जंगल में “कोरोना” (एक व्यंग कथा)

01 सितम्बर 2020   |  इंजी. बैरवा   (392 बार पढ़ा जा चुका है)

जंगल में “कोरोना” (एक व्यंग कथा)

जंगल के राजा शेर का सभा कक्ष ....

मंत्री (सियार) : महाराज शहरों में आतंक मचाने के उपरांत ‘कोरोना’ नामक वायरस ने जंगल में भी अपने तम्बू गाड़ दिये है ।

राजा (शेर) : इसका क्या प्रमाण है आपके पास मंत्रीजी ! यह कोरी अपवाह है. मुझे नहीं लगता कि जंगल का कोई प्राणी, उन पथरीले और जहरीले शहर में जाता हो. ऐसे में संक्रमण फैलने के कोई चांस नहीं दिखता है ।

मंत्री : क्षमा करें महाराज ! यह भ्रम है आपका.. आपको नहीं मालूम, प्रतिदिन चिड़ियों का एक काफिला शहरी बादलों में आवारागर्दी करने निकलता है तथा उनमें न जाने कितनों को शहरी मुंडेर पर बैठकर चोंच लड़ाते देखा भी गया है । महाराज आपको नहीं लगता कि इधर कुछ वर्षों से जंगल में कुछ अलग चालढाल..रूपरंग के रंग बिंरगे चूजे उड़ने लगे हैं ।

एक पुख्ता खबर यह कि पिछले पन्द्रह दिनों से तीन गिलहरियाँ किसी अन्य जंगल से इस जंगल में, अपने रिश्तेदार के यहाँ ठहरीं हैं.. आपको तो मालूम है कि दो जंगलों के बीच शहर का पच्छिमी किनारा भी पड़ता है ।

महाराज एक महत्वपूर्ण बात और भी है लेकिन मुझे यह बात आपसे कहने में भय एवं संकोच का अनुभव हो रहा है ?

शेर : कैसा संकोच मंत्रीजी ! जो भी जंगल के हित में तथा महत्वपूर्ण हो, उसे निर्भीक होकर कहें । ऐसा न हो कि आपके संकोच तथा किसी किन्तु-परन्तु से हमारे जंगल पर कोई विपदा आन पड़े...

मंत्री : क्षमा करें महाराज ! गोपनीय किन्तु विश्वसनीय खबर यह है कि महारानी साहिबा की कुछ सेविकाएँ हर सप्ताह शहर से महारानी के लिए मेकअप का सामान लेने जातीं हैं ।

राजा ने अपने बराबर बैठी रानी को घूरते हुआ पूछा : "क्या यह सच है महारानी साहिबा ?"

महारानी (भयभीत होकर) : नहीं महाराज ! यह किंचित भी सत्य नहीं है । मुझे लग रहा है हमारे मंत्री जी को किसी ने दिग्भ्रमित किया है ।

मंत्री : गुस्ताखी माफ़ हो महारानी साहिबा, किन्तु आपके शरीर से जो परफ्यूम की खूश्बू आ रही है; बताइए ! वो वह जंगल के किस पुष्प का अर्क है तथा आपकी आईब्रो पर जो कृत्रिम रंग चढ़ा है, क्या वह आपके केश का वास्तविक रंग है.. खैर ! मुझे आपके व्यक्तिगत शौक-श्रृंगार पर न तो कोई टिप्पणी करनी है और न ही मेरा इससे कोई वास्ता है । किन्तु जंगल पर संकट के दृष्टिगत किसी भी प्रकार की लापरवाही या पक्षपात हम-सबके जीवन के लिए घातक होगी ।

(महारानी ने नजरे झुकाकर अपना अपराध स्वीकार किया.)

शेर : महारानी आपने अपने पद एवं गरिमा की लाज न रखी । यदि आपके किसी शौक या हरकत की वजह से ‘कोरोना’ नामक बीमारी जंगल में फैलती है तो हमारा पूरा राज घराना कलंकित होगा ! इसलिए सबसे पहले आप मेरे शयनकक्ष से अपना बिस्तर हटाइए और दूसरी गुफा में चौदह दिन क्वारंटीन पीरियड बिताइए...।

महारानी : किन्तु महाराज मुझमे ‘कोरोना’ के कोई लक्षण नहीं दीखते है । इसलिए मुझे नहीं लगता कि मुझे संगरोध अवधि बिताने की आवश्यकता है...

