अर्जुन के तीर

09 अगस्त 2020   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (413 बार पढ़ा जा चुका है)

अर्जुन के तीर

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‼ *भगवत्कृपा हि केवलम्* ‼


🏹 *अर्जुन के तीर* 🏹


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*मानव जीवन में अपने जीवन को उच्चता प्राप्त कराने के लिए मनुष्य की मानसिकता एवं भावना भी उच्चकोटि की होनी परम आवश्यक है ! क्योंकि मनुष्य की मानसिकता ही जीवन की दिशा एवं दशा निर्धारित करती है | जो सकारात्मक एवं उत्कृष्ट भावना के मनुष्य होते हैं वे अनेक झंझावातों (गरीबी , संसाधनों की कमी आदि) के बीच रहते हुए भी सदैव मुस्कराते हुए प्रस्तुत होते हैं जिससे कि ऐसा आभास होता है कि ईश्वर ने इनको निर्धनता अवश्य दी है परंतु इनके पास विचारों एवं सकारात्मकता का प्रचुर धन है ! वहीं दूसरी ओर सारी सुख सुविधा के होते हुए भी कुछ लोग सदैव स्वयं को दीन - हीन ही प्रदर्शित करते रहते हैं जिससे कि लोग उसे कई उपाधियां भी दे देते हैं ! ऐसे लोग जो हीन भावना से ग्रसित होते वे कभी भी सफल नहीं हो सकते है | मनुष्य को कभी भी अपनी दीन हीन स्थिति का प्रदर्शन नहीं करना चाहिए क्योंकि उसकी दीन हीनता का हरण उसके अतिरिक्त और कोई भी नहीं कर सकता है ! सदैव मुस्कपाते हुए सकारात्मक बने रहने का प्रयास प्रत्येक मनुष्य को करते रहना चाहिए |*



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*शुभम् करोति कल्याणम्*


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अर्जुन के तीर

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