पश्चिमी एशिया में शांति की बढ़ती संभावनाएं ' इजरायल '

27 सितम्बर 2020   |  शोभा भारद्वाज   (438 बार पढ़ा जा चुका है)

पश्चिमी एशिया में शांति की बढ़ती संभावनाएं ' इजरायल '

पश्चिमी एशिया में शान्ति की बढ़ती संभावनायें

डॉ शोभा भारद्वाज

यहूदियों का सम्पूर्ण इतिहास संघर्ष , संहार अपने स्थान से विस्थापित होने की दर्द भरी दास्तान है। विश्व के सभी देश ‘इजरायल’ की तरक्की पर हैरान है.

यू एस राष्ट्रपति ट्रंप की उपस्थिति में संयुक्त अरब अमीरात ( यूएई) एवं इजरायल के बीच द्विपक्षीय शान्ति समझौता हुआ इस पर बहरीन ने भी हस्ताक्षर किये समझौते को अब्राहम एकॉर्ड का नाम दिया गया . इजरायल की राजधानी येरुशलम में अल- अक्सा मस्जिद सहित अनेक ऐतिहासिक स्थान है जिनका इस्लाम धर्म में विशेष महत्व है समझौते के अनुसार अब यहाँ दुनिया के मुसलमान जियारत कर सकेंगे इसके बदले इजरायल फिलिस्तीन के वेस्ट बैंक इलाके में अपनी दावेदारी छोड़ने के लिए तैयार हो गया है दोनों अरब देशों के साथ अब औपचारिक कूटनीतिक संबंध शुरू हो जाएंगे , तीनों देश एक दूसरे की सहमति से दूतावासों की स्थापना करेंगे . इजरायल को बाजार चाहिए अत : अब उसका कारोबार इन देशों से बढ़ेगा . यूएई एवं बहरीन को टेक्नोलॉजी की जरूरत है दोनों देशों के लिए लाभ का सौदा है . सऊदिया ने इजरायल एवं यूएई के विमानों को अपने क्षेत्र से उड़ने की इजाजत दे दी लगता है और भी अरब देश इजरायल से संबंध जोड़ेंगे . समझौता ट्रम्प की विदेश नीति का सफल कदम माना जाएगा .

1917 में जब विश्व युद्ध चल रहा था इजरायल पर ब्रिटिश सेनाओं ने कब्जा कर यहूदियों को आश्वासन दिया ब्रिटिश सरकार की नीति इजरायल में यहूदियों को बसाना है जिससे यहूदियों का अपना एक देश हो . दुनिया से आकर यहूदी यहाँ की धरती पर धीरे-धीरे बसने लगे तानाशाह हिटलर द्वारा जर्मनी की सत्ता पर अधिकार करने के बाद यहूदियों के साथ ऐसी निर्ममता का व्यवहार किया गया , मानवता भी शर्मिंदा हो गयी . प्रथम विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद जर्मनी के नागरिकों की हर परेशानी का कारण यहूदी हैं ऐसा प्रचार कर उनकी नस्ल को नष्ट करने के लिए उन्हें जानवरों की तरह ठूस-ठूस कर ट्रकों में भर कर लाया जाता , मरणासन्न स्त्री पुरुषों को गैस चेम्बरो में मरने के लिए डाल दिया जाता . बकायदा ठेके उठते थे कौन कम खर्च में अधिक से अधिक यहूदियों को मार सकेंगे यहूदी नस्ल पत्थर हो गयी . फ़्रांस, इटली ,रूस ,और पौलेंड में अत्याचार ही नहीं उनके धर्म पर बैन लगा दिया गया . मजबूर यहूदी उस धरती पर लौटने लगे जहाँ 2000 वर्ष पहले वह रहते थे . यहाँ तीन प्रतिशत यहूदियों की जनसंख्या बढ़ कर 30 % हो गयी वह गरीब अरबों से जमीन खरीद कर वहाँ खेती करने लगे उनके खेतों के बीच यदि किसी फिलिस्तीनी का खेत आ जाता था उसे बेचने के लिए विवश कर देते . स्थानीय लोगों और यहूदियों के झगड़े बढ़ने लगे सत्तासीन ब्रिटिशर चाहते थे इस स्थान को छोड़ने से पहले संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा फिलिस्तीन को बाँट दिया जाये . विभाजन दो राज्यों का हुआ लेकिन आपसी संघर्ष का सबसे बड़ा नुकसान फिलिस्तीनियों का हुआ लगभग एक लाख लोग अपनी धरती से विस्थापित हो गये उन्हें तम्बुओं में रहना पड़ा . इजरायल के कब्जे में बड़ा क्षेत्र आ गया .

