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19 अगस्त 2020   |  nishu ghanghoriya   (286 बार पढ़ा जा चुका है)

लड़कियाँ के विवाह की उम्र को बढाने का प्रस्ताव केंद्र सरकार ने दिया है अब लडकियों की शादी की उम्र 18 वर्ष से परिवर्तित कर की 21 वर्ष कर दी जाएगी ऐसा विचार किया जा रहा है जो कई मायने में सही हैं शारदा अधिनियम 1929 के द्वारा बाल विवाह को रोकने का प्रयास उत्तम था परन्तु इसमें तय सीमा कर दी गई जिस 18 वर्ष की उम्र में बेटी अपने सपनो को बुनना प्रारम्भ करती है और उसे नई दिशा प्रदान क्र देती है,उसी समय विवाह के बंधन में बंधा कर जिम्मेदारी उसके ऊपर लाद दी जाती है जब वह इन सब बातो से अनभिगय है और अपनी दुनिया में अपने सपनो के साथ जीना चाहती है और अभी उसे एक मौका चाहिए अपने आप को साबित करने क लिए ! ऐसा नहीं है कि वो अपनी जिम्मेदारी से भाग रही बल्कि वह उन जिमेदारियो को बखूबी निभाती है और अपने सारे दायित्व का निर्वहन करती है जब आज के समय हर लड़की को आर्थिक रूप से सक्षम होने की जरुरत है क्योकि वह अपने अधिकारो को पहचाने और उनका हनन होने से रोके यह समाज में एक छोटे से बदलाव से कई तरह के महत्पूर्ण बदलाव होंगे जो आधुनिक समय की मांग है! सरकार द्वारा महिलाओके प्रति एक सराहनीय कदम है जिसे समाज को भी अपनाने की जरुरत है!

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