राहु केतु का वृषभ और वृश्चिक में गोचर

23 सितम्बर 2020   |  कात्यायनी डॉ पूर्णिमा शर्मा   (476 बार पढ़ा जा चुका है)

राहु केतु का वृषभ और वृश्चिक में गोचर

राहु केतु का वृषभ और वृश्चिक में गोचर

अभी कुछ ही देर पहले राहु केतु का राशि परिवर्तन हुआ है | यद्यपि कोरोना जैसी महामारी के कारण विश्व भर में सभी क्षेत्रों में अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है और जन साधारण में भय भी व्याप्त है कि कब और कैसे इस आपदा से मुक्ति प्राप्त होगी | लेकिन घबराने की आवश्यकता नहीं है, जैसे कि प्रसिद्ध आयुर्वेदाचार्य डॉ दिनेश शर्मा ने बताया है...

“बहुत से लोग कोरोना के संक्रमण के बजाय उसकी घबराहट में डर कर “पैनिक अटैक” से मर रहे है | 95% से ऊपर लोग कोरोना से ठीक भी हो रहे हैं | 5% मरने वालों में ज्यादा वृद्ध, पहले से क्रोनिक बीमारियों के मरीज और पैनिक अटैक से मरने वाले ज्यादा हैं | कोरोना से खुद को हर तरह से सुरक्षित रक्खें पर घबराएँ नहीं | अगर कोरोना हो भी जाये तो शान्त मन से उपाय करें | भाप लेते रहें, नमक के पानी के गरारे करें | विटामिन सी का प्रयोग ज्यादा करें | बुखार को 100 डिग्री से नीचे रक्खें | आराम करें, खूब सोएँ और सकारात्मक रहें कि आप जल्दी ही स्वस्थ होंगे | सांस लेने में परेशानी हो तो अपने डॉक्टर से सलाह करें...”

और अब प्रस्तुत है राहु और केतु के राशि परिवर्तन का सभी राशियों के लिए सम्भावित राशिफल | जैसा कि वैदिक ज्योतिष में राहु और केतु को छाया ग्रह कहा जाता है | यदि किसी व्यक्ति की कुण्डली में ये दोनों ग्रह उत्तम स्थिति में हैं तो उसके लिए मान सम्मान में वृद्धि तथा आर्थिक स्थिति में दृढ़ता लाने वाले माने जाते हैं | किन्तु यदि ये दोनों ग्रह प्रतिकूल स्थिति में हैं तो अनेक प्रकार की शारीरिक समस्याओं के साथ ही मानसिक अशान्ति, कार्य सिद्धि में बाधा तथा दुर्घटना आदि के कारक भी माने जाते हैं | ये दोनों ग्रह सदा एक दूसरे के सामने रहते हैं और लगभग 18 माह तक एक ही राशि में रहते हैं | इनकी चाल सदा वक्री होती है | आज अभी कुछ देर पहले अधिक आश्विन शुक्ल सप्तमी को दिन में 12:53 के लगभग वणिज करण और आयुष्मान योग में राहु वृषभ राशि तथा केतु वृश्चिक राशि में संक्रमण हुआ है | जहाँ लगभग डेढ़ वर्ष तक भ्रमण के उपरान्त 12 अप्रैल 2022 को दिन में 3:28 के लगभग क्रमशः मेष और तुला राशियों में प्रस्थान कर जाएँगे | वृषभ और वृश्चिक राशियों में प्रस्थान के समय दोनों नक्षत्र क्रमशः मृगशिर और ज्येष्ठा नक्षत्रों पर होंगे | इसके बाद 27 जनवरी 2021 को राहु रोहिणी नक्षत्र पर जाएगा और पाँच अक्तूबर 2021 को कृत्तिका पर भ्रमण करते हुए बारह अप्रैल 2022 को मेष राशि में प्रस्थान कर जाएगा | केतु दो जून 2021 को अनुराधा पर और आठ फरवरी 2022 को विशाखा पर भ्रमण करते हुए अन्त में बारह अप्रैल 2022 को तुला राशि में प्रस्थान कर जाएगा | वृषभ राशि का अधिपति शुक्र राहु का मित्र ग्रह है तथा वृश्चिक राशि का अधिपति मंगल केतु का मित्र ग्रह है |

