लड़ रहे हैं।

28 अगस्त 2020   |  मंजू गीत   (296 बार पढ़ा जा चुका है)

छूट गयी है जिंदगी की धूरी लड़ रहे हैं नेता कुर्सी के लिए लड़ रहे हैं लोग धर्म को श्रेष्ठ बनाने के लिए लड़ रहे हैं बच्चे जीत के लिए लड़ रहा है युवा बेरोजगारी के लिए लड़ रहा है सैनिक सरहद बचाने के लिए लड़ रहा है वकील सच झूठ का जामा पहनाने के लिए लड़ रहा है मरीज जिंदगी पाने के लिए लड़ रही है औरत सम्मान पाने के लिए लड़ रही है जनता हक वादों की पूर्ति के लिए लेकिन सब धोखे से लपेटे जा रहें हैं। कागज और करनी के झूठे खोल बुने जा रहें हैं। सोशल मीडिया पर बहसबाजी में जुमले सुनाए चले जा रहे हैं। बेगार, बेकार बैठी भारत की जनता उतरन कुतरन को बुने सुने सुनाए जा रही है।

अगला लेख: क्या जीना



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
सम्बंधित
लोकप्रिय
25 अगस्त 2020
28 अगस्त 2020
28 अगस्त 2020
दू
02 सितम्बर 2020
25 अगस्त 2020
क्
04 सितम्बर 2020
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x