जीवित भगवान हैं माता पिता :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

09 अगस्त 2020   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (1887 बार पढ़ा जा चुका है)

जीवित भगवान हैं माता पिता :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सनातन धर्म में अनेक देवी - देवता कहे गये हैं जिनको मनुष्य अपनी श्रद्धा के अनुसार मानता एवं पूजता है | प्रत्येक देवी - देवता का एक प्रमुख स्थान है यथासमय ये सभी देवशक्तियाँ अपना कार्य करती रहती हैं | यदि आंकलन किया जाय कि सर्वश्रेष्ठ कौन है तो यह थोड़ा असम्भव है क्योंकि सभी देवशक्तियाँ एक दूसरे की पूरक हैं | भगवान गणेश को प्रथमपूज्य माना जाता है वहीं उनके बड़े भाई कुमार कार्तिकेय को उतना महत्त्व नहीं दिया जाता | कभी कभी मनोमस्तिष्क में अनायास ही प्रश्न उठ जाता है कि भगवान के ज्येष्ठ पुत्र कार्तिकेय को वह मान्यता नहीं मिली जो कनिष्ठ पुत्र गणेश जी को मिली ! इसका क्या कारण हो सकता है ?? इसके कारणों पर विचार करके मैं "आचार्य अर्जुन तिवारी" इस निष्कर्ष पर पहुँचता हूँ कि सनातन धर्म में यद्यपि असंख्य देवी देवता बताये गये हैं जिनका अनुभव मात्र किया जा सकता है परन्तु इस धराधाम पर मनुष्य के जन्म लेने का कारण माता - पिता ऐसे जीवित देवी - देवता हैं जिनका प्रत्यक्ष दर्शन किया जा सकता है | सृष्टि की परिक्रमा करने का प्रस्ताव सुनकर कार्तिकेय तो अपने मयूर पर बैठकर परिक्रमा करने निकल पड़े परंतु बुद्धि के भण्डार भगवान गणेश ने माता - पिता में ही समस्त सृष्टि का दर्शन करके उन्हीं की सात परिक्रमा करके प्रथम पूज्य बन गये और कार्तिकेय जी गौड़ हो गये | माता पिता की ही सेवा करके श्रवण कुमार अमर हो गये | कहने का तात्पर्य यह है कि माता - पिता में ही समस्त सृष्टि समाई हुई है जिसने यह रहस्य जान लिया वह पूज्यनीय हो गया और जिसने उन्हें अनदेखा करने का प्रयास किया वह समाज में वह सम्मान नहीं प्राप्त कर पाया | आज भी गणेश जी नाम से अनेक पर्व मनाये जाते हैं तथा उनकी पूजा सर्वप्रथम की जाती है तो उसका एक ही कारण है कि गणेश जी ने अपने माता पिता के अतिरिक्त और किसी भी देवी - देवता को मान्यता नहीं दी थी | अपने माता - पिता में ही समस्त सृष्टि है जो भी मनुष्य यह मान लेता है वही भगवान गणेश की ही भाँति समाज में पूज्यनीय हो जाता है |*


*आज समय परिवर्तित हो गया है स्वयं को आधुनिक मानने वाला समाज आज अपने जीवित देवी - देवता (माता - पिता) को अपमानित करके भी समाज में प्रतिष्ठित हो रहा है है | आज माता - पिता के भीतर भगवान का दर्शन करना तो दूर बल्कि उन्हें मनुष्य भी नहीं माना जा रहा है | जिस माता पिता ने जन्म देकर समाज में स्थापित करने में अपना सबकुछ झोंक दिया उसी माता पिता को आज की सन्तानें उपेक्षित करके जानवरों से बदतर जीवन जीने को विवश करती देखी जा सकती हैं | कुछ लोग यह पूछते हैं कि गणेश जी से बड़े कार्तिकेय जी हैं परंतु उनके नाम से कोई पर्व या व्रत क्यों नहीं मनाया जाता है | ऐसे जिज्ञासुओं को मैं "आचार्य अर्जुन तिवारी" बताना चाहूँगा कि यदि आज गणेश जी का पूजन एवं उनके नाम से अनेक व्रत पर्व त्यौहार मनाये जाते हैं तो उसके कई कारण हैं परंतु मुख्य कारण यही है कि उन्होंने अपने माता पिता में सभी देवी देवताओं के समस्त सृष्टि का दर्शन कर लिया था | आज भी समाज भी अनेक सन्तानें ऐसी हैं जो अपने माता पिता को ही सब कुछ मानते हैं और समाज उनको सम्मान भी देता है | आज की सुशिक्षित पीढ़ी को अनेक प्रकार के भौतिक ज्ञान ज्ञान प्राप्त करने के साथ ही यह ज्ञान भी प्राप्त करने की आवश्यकता है कि माता - पिता से बढ़कर इस समस्त सृष्टि में कुछ भी नहीं है | यदि सम्मान के साथ प्रगति भी चाहते हैं तो माता पिता का सम्मान करते रहें क्योंकि माता पिता के हृदय से निकला हुआ आशीर्वाद मनुष्य को इन्द्रपद भी दिलाने में सक्षम है वहीं इनके हृदय से निकला हुआ श्राप मनुष्य को पतित कर देता है |*


*माता - पिता की सेवा करके ही गणेश जी प्रथमपूज्य बने हैं तो हमें भी माता पिता का सम्मान एवं सेवा करते हुए जीवनल को धन्य बनाने का प्रयास अवश्य करना चाहिए |*

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