राहु-केतु के इस राशि परिवर्तन से जीवन में कुछ महत्त्वपूर्ण परिवर्तन भी हो सकते हैं – क्योंकि एक ओर राहु को सांसारिक सुख तथा भोग विलास में रूचि प्रदान करने वाला ग्रह माना जाता है वहीं दूसरी ओर केतु आध्यात्मिकता में रूचि बढ़ाने वाला तथा मोक्ष कारक ग्रह माना जाता है | साथ ही, पूर्व जन्म के कर्मों का सम्बन्ध भी इन दोनों ग्रहों से माना जाता है | इन्हीं समस्त तथ्यों के आधार पर जानने का प्रयास करते हैं राहु-केतु के राशि परिवर्तन के जन साधारण पर क्या प्रभाव हो सकते हैं…

किन्तु ध्यान रहे, ये परिणाम सामान्य हैं | किसी कुण्डली के विस्तृत फलादेश के लिए केवल एक ही ग्रह के गोचर को नहीं देखा जाता अपितु किसी योग्य Astrologer द्वारा उस कुण्डली का विभिन्न सूत्रों के आधार पर विस्तृत अध्ययन आवश्यक है |

मेष : आपके लिए ये गोचर आपके द्वितीय तथा अष्टम भावों में हो रहे हैं | इस दौरान अधिक बोलना आपके लिए हानिकारक सिद्ध हो सकता है | जो भी बात करें पहले उसके विषय में भली भाँति सोच विचार कर लें उसके बाद ही आगे बढें, अन्यथा आपके लिए कष्टकारी वातावरण बन सकता है | क्रोध पर नियन्त्रण रखने की आवश्यकता है | स्वास्थ्य अथवा किसी अन्य समस्या के कारण धनहानि के संकेत भी प्रतीत होते हैं | साथ ही इस अवधि में नया घर खरीदने की योजना यदि है तो उसे अभी स्थगित करना ही उचित रहेगा | किसी को पैसा उधार देना अथवा स्वयं कहीं से लोन लेना भी आपके हित में नहीं होगा | इसके अतिरिक्त बजट बनाकर चलेंगे तो धन सम्बन्धी समस्याओं से बचे रह सकते हैं | किन्तु साथ ही कार्यस्थल पर आपके मान सम्मान में वृद्धि के भी संकेत हैं | दार्शनिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में वृद्धि के साथ ही आप तीर्थ स्थानों की यात्राओं पर भी जा सकते हैं | किन्तु पोंगा पण्डितों से बचने की आवश्यकता है | अपने खान पान पर नियन्त्रण रखने की आवश्यकता है | साथ ही डॉक्टर से पूछे बिना अपने मन से अथवा किसी केमिस्ट के कहने पर कोई औषधि ग्रहण न करें |

वृषभ : आपकी तो लग्न और सप्तम भावों में ही गोचर हो रहे हैं | यद्यपि आपका राश्यधिपति राहु का मित्र ग्रह है, किन्तु फिर भी आपके लिए इस गोचर को बहुत अधिक अनुकूल नहीं कहा जा सकता | यों आपके लिए ज्ञान में वृद्धि का समय प्रतीत होता है | किन्तु साथ ही इस बात की सम्भावना है कि आप शीघ्रता में कोई निर्णय लेकर अपनी हानि कर सकते हैं | इसलिए कोई भी महत्त्वपूर्ण निर्णय लेने से पूर्व उस बात पट भली भाँति सोच विचार अवश्य कर लें | दूसरों की बातों में तब तक किसी प्रकार का हस्तक्षेप न करें जब तक कि आपसे इसके लिए आग्रह न किया जाए, अन्यथा अपना सम्मान खो देंगे | आप सुख सुविधाओं की सामग्री पर बहुत पैसा इस अवधि में खर्च कर सकते हैं जिसके कारण आपका बजट गड़बड़ा सकता है | इसलिए इस ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है | विवाहित हैं तो जीवन साथी के साथ अथवा किसी प्रेम सम्बन्ध में हैं तो प्रेमी/प्रेमिका के साथ ईमानदार रहने की आवश्यकता है अन्यथा सम्बन्धों में दरार आते देर नहीं लगेगी | किन्तु जो लोग अविवाहित हैं उनकी जीवन साथी की तलाश भी इस अवधि में पूर्ण हो सकती है | पार्टनरशिप में यदि आपका कार्य है तो उसमें किसी प्रकार की ग़लतफ़हमी के कारण बाधा उत्पन्न हो सकती है | अपने तथा अपने जीवन साथी के स्वास्थ्य के प्रति सावधान रहने की आवश्यकता है | Depression के शिकार न हों इसके लिए योग, प्राणायाम और ध्यान के अभ्यास जो अपनी दिनचर्या का अंग बना लेंगे तो आपके हित में रहेगा |

