सत्य सदेव विजयी होता है :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

09 अगस्त 2020   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (423 बार पढ़ा जा चुका है)

सत्य सदेव विजयी होता है :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*इस संसार में सबकुछ परिवर्तनशील है ! समय बहुत ही बलवान एवं परिवर्तनीय है ! वैसे तो यह कहा जाता है कि बीता हुआ समय कभी वापस नहीं लौटता यद्यपि यह सत्य भी है परंतु उसके साथ यह भी सत्य है कि समय स्वयं को दोहराता है | इस संसार में अनेक लोग सत्य को नकारने का प्रयास करते हुए उसके विरुद्ध अनेकानेक उपाय एवं षडयंत्र तक किया करते हैं परंतु सत्य तो सत्य ही होता है वह परेशान हो सकता है परंतु पराजित नहीं ! हमारा देश भारत सोने की चिड़िया कहे जाने के कारण सदैव आक्रमणकारियों की दृष्टि में बसा रहा और इन आक्रान्ताओं ने हमारे देश पर आक्रमण करके हमें तो लूटा ही साथ ही हमारी सांस्कृतिक विरासत को भी नष्ट करने का प्रयास किया ! कुछ ऐतिहासिक एवं पौराणिक प्रतीकों को उनके द्वारा नष्ट भी कर दिया गया परंतु उनके लाख प्रयास करने के बाद भी हमारी पौराणिकता बनी हुई है क्योंकि जो सत्य है उसे कभी मिटाया नहीं जा सकता है | इसी प्रकार एक आक्रांता बाबर ने भी हमारे आराध्य मर्यादापुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के जन्मस्थान को तोड़कर उस पर तथाकथित बाबरी मस्जिद का निर्माण करवा के हमारी सनातन सांस्कृतिक को मिटाने का प्रयास किया था उसमें वह सफल भी हो गया था परंतु श्रीराम के भक्तों ने समय समय पर उस पवित्र जन्मभूमि को मुक्त कराने के लिए संघर्ष भी किया ! यह धरती गोल है जहाँ से यात्रा प्रारम्भ होती है एक लम्बे कालखण्ड के बाद पूरे ब्रह्माण्ड का चक्कर लगाने के बाद मनुष्य पुन: वहीं पहुँच जाता है जहाँ से उसने अपनी यात्रा प्रारम्भ की थी ! कहने का तात्पर्य यह है कि कोई कितना भी प्रयास कर ले परंतु समय की प्रबलता एवं सत्य को नकार नहीं सकता है | अनेकों संघर्षों के बाद भी श्रीराम जन्मभूमि को मुक्त कराने में असफल रहने के बाद भी सत्य को मानने वालों को यह दृढ़ विश्वास था कि एक न एक दिन समय स्वयं को दोहरायेगा तथा सत्य पुन: प्रतिष्ठित होगा ! आज सत्य के उन अनुयायिओं की तपस्या पूर्ण हुई तथा पावनधाम अयोध्या में पुन: सत्य की विजय के रूप में श्री राम की जन्मस्थली पर भव्य मंदिर निर्माण की आधार शिला रखे जाने का शुभ मुहूर्त्त उपस्थित है | इसीलिए प्रत्येक मनुष्य को संघर्ष करने के साथ ही सत्य का त्याग कभी नहीं करना चाहिए क्योंकि सत्य सत्य ही होता है वह कभी पराजित नहीं होता एक समय ऐसा भी आता है जब सत्य स्वयं को सिद्ध करके पुनर्स्थापित हो ही जाता है |*


