महिलाओ की आजादी

12 अगस्त 2020   |  nishu ghanghoriya   (443 बार पढ़ा जा चुका है)

u .p के बुलन्दशहर की रहने वाली सुदीक्षा भाटी की मृतुय की खबर सुनी तो अपने जज्बात को रोक न पई और सोचने पर मजबूर कर दिया कि आज हमे नैतिक शिक्षा देने की जरुरत किसे है अपने बच्चो को या फिर अपनी बचिचयों को जो आये दिन इस छेड़छाड़ ,बलात्कार जैसे जघन्य अपराधों का शिकार होती है ! और इन अपराधियों को कोई सज़ा नहीं मिलती है ,यदि इन अपराधियों को अगर दंड सही दिया जाये तो य ऐसी हरकत न करे इन्हे न ही हमारी न्यायिक व्यवस्था बलिक समाज स भी कठोर दंड मिलने की आवश्यकता है जिससे य निरनतर होनेवाले प्रकरण ख़तम हो यहां हमे अपने लड़को को सिख देनी चाहिए की पुरुष वर्च्रस्व ही नहीं बल्कि महिलाओ का भी अपना स्थान मिलना चाहिए ! उन्हें भी आजादी व् सवतन्त्र का अधिकार ही! हमारे सविधान में अनुछेद 21 में निजता का अधिकार दिया है जब हमारा कानून भेदभाव नहीं करता तो हम क्यों महिलाओ को क़ानूनी रूप स नई बल्कि समाजिक व् व्याहारिक रूप स लोगो की समझ विकसित हो जाये ! यह महिलाओ को शारीरिक वश्तु न मन न क्र उसे भी एक इन्शान समझना चाहिए जो हमारी इन्शानियत को बरक़रार रखे !

सोशल मिडिया पर पोस्ट करके हाथो म मोमबत्ती लेकर हम इस लड़ाई से नहीं जित सकते है इसके लिए सामाजिक रूप से नैतिक शिक्षा

बचपन स ही देना चाहिए जिससे उनमे मानवता ए और वे इन अपराधों स दूर रहे और अपनी आने वाली पीढ़ी को कुछ इन्शानियत देकर जाये

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tarun chadokar
19 अगस्त 2020

true haatho me candel lkr hum koi change nhi la sakte

tarun chadokar
19 अगस्त 2020

true haatho me candel lkr hum koi change nhi la sakte

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