14 मई 1948 को इजरायल ,एक यहूदी राष्ट्र की स्थापना हुई , यहूदियों का अब अपना कहलाने वाला देश था लेकिन यहाँ उन्हें अपने अस्तित्व के लिये लड़ना था दुनिया भर से यहूदी युवक युवतियाँ हाथ पकड़ कर अपने नवोदित राष्ट्र के उत्थान में योगदान देने इजरायल आने लगे प्राचीन कहानियों में वर्णित इजरायल क्या वैसा था ? धूल भरी आँधियाँ पानी की कमी तम्बुओं में लोग पड़े थे लेकिन उनके मन में उत्साह की कमी नहीं थी दिल में मजबूत राष्ट्र के निर्माण की इच्छा शक्ति थी. उनके साथ यहूदियों का सम्पूर्ण इतिहास ,संघर्ष , संहार अपने स्थान से विस्थापित होने की दर्द भरी दास्तान की टीस थी .

यहाँ की बहुसंख्यक आबादी यहूदियों की है मुस्लिम अल्पसंख्यक हैं . इजराइल के पूर्व में भूमध्य सागर ,दक्षिण पूर्व में मिस्र ,उत्तर में लेबनान ,उत्तर पश्चिम में सीरिया (सीरिया अब खंडहर बन चुका है )पश्चिम में जॉर्डन एवं फिलिस्तीन का वेस्ट बैंक इलाका है ,चारो और से यहूदी राज्य इस्लामिक देशों से घिरा हुआ है . इजरायल जब कमजोर स्थिति में था अरब राज्यों मिश्र ,जॉर्डन सीरिया लेबनान और इराकी सेनाओं ने मिल कर अगले दिन 15 मई को नवोदित राज्य पर हमला बोल दिया यहीं से ‘अरब इजरायल संघर्ष की शुरुआत हो गयी जो अब तक जारी है . 1949 में जोर्डन और इजरायल के बीच एक समझौते द्वारा सीमा विवाद सुलझाने की कोशिश की गयी जोर्डन नदी के पश्चिमी इलाके वेस्ट बैंक पर जोर्डन का और गाजा पट्टी पर मिश्र का कब्जा हो गया ग्रीन लाइन के नाम से सीमा का निर्धारण किया गया . 11 मई 1949 को संयुक्त राष्ट्र संघ ने इजरायल को एक राष्ट के रूप में मान्यता दी लेकिन येरुशलम पर फैसला नहीं हो सका यह अंतर्राष्ट्रीय नियंत्रण में रहा था . डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने घोषणा पत्र में येरुसलम को इजरायल की राजधानी बनाने वायदा किया था . 6 दिसम्बर को येरुशलम को इजरायल की राजधानी घोषित कर अमेरिकी दूतावास को तेल अवीव से हटाने की प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया फैसले का व्यापक रूप से विरोध होने लगा .