मिथुन : आपके लिए क्रमशः बारहवें तथा छठे भाव में यह गोचर होने जा रहा है | खर्चों में अकारण ही वृद्धि की सम्भावना है | विदेश यात्राओं में भी वृद्धि की सम्भावना है | ये यात्राएँ आपके लिए मनोरंजक हो सकती हैं, किन्तु इन यात्राओं के दौरान आपको अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता होगी | साथ ही अपने Important Documents को भी संभालकर रखने की आवश्यकता है | कोई ऐसा कार्य न करें जिसके कारण आप किसी कानूनी कार्यवाही में फँस जाएँ | कार्य में किसी प्रकार का व्यवधान भी उत्पन्न हो सकता है | इन गोचरों के कारण आपके जीवन में अनेक प्रकार के उतार चढ़ाव उत्पन्न हो सकते हैं | किन्तु इनसे घबराने की अपेक्षा यदि आप अपने व्यवहार और विचारों में सकारात्मकता बनाए रखेंगे तो आपके लिए हित में रहेगा | आप मनोरंजन तथा सौन्दर्य प्रसाधनों पर बहुत अधिक पैसा खर्च कर सकते हैं जिसके कारण आर्थिक समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं | किसी कोर्ट केस अथवा स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं पर भी अधिक धन व्यय हो सकता है | अधिकारी वर्ग से सम्बन्धों में तनाव की सम्भावना हो सकती है अतः अपने स्वभाव पर नियन्त्रण रखना आवश्यक है | तनाव के कारण नींद में कमी का अनुभव भी कर सकते हैं | प्राणायाम और ध्यान का अभ्यास आपको इस स्थिति से मुक्ति प्रदान कर सकता है | वास्तव में यह गोचर इस प्रकार का है कि आप शान्ति के साथ बैठकर भविष्य की योजनाओं पर विचार करें और उन्हें मूर्त रूप देने का प्रयास करें | ननसाल पक्ष के साथ किसी प्रकार का विवाद भी इस अवधि में सम्भव है |

कर्क : आपके लिए क्रमशः आपके लाभ स्थान और पंचम भाव में ये दोनों ग्रह गोचर कर रहे हैं | कार्य में उन्नति तथा आर्थिक स्थिति में दृढ़ता के संकेत हैं | जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में आपके लिए लाभ तथा अनुकूल परिणाम प्राप्त होने की सम्भावना की जा सकती है | कुछ ऐसे नवीन प्रोजेक्ट्स आपको प्राप्त हो सकते हैं जिनके कारण आप दीर्घ समय तक व्यस्त रहते हुए अर्थ लाभ कर सकते हैं | अधिकारी वर्ग, मित्रों तथा पिता और सन्तान के सहयोग आपको उपलब्ध रहेगा | इस अवधि में आपको कोई ऐसी बड़ी उपलब्धि भी हो सकती है जिसके कारण न केवल आपके मन सम्मान में वृद्धि होगी अपितु आपको कोई बड़ा पुरूस्कार भी इस अवधि में प्राप्त हो सकता है | नौकरी में हैं तो किसी महत्त्वपूर्ण पद पर पदोन्नति की सम्भावना भी है | अविवाहित हैं जीवन साथी की खोज भी इस अवधि में पूर्ण हो सकती है | सम्भव है किसी सहकर्मी की ओर से अथवा किसी मित्र की ओर से आपको प्रणय निवेदन प्राप्त हो और आप उसके साथ विवाह बन्धन में बंध जाएँ | सन्तान की ओर से कोई शुभ समाचार इस अवधि में प्राप्त हो सकता है, किन्तु साथ ही सन्तान के साथ व्यर्थ की बहस से बचने का प्रयास आपके लिए आवश्यक है |