महाराज : महारानी आपको मेकअप से फुर्सत रहेगी... आप तब न लेंगी देश दुनिया की खबर ! अब लक्षणों के बगैर भी ‘कोरोना’ के मरीज पाये जा रहें हैं .. अच्छा अब बहुत सवाल-जबाब मत कीजिए.... चुपचाप अपनी खटिया उठाइए और दफा होइये यहाँ से... और हाँ, क्वारंटीन का मतलब चौदह दिन गुफा में अकेले ही रहना है.. आपकी सेवा के लिए वहाँ कोई मौजूद नहीं रहेगा .. आपके भोजन का प्रबन्ध दूर से ही कर दिया जायेगा.. किसी विशेष परेशानी में वैद्य को बुलाया जायेगा ।

महारानी : किन्तु महाराज... मेरी गैरमौजूदगी में आपको भी मेरी तरह ही क्वारंटीन ही रहना होगा !!

राजा : लेकिन मैं क्यूं भला !!!

महारानी : महाराज यदि मुझे ‘कोरोना’ का संक्रमण हुआ तो आप कैसे बचेगें भला ! और... आपकी आदतों से भी वाकिफ़ हैं हम ।

राजा : अच्छा यह वक्त न तो मजाक का है और नहीं हमें जलील करने का...अब आप यहाँ से जाइये और अपने प्राण बचाइये ।

(महारानी, मंत्री को घूरते हुए लज्जित भाव में सभा से बाहर जाती है ।)

महाराज चितिंत मुद्रा में मंत्री से- "मंत्री जी तुरन्त एक स्पेशल मीटिंग अरेंज करें... मीटिंग में उन्हीं सदस्यों को रखना है जो इस महामारी से निपटने के लिए कोई ठोस राय या सुझाव दे सकते हों । और हाँ ! सभा स्थल पूर्ण सैनिटाइज्ड हो ! सभा में सोशल डिस्टेंसिंग का पूर्ण पालन किया जाये । सभा के बाहर पर्याप्त मात्रा सैनिटाइज की व्यवस्था हो.. कोई भी अवांछनीय तत्व सभा के इर्दगिर्द फटकने न पावें.. सभा में कोई भी सदस्य बिना मास्क लगाये सभा में न बैठे. जिन सदस्यों के सूढ़ या थूथने बड़े हों या तो उन्हें बुलाया न जाये या फिर सभा से दस फिट दूर बिठाया जाये... माइक क्वालिटी का ध्यान रहे.. और किसी भी प्रकार का खानपान पूरी तरह प्रतिबन्धित हो... इसलिए सबको सूचित किया जाये कि सभी सदस्य घर से खा पीकर आयें.... क्योंकि बहुत से लोग स्पेशल मीटिंग के नाम पर पेट खाली लेके चले आयेंगे ।"

मंत्री : जो आज्ञा महाराज !

(चार घंटे के भीतर स्पेशल मीटिंग नियत स्थान पर अरेंज की गयी सभी सदस्य अपनी निर्धारित जगह पर विराजमान हो गये.. तभी सिर झुकाये...मुंह पर मास्क बांधे चिंतित मुद्रा में सभा में महाराज का प्रवेश होता है ।)

"महाराज की जय हो ! महाराज की जय हो !! महाराज की जय हो !!!"

(सभा से चार सदस्य महाराज का पैर छूने लपकते हैं)

महाराज : खबरदार, कोई भी मेरे पंजो पर अपना संक्रमित सिर नहीं रखेगा । इस ‘कोरोना’ काल में सिर्फ "कोरोना प्रणाम" कहकर अभिवादन कीजिए !

(सभी सदस्य सिकुड़ कर बैठ जाते हैं)

राजा : आप सभी सम्मानित सदस्यों को सूचना मिल ही गयी होगी कि जंगल में ‘कोरोना’ नामक बीमारी ने अपने पैर पसारने शुरु कर दिये है । इसलिए इस महामारी से निपटने के लिए हमने एक आवश्यक मीटिंग रखी है । मैं चाहता हूँ कि जंगल के प्राणियों को बचाने के लिए आप सभी सदस्य अपनी राय रखें...।

[सर्वप्रथम वैद्य (भालू) खड़े होते हैं]

वैद्य : महाराज मैं समझता हूँ कि इस महामारी से निपटने हेतु इक्कीस दिन का लॉक डाउन सबसे कारगर विकल्प है । जंगल में जो जहाँ रहे वो वहीं पड़ा रहे । जब लोग मिलेंगे नहीं तो खुदबखुद इसका प्रसार रुक जायेगा... और आपको तो पता ही है जंगल के बहुत से जानवर झुंड में रहते हैं, ऐसे में संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ता चला जायेगा ।