येरुशलम -एक ऐसा शहर है जिसका इतिहास यहूदियों ,ईसाईयों और मुस्लिमों के विवाद का केंद्र है| यहूदियों का विश्वास यहाँ एक शिला की नीव रखी गयी थी यहाँ से दुनिया का निर्माण हुआ था यहाँ कभी पवित्र मन्दिर था किंग डेविड का टेंपल जिसे रोमन आक्रमण कारियों ने नष्ट कर दिया बची पश्चिमी दीवार उस टेम्पल की निशानी है लाखो तीर्थ यात्री दीवार के पास खड़े होकर रोते और इबादत करते दिखाई देते हैं . ईसाई समुदाय का विश्वास है यहाँ ईसा को सलीब पर चढ़ाया गया था इस स्थान को गोल गोथा भी कहते हैं यहाँ ईसा ने पुन: जन्म लेकर सरमन दिये थे . ईसाई समाज यहाँ के लिए बहुत संवेदन शील है . मुस्लिम समाज - यहाँ डोम आफ रॉक और मस्जिद अल अक्सा है यह इस्लाम धर्म की तीसरी पवित्र मस्जिद इसे मुसलमान बेहद पाक मानते हैं उनका विश्वास है यहीं से पैगम्बर मुहम्मद स्वर्ग जा कर वापिस आये थे और अपने समकालीन अन्य धर्मों के पैगम्बरों से मिले थे .

विपरीत हालातों में घिरा राज्य विषम परिस्थिति में स्वाभिमान के साथ खड़ा है जिसके खिलाफ आँख उठाने में दुश्मन डरते हैं . सबसे पहले मिश्र के राष्ट्रपति अनवर सादात समझ गए थे इजराइल के साथ शान्ति समझौता करना ही उचित है उन्होंने स्वयं इजरायल की यात्रा की .इजरायल की सरकार भी समझ रही थी निरंतर युद्ध देश की आर्थिक स्थिति खराब कर रहे हैं। अनवर सादात की हत्या के बाद भी मिश्र के नये राष्ट्रपति हुस्ने मुबारक समझौते से पीछे नहीं हटे . 1979 में मिश्र के साथ एवं 1994 में जॉर्डन के साथ इजरायल ने समझौते पर हस्ताक्षर किये .अरब दुनिया समझ रही है इजरायल राज्य को उखाड़ा नहीं जा सकता अत : कूटनीतिक तौर पर आपसी समझौते से शांति की स्थापना संभव है जबकि बहरीन में शिया समाज का बाहुल्य है शासक सुन्नी है .

टर्की ,ईरान एवं कतर समझौते का विरोध कर रहे हैं . टर्की अपने पुराने गौरव औटोमन एम्पायर के सपने में जी रहा है, शिया ईरान ? इस्लामिक सरकार की स्थापना के बाद से इस्लामिक दुनिया का लीडर बनने की चाह लिए हैं . 1980 में ईरान इराक के युद्ध के समय क़ुद्स फ़ोर्स का गठन किया गया जिसका अर्थ था येरुशलम सेना द्वारा येरुशलम की रिहाई ,सीधे लड़ाई सम्भव नहीं है इसलिए छद्म रूप में मिडिल ईस्ट में शिया प्रभावित क्षेत्रों में अपना प्रभाव बढ़ा कर समाज को क्रान्ति के लिए उकसाया जाये . स्वर्गीय सुलेमानी 1998 से क़ुद्स सेना के गुप्त अभियानों के संचालक थे लेबनान के हिजबुल्ला, यमन के हूती विद्रोहियों को उनका साथ मिला लेकिन अरब शन्ति एवं विकास के इच्छुक हैं .

दुनिया के देश इजरायल को प्रशंसा की दृष्टि से देखते हैं यहाँ की राष्ट्र भाषा हिब्रू है यह इनकी प्राचीन भाषा है सभी प्रार्थनाओं में हिब्रू का प्रयोग किया जाता था लेकिन दैनिक जीवन में हिब्रू का प्रयोग मुश्किल था यहूदी इसे भूल चुके थे भाषा को फिर से जीवित कर राष्ट्र भाषा का दर्जा दिया इजराइल राज्य आज तक आतंकवाद के साये में जी रहा है किसी भी रेस की तरक्की जानने के लिए उनका इतिहास जानना चाहिए छोटा सा देश भारत की तरह आतंकवाद झेल रहे है .




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