सिंह : आपके लिए क्रमशः आपके कर्म स्थान और चतुर्थ भाव में ये गोचर हो रहे हैं | आर्थिक दृष्टि से आपके लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | आपने यदि कहीं पैसा Invest किया हुआ तो वहाँ से तथा अन्य भी विविध स्रोतों से अर्थ लाभ की सम्भावना की जा सकती जिसके कारण आपकी आर्थिक स्थिति दृढ़ बनी रहेगी | किन्तु इसके साथ ही कार्यस्थल पर तथा परिवार में विशेष रूप से माता पिता की ओर से किसी प्रकार का विरोध का सामना भी करना पड़ सकता है | कार्य की अधिकता के कारण व्यस्तताओं में वृद्धि की भी सम्भावना है और सम्भव है इस कारण आप परिवार की ओर अधिक ध्यान न दे पाएँ | नवीन उपलब्धियों तथा कार्य में उन्नति के साथ ही सामाजिक स्तर पर मान सम्मान में वृद्धि की भी सम्भावना है | रुके हुए कार्य भी फिर से आरम्भ हो सकते हैं | आप नवीन चुनौतियों को स्वीकार करने की मनःस्थिति में होंगे जिसका लाभ आपको अपने कार्य में निश्चित रूप से प्राप्त होगा | आप इस अवधि में नया घर खरीद सकते हैं अथवा बना सकते हैं अथवा जिस घर में अभी आपका निवास है उसे Renovate भी करा सकते हैं | बहुत सी महत्त्वपूर्ण सामाजिक गतिविधियों में आपको सम्मान प्राप्त होने की सम्भावना है | किन्तु इतना सब होते हुए भी आपके मन में उत्साह का अभाव रह सकता है | नया वाहन खरीदने के लिए यह समय उपयुक्त नहीं प्रतीत होता | अपने माता पिता के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है |

कन्या : आपके लिए क्रमशः आपके भाग्य स्थान और तृतीय भावों में ये गोचर हो रहे हैं | सम्भव है आपको अपने कार्यों में व्यवधान का अनुभव इस अवधि में हो | कार्य जिस रूप में होना चाहिए सम्भव है उस रूप में न हो | छोटे भाई बहनों तथा पिता के साथ किसी प्रकार का विवाद भी इस अवधि में सम्भव है | किन्तु कहीं से कोई ऐसा शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है जिसके कारण पिता के साथ आपके सम्बन्धों में सुधार की सम्भावना भी की जा सकती है | पैसे के लेन देन में सावधानी रखने की आवश्यकता है | साथ ही आपके उत्साह और ऊर्जा में वृद्धि का समय भी प्रतीत होता है जिसके कारण आप समस्याओं का सामना करके उनका समाधान करने में भी समर्थ हो सकते हैं | आप किसी लम्बी दूरी की यात्रा पर भी जा सकते हैं | यह यात्रा आपके लिए कार्य की दृष्टि से अनुकूल सिद्ध हो सकती है | आप धार्मिक स्थलों की यात्रा के लिए भी जा सकते हैं | आपके भाई बहनों का विवाह भी इस अवधि में सम्भव है |

तुला : आपकी राशि से क्रमशः अष्टम और द्वितीय भावों में राहु और केतु के गोचर हो रहे हैं | आपके लिए ये गोचर बहुत अनुकूल प्रतीत नहीं होते | इस गोचर के दौरान आपके लिए खर्चों में वृद्धि की तथा आय में कमी की सम्भावना की जा सकती है | सोच समझ कर खर्च करेंगे और बजट बनाकर चलेंगे तो आर्थिक समस्याओं से बचे रह सकते हैं | साथ ही यदि कहीं पैसा Invest करना चाहते हैं तो उसके लिए यह समय अभी अनुकूल नहीं प्रतीत होता | परिवार में कुछ व्यक्तियों की ओर से आपकी उपेक्षा भी हो सकती है | किन्तु इसके कारण चिन्तित होने की आवश्यकता नहीं है अन्यथा तनाव के कारण आपका स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है | परिवार में किसी प्रकार का क्लेश भी सम्भव है | आवश्यकता है आप अपने Temperament और वाणी पर संयम बनाए रखें | अपनी सूझ बूझ तथा सहृदयता से आप पारिवारिक विवाद को समाप्त भी कर सकते हैं | कार्यस्थल पर विरोध में वृद्धि की भी सम्भावना है | गुप्त शत्रुओं की ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है | ड्राइविंग के समय सावधानी रखने की आवश्यकता है | किसी अन्य भी प्रकार की दुर्घटना आदि की ओर से भी सावधान रहने की आवश्यकता है | साथ ही स्वास्थ्य उत्तम बना रहे इसके लिए खान पान पर नियन्त्रण रखने की और प्राणायाम, ध्यान तथा योग को अपने जीवन का आवश्यक अंग बनाने की भी आवश्यकता है | पिता के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है |