*आज विश्व में जन-जन के आराध्य मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम को मानने वालों की प्रसन्नता का ठिकाना नहीं है क्योंकि उन्होंने आज सत्य को विजयी होते हुए देखा है | अनेकों संघर्षों के बाद आज वह शुभ समय आया है जब भगवान श्री राम की नगरी पावन धाम अयोध्या में उनकी जन्मस्थली पर भव्य मंदिर निर्माण की आधारशिला रखी जानी है | आतताईयों के अनेकों प्रयास के बाद भी सत्य पराजित नहीं हुआ , अंततोगत्वा सत्य की विजय हुयी और आज भव्य भूमि पूजन यशस्वी प्रधानमंत्री के द्वारा श्री अयोध्या धाम संपन्न होने जा रहा है | मैं "आचार्य अर्जुन तिवारी" इतना ही कहना चाहूंगा कि कोई कितना भी प्रयास कर ले परंतु वह सत्य को पराजित नहीं कर सकता जिस प्रकार सायंकाल को सूर्य अस्ताचल में में चला जाता है तो लोग उसे रात्रि मान लेते हैं परंतु एक निश्चित समय के बाद सूर्य पुनः उदय होकर सारे संसार को प्रकाशित करता है | रात्रि को देख कर के मनुष्य को यह विचार नहीं करना चाहिए कि अब कभी सूर्योदय नहीं होगा क्योंकि इस सृष्टि में कालचक्र घूमता रहता है एक निश्चित समय पर सत्य पुनः स्थापित होता है | इसे कोई भी मिटा नहीं सकता | आज बड़े ही हर्षोल्लास के साथ हमारे देश भारत में ही नहीं वरन् विश्व के अनेक देशों में जहां भगवान श्रीराम को मानने वाले हैं वहाँ सत्य की विजय के रूप में दीपावली का त्यौहार मनाया जा रहा है | इस शुभ समय को देखने के लिए अनेकों लोग आशा लगाए लगाए इस संसार से विदा हो गए | कुछ लोग यह भी कहते थे कि प्रभु श्री राम का जन्मस्थान कभी मुक्त नहीं हो सकता परंतु अनेकों लोग ऐसे भी थे जिनको सत्य के ऊपर अटल विश्वास था कि सत्य एक दिन विजयी अवश्य होगा और आज सत्य की विजय हुई है | इसीलिए कहा जाता है कि सत्य परेशान हो तो सकता है परंतु पराजित नहीं | इस संसार में प्रत्येक घटना का समय पहले से ही निश्चित है निश्चित समय पर ही वह घटना घटित होती है मनुष्य कितना भी प्रयास कर ले परंतु जब तक किसी भी कार्य का निश्चित समय नहीं आता है तब तक वह कार्य संपन्न नहीं हो सकता | आज सत्य की विजय के रूप में वह निश्चित समय अयोध्या में देखने को मिल रहा है जब भगवान श्री राम के जन्म स्थान पर भव्य मंदिर निर्माण की आधारशिला रखी जाएगी | भगवत्प्रेमी सज्जनों ! मनुष्य को अपना कर्म करते रहना चाहिए उसका फल एक निश्चित समय पर परमात्मा के द्वारा प्रदान किया जाता है , इसीलिए समय के महत्व को समझते हुए सत्य को कभी भी पराजित होने वाला नहीं मानना चाहिए | जो लोग थोड़ी सी भी कठिनाई आने पर स्वयं को उस कार्य से हटा लेते हैं वह कभी भी सफल नहीं हो सकते इसका उदाहरण आज हम सबके समक्ष उपस्थित है कि अनेकों बार असफल होने के बाद भी राम भक्तों ने मंदिर के संघर्ष को छोड़ा नहीं और अंततोगत्वा उनकी और उनके सत्य की धारणा की विजय हुई , इसलिए सत्य को सदैव अपराजित माना जाता है | समय यदि कभी विपरीत हो जाता है तो एक निश्चित समय के बाद वह अनुकूल भी होता है , इस अनुकूल समय का प्रयोग बहुत ही भव्यता से करना चाहिए !*


*आज के पावन अवसर पर प्रत्येक मनुष्य को जन जन के आराध्य प्रभु श्री राम का स्वागत करते हुए उनके प्रति अपनी श्रद्धा समर्पित करते हुए इस सत्य का साक्षी बनना चाहिए !*

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