भेड़िया : किन्तु महाराज इक्कीस दिन में पूरी तरह खाद्य संकट छा जायेगा । शाकाहारियों के लिए तो फिलहाल कोई परेशानी नहीं किन्तु हम जैसे मांसाहारियों के तो प्राण बचाने मुश्किल हो जायेंगे ।

महाराज : क्यों ! मैं भी तो मांसाहारी हूँ यह संकट तो मेरे लिये भी है ।

भेड़िया : गुस्ताखी माफ हुजुर... किन्तु आपके लिए कौन सा लॉकडाउन... आप जिसको जब चाहेंगे उसे अपने महल में बुला लेंगे, लेकिन जंगल के हम जैसे आम प्राणियों का क्या होगा...?

(सभा में उपस्थिति अन्य मांसाहारियों ने भेड़िये की बात का समर्थन किया)

मंत्री : वैसे तुम्हारी बात उचित है भेड़िये ! किन्तु महाराज भी कैसे किसी अपरिचित जानवर को अपना आहार बनायेंगे... क्या पता अगले में संक्रमण हो.. या कोई जानबूझकर संक्रमण लेकर सरकार के सामने आ जाये.. इसलिए महाराज के लिए भी वैसा ही संकट है..जैसे आम मांसाहारियों का ।

महाराज : तब हम मांसाहारियों के लिए क्या विकल्प है !!

सांप : महाराज ! मैं भी कुछ सुझाव देना चाहता हूँ ।

महाराज : हाँ, बोलिये माननीय सदस्य...

सांप : महाराज क्यों न जंगल में एक क्वारंटीन सेंटर खोल दिया जाये ! जिसमें जंगल के शाकाहारियों को क्रम से चौदह दिनों के क्वारंटीन पर रखा जाये.. जो भी चौदह दिन का पीरियड पार कर ले उसे ही महाराज या अन्य सदस्यों के लिए भोजन के लिये पेश किया जाये....।

तभी सभा में बीच से एक सियार उठ खड़ा हुआ -

" महाराज उपेक्षित एवं आम सियार की हैसियत से मैं भी इस सभा में अपनी एक बात रखना चाहता हूँ "

महाराज : माननीय सदस्य आपके मुख से ऐसा कटाक्ष शोभा नहीं देता... तब जब आपको मालूम है कि आपके समाज से एक व्यक्ति कैबिनेट में मेरे सबसे करीबी है । उसके बाद इतनी असुरक्षा ! इतना अविश्वास !!

सियार : यही तो दुर्भाग्य है महाराज !

महाराज : खैर ! आप सभा का वक्त जाया न करें आप अपनी समस्या बतायें...?

सियार : महाराज वो दिन और थे जब हम आपकी जूठन खाते थे लेकिन ‘कोरोना’ काल में ऐसा करना हमारे लिए जानलेवा है इसलिए हम आम सियारों को ताज़े भोजन का प्रबन्ध हो, रही बात मंत्रीजी तो इनका तो दस्तरखान ही राजदरबार में लगता है ।

(लकड़बग्घे एवं भेड़ियें भी सियार के समर्थन में उठ खड़े हुए)

महाराज : देखिए माननीय सदस्य मैं आपकी बात को गंभीरता से अनुभव कह रहा हूँ... मुझे मालूम है कि इस संक्रमण में किसी का जूठन कितना घातक है, इसलिए इस आपदा में आप सभी के लिए ताज़ा एवं सुरक्षित भोजन का प्रबंधन जंगल प्रशासन की तरफ से निशुल्क किया जायेगा किन्तु अब आप सबको स्वामी-भक्ति दिखते हुए आत्मनिर्भर भी बनना पड़ेगा... आप सभी के पास तीक्ष्ण दंत एवं नख हैं.. इस आपदा में आप सभी शिकार में दक्ष बनें.. हमारे पीछे-पीछे घूमने से जिन्दगी नहीं कटेगी... समय कठिन है । कठिन वक्त में अपनी क्षमताओं का सार्थक उपयोग करना सीखें ।

(हाथी ने सभा में सूंड उठाकर अपनी आपत्ति जतायी)

हाथी : तो इसका मतलब मांसाहारी, बिना कार्य किये भोजन उड़ायेंगे..और शाकाहारी अपना भोजन खुद जुटायेंगे.. यह तो सरासर अन्याय है महाराज !!