वृश्चिक : आपकी राशि से क्रमशः सप्तम भाव और लग्न में राहु-केतु का गोचर हो रहा है | पार्टनरशिप में कोई कार्य कर रहे हैं तो उसमें भी किसी प्रकार का व्यवधान सम्भव है | किन्तु यदि आपका अपना स्वयं का कार्य है तो उसमें उन्नति की सम्भावना की जा सकती है | नौकरी में हैं तो आपकी पदोन्नति भी हो सकती है | नई नौकरी की खोज में हैं तो वह खोज भी इस अवधि में प्राप्त हो सकती है | नया व्यवसाय आरम्भ करने के लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | कार्य से सम्बन्धित व्यस्तताओं में वृद्धि के कारण सम्भव है आप परिवार की ओर अधिक ध्यान नहीं दे पाएँ | विविध क्षेत्रों से सम्बन्धित व्यक्तियों से आपकी भेंट इस अवधि में होती रहेगी जिसके कारण आपके मान सम्मान में वृद्धि के साथ ही आपके कार्य में भी सहायता प्राप्त होने की सम्भावना है | आध्यात्मिक तथा दार्शनिक गतिविधियों और रूचि में वृद्धि की सम्भावना प्रतीत होती है | आपके लिए आत्म निरीक्षण का समय भी है | साथ ही आपके व्यवहार में एक प्रकार का सन्तुलन और सन्तुष्टि का भाव भी बना रहेगा | दाम्पत्य जीवन में किसी प्रकार का तनाव न उत्पन्न होने पाए इसके लिए समझदारी से काम लेने की आवश्यकता है | आपका जीवन साथी आपके लिए समर्पित है अतः उस पर किसी प्रकार का सन्देह करना उचित नहीं होगा | स्वास्थ्य की दृष्टि से यों गोचर अनुकूल रहने की सम्भावना है, किन्तु माईग्रेन आदि की सम्भावना से इन्कार नहीं किया जा सकता | अतः स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं से बचे रहने के लिए योग और ध्यान का अभ्यास आपके लिए आवश्यक है |

धनु : आपके लिए आपकी राशि से छठे और बारहवें भाव में इन छाया ग्रहों का गोचर हो रहा है | एक ओर आपके लिए कार्य में प्रगति तथा नौकरी में पदोन्नति की सम्भावना है | कार्य से सम्बन्धित विदेश यात्राओं में वृद्धि की भी सम्भावना है | दूसरी ओर कार्य स्थल पर विरोध के स्वर भी मुखर हो सकते हैं | किन्तु आप स्वयं अपनी बुद्धि तथा उत्साह के बल पर उस विरोध को समाप्त करने में भी समर्थ हो सकते हैं | आप इस अवधि में अपना निवास भी बदल सकते हैं अथवा आपका कहीं ट्रांसफर भी हो सकता है | ये ट्रांसफर सम्भव है आपके स्वास्थ्य के लिए अनुकूल न रहे | विद्यार्थियों के लिए तथा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में लगे लोगों के लिए ये गोचर उत्साहवर्द्धक प्रतीत हो सकते हैं | पॉलिटिक्स में हैं तो वहाँ भी आपके लिए अनुकूल परिणाम प्राप्त होने की सम्भावना है | किसी पुराने रोग से मुक्ति की सम्भावना भी है | किसी प्रकार का कोर्ट केस चल रहा है तो आपके लिए अनुकूल दिशा में वृद्धि की सम्भावना की जा सकती है | किन्तु उसमें कुछ समय तथा धन व्यय हो सकता है | कोई ऐसा कार्य न करें जिसके कारण आप किसी लीगल केस में फँस जाएँ | आध्यात्मिक यात्रा की ओर प्रवृत्त होने का समय प्रतीत होता है |

