 जुलाई 2020
अजी ये क्या हुआ…?होली रास नहीं आयाकोरोना काल जो आयामहामारी साथ वो लायाअपना भी हुआ परायाबीपी धक धक धड़कायाछींक जो जोर से आया…तापमान तन का बढ़ायाऐंठन बदन में लायाथरथर काँपे पूरी कायाछूटे लोभ मोह मायादुश्मन लागे पूरा भायापूरा विश्व थरथराया……नाम दिया महामारीजिससे डरे दुनिया सारीचीन की चाल सभी पे भारीबौखला
23 जुलाई 2020
12 अगस्त 2020
स्
स्वस्थ रहना है तो….स्वस्थ रहना है तो नियम का पालन अर्थात अनुशासन को जीवन में अपनाना होगा। कहा जाता है कि स्वास्थ्य ही सबसे बड़ी संपत्ति है। बिल्कुल सही है। यदि स्वास्थ्य अच्छा नहीं होगा तो खुशी व प्रसन्नता कहाँ से मिलेगी। कहने का तात्पर्य यह है कि खुशी व प्रसन्नता के लिए सुख सुविधाओं का व शारीरिक सुख
12 अगस्त 2020
19 जुलाई 2020
सफलताप्राप्ति के लिए क्या करेंअक्सर लोग इस बात पर मार्गदर्शन के लिए आते हैं कि उन्हें अपने कार्यों मेंसफलता प्राप्त नहीं होती, क्या करें इसके लिए ? कई बार लोग कहते हैं किहमारी जन्मपत्री देखकर कोई उपाय बताइये | हम उन सबसे यही कहते हैं कि भाईजन्मपत्री अपनी जगह है, प्रयास तो आपको स्वयं ही करना होगा |अन
19 जुलाई 2020
01 अगस्त 2020
तनाव मुक्त जीवन ही श्रेष्ठ है……आए दिन हमें लोंगों की शिकायतें सुनने को मिलती है….... लोग प्रायः दुःखी होते हैं। वे उन चीजों के लिए दुःखी होते हैं जो कभी उनकी थी ही नहीं या यूँ कहें कि जिस पर उसका अधिकार नहीं है, जो उसके वश में नहीं है। कहने का मतलब यह है कि मनुष्य की आवश्यकतायें असीम हैं….… क्योंकि
01 अगस्त 2020
12 अगस्त 2020
स्
स्वस्थ रहना है तो….स्वस्थ रहना है तो नियम का पालन अर्थात अनुशासन को जीवन में अपनाना होगा। कहा जाता है कि स्वास्थ्य ही सबसे बड़ी संपत्ति है। बिल्कुल सही है। यदि स्वास्थ्य अच्छा नहीं होगा तो खुशी व प्रसन्नता कहाँ से मिलेगी। कहने का तात्पर्य यह है कि खुशी व प्रसन्नता के लिए सुख सुविधाओं का व शारीरिक सुख
12 अगस्त 2020
29 जुलाई 2020
बप्पा को लाना हमारी जिम्मेदारी है...अबकी बरस तो कोरोना महामारी हैउत्सव मनाना तो हमारी लाचारी हैरस्में निभाना तो हमारी वफादारी हैबप्पा को लाना तो हमारी जिम्मेदारी है।अबकी बरस हम बप्पा को भी लायेंगेंसादगी से हम सब उत्सव भी मनायेंगेंसामाजिक दूरियाँ हम सब अपनायेंगेंमास्क सेनिटाइजर प्रयोग में लायेंगें।दू
29 जुलाई 2020
11 अगस्त 2020
अलौकिकचरित्र के महामानव श्रीकृष्णमित्रों, आज हम सब भगवान श्रीकृष्ण का जन्ममहोत्सव मना रहे हैं | तो सबसे पहले तो सभी को इस महापर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ | आज कहीं लोगव्रत उपवास आदि का पालन कर रहे होंगे, कहीं भगवान कृष्ण की लीलाओं को प्रदर्शित करती आकर्षक झाँकियाँ सजाईजाएँगी तो कहीं भगवान की लीलाओं का
11 अगस्त 2020
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x