राजा : तब विकल्प ही क्या है माननीय सदस्य !

हाथी : महाराज इसके लिए भी कार्य आवंटित हो ! पेड़ लगायें, जंगल को सैनिटाइज करें.. जंगल में सोशल डिस्टेंसिग को पालन करवायें... मास्क वितरित करें.... महाराज कोई बिना काम किये दावत उड़ाये और दूसरा अपनी जान हथेली पर रखकर पत्ती तोड़े... यह कतई न्याय संगत नहीं !!!

महाराज : आपकी आपत्ति विचारणीय है माननीय सदस्य इसपर अवश्य विचार किया जायेगा, बैठ जायें आप ।

मंत्री : महाराज जंगल से एक शिकायत और भी आ रही है ।

महाराज : कैसी शिकायत ?

मंत्री : जैसा की आपको विदित भी है कि भले जंगल में ‘कोरोना’ के लक्षण देखे गये हैं किन्तु मरीजों का प्रतिशत अभी दशमलव के प्रतिशत में भी नहीं.. मुझे लगता है जंगल का निन्यानवे प्रतिशत क्षेत्रफल में ‘कोरोना’ के कहीं कोई केस नहीं किन्तु जंगल के बहुत से जानवर ‘कोरोना’ के लक्षण दिखाकर अपनी जान बचा ले रहे हैं ।

युवराज : मंत्रीजी ठीक कह रहें हैं महाराज.. कल मैंने एक बारहसिंघे को दो मील तक दौड़ाकर उनकी गरदन दबोची.... बेहूदा, लगा खांसने... महाराज मैं दुगनी रफ्तार से जान बचाकर भागा... मुझे लगा इसे ‘कोरोना’ संक्रमण है... किन्तु आज सुबह देखा तो वही बारहसिंगा दो घंटे से नदी में नहा रहा था ।

"युवराज ठीक कह रहें हैं महाराज (एक बूढ़े शेर ने सहमति जताई.) अब तो जिधर से गुजरिये वहीं खांसने छींकने की आवाज़ सुनाई देती है. जो जहाँ है वहीं से नाक और गला झाड़ने लग रहा है... खाना तो दूर, जान बचाने के लिये मीलों दौड़ना पड़ रहा है... कल की एक घटना सुनिये.. मैं गुफा में लेटा था एक बंदर गुफा के बाहर खांस के चला गया.. मै सोलह घंटे तक गुफ़ा से बाहर नहीं निकला... दो बार वहीं गुफा में लघुशंका किया.. लोग यह भी बता रहें हैं कि बुढ़ौती में इ करोना और भी खतरनाक है ।

महाराज : चचा ! आप और जो भी बूढ़े-बुजुर्ग हैं सभी अपने अपने मांद में रहें उनके लिए अलग से व्यवस्था की जायेगी । मंत्री जी ! दो दिन के भीतर एक बीस सदस्यीय टीम का गठन हो.. पूरे जंगल के प्राणियों के शरीर की जांच की जाये । जिनके भीतर लक्षण पाये जायें उनकी सूची कार्यालय और जंगल में चस्पा हो । अफवाह फैलाने वाले और झूठे लक्षण प्रदर्शित करने वालों पर कड़ी कार्यवाही की जाये । जिस एरिये में लक्षण दिखाई दे, वहां हाथियों का दल बांस-बल्ली लगाये और उनकी कड़ी निगरानी करे ।

उल्लू : महाराज ऐसे में भ्रष्टाचार की भी संभावना है... संभव है कि टीम अधिक लोगों को लक्षण दिखाकर राजकोष का नुकसान भी कर सकती है ।

महाराज : मुझे नहीं लगता कि मेरे राज्य में ऐसी हिमाकत कोई करेगा । यदि करता भी है तो उसके ऊपर जंगल द्रोह का मुकदमा चलाया जायेगा....।

मंत्रीजी ! तुरन्त काम पर लग जाइए तथा खुद भी सुरक्षित रहिए.. और हां ! अब आपको राजमहल आने की कोई आवश्यकता नहीं है । किसी भी विशेष कार्य एवं सूचना हेतु डाकिये (गिद्ध) से कार्य लिया जाये... चिड़ियों पर विशेष निगरानी रखी जाये तथा झुंड में निकलने वाले जानवरों पर सख्ती की जाये...

मंत्री- जो आदेश महाराज ॥

"महाराज की जय हो ! महाराज की जय हो !! महाराज की जय हो !!!"

(सौजन्य : व्हाट्स अप ज्ञान)



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