मकर : आपकी राशि से क्रमशः पञ्चम भाव तथा लाभ स्थान में ये गोचर हो रहे हैं | यदि आप प्रोफेशनल हैं तो नवीन योजनाएँ आपके मन में आ सकती हैं और आप उन्हें क्रियान्वित भी कर सकते हैं | आप लेखन के क्षेत्र से सम्बन्ध रखते हैं अथवा अध्ययन अध्यापन के क्षेत्र से आपका सम्बन्ध है तो आपके लिए ये गोचर अत्यन्त अनुकूल प्रतीत होते हैं | किन्तु विद्यार्थियों के लिए कठिन परिश्रम का समय प्रतीत होता है | विद्यार्थियों को पढ़ाई में मन लगाने में व्यवधान का अनुभव हो सकता है | उनके लिए तो इस अवधि में ध्यान का अभ्यास अत्यन्त आवश्यक है | आपकी सन्तान का व्यवहार भी अनियन्त्रित हो सकता है | अच्छा यही रहेगा कि सन्तान को जो भी सलाह देनी हो सोच विचार कर तथा संयमित मन के साथ दें ताकि आपकी बात का प्रभाव उस पर पड़े | आपको कार्य के लिए अनेक नवीन अवसर उपलब्ध होंगे जो आपको बहुत समय तक व्यस्त रख सकते हैं | कार्य की अधिकता के कारण मानसिक तनाव भी सम्भव है | आय में वृद्धि तथा मान सम्मान में वृद्धि की सम्भावना की जा सकती है | सन्तान के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की विशेष रूप से आवश्यकता है |

कुम्भ : राहु और केतु का गोचर क्रमशः आपके चतुर्थ भाव और दशम भाव में हो रहा है | आपको कार्य की दृष्टि से कुछ समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है | सम्भव है आपको कोई ऐसा कार्य सौंप दिया जाए जो आपके लिए उचित न हो तथा आपके लिए कष्टकारी भी हो | आपकी निर्णयात्मक क्षमता भी इस अवधि में प्रभावित हो सकती है | आप Confuse हो सकते हैं | जिसके कारण आपकी प्रगति पर भी विपरीत प्रभाव हो सकता है | अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आपको कठोर श्रम करना पड़ सकता है | पारिवारिक स्तर पर तथा कार्य स्थल पर भी तनाव की सम्भावना प्रतीत होती है | यह भी सम्भव है कि परिवार के व्यक्तियों का आचरण कुछ इस प्रकार का हो जाए जिससे आप सहमत न हों | किन्तु आपके स्वभाव तथा व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तनों की सम्भावना की जा सकती है | जिन लोगों से आप सहमत न हों या जो आपसे सहमत न हों उनके साथ व्यर्थ के विवाद की आवश्यकता नहीं | परिवार में किसी नवीन सदस्य का आगमन हो सकता है अथवा किसी बच्चे का जन्म भी हो सकता है | आपका झुकाव आध्यात्मिक तथा दार्शनिक गतिविधियों की ओर बढ़ सकता है जिसके कारण सम्भव है आप अपने कार्य पर पर्याप्त ध्यान न दे पाएँ | अपने माता पिता के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है |

मीन : राहु-केतु का गोचर आपके तीसरे और नवम भाव में होने जा रहा है | तृतीय भाव पराक्रम का भाव है और नवम भाव भाग्य स्थान या आध्यात्मिक गतिविधियों का कारक | आपके लिए यह गोचर आपके पराक्रम में वृद्धि करने के साथ ही आपके लिए सन्तोषजनक फल देने वाला तथा साहस और मनोबल में वृद्धि प्रदान करने वाला सिद्ध हो सकता है | यदि आप किसी नौकरी में हैं और उसे बदलना चाहते हैं तो यह भी इस अवधि में सम्भव है | नौकरी में उन्नति तथा अपने स्वयं के कार्य में प्रगति भी इस अवधि में सम्भव है | कोई नया कार्य भी आप इस अवधि में आरम्भ कर सकते हैं | आर्थिक लाभ की भी सम्भावना है | दूर पास की यात्राएँ भी इस अवधि में सम्भव हैं | अपने सहकर्मियों का तथा मित्रों का सहयोग आपको प्राप्त रहेगा | नवीन मित्र बनने की भी सम्भावना है | आध्यात्मिक तथा दार्शनिक गतिविधियों में वृद्धि के साथ ही आप सपरिवार किसी धार्मिक स्थल की यात्रा के लिए भी जा सकते हैं |

अन्त में, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं | सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | साथ ही, यदि कोरोना को हराना है तो कोरोना से भयभीत हुए बिना केवल सावधानी रखने की आवश्यकता है – साफ़ सफाई का ध्यान रखें, मास्क पहनें, तथा निश्चित दूरी बनाकर रहे | तो, कर्मशील तथा सावधान रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें यही कामना है…

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