अहिंसा का रुप बदलता हिंसा में

02 अक्तूबर 2020   |  nishu ghanghoriya   (434 बार पढ़ा जा चुका है)

आज 2 अकंटूबर है दो महान व्यक्ति की जऩमतिथि एक अहिंसा के पुजारी तो दूसरे अनुशासन के धनी दोनों ही अपना अलग अलग वयक्त रखते हैं, लेकिन आज जिस तरह से देश में माहौल है उस से लगता है कि देश की स्वतंत्रता के बाद जो स्वपन देखा था वो भारत तो मिला ही नहीं... न देश मे बेटी बहन सुरक्षित है नहीं कोई आम आदमी, यहाँ मौलिक अधिकार का हनन हो रहा है हमारा सविधान ही सुरक्षित नहीं रहा , पत्रकारिता जो सविधान का 4 स्तम्भ हैं उसे ही आजादी नहीं उत्तर प्रदेश के हथरस में प्रशासन भी पीडिता के परिवार वालो से मीडिया को नहीं मिलने दिया जा रहा जिस सरकार को हमने चुना और जो प्रशासन हमारी सुरक्षा के लिए बना है वही हमे डरा और धमका रहा है पीडिता के साथ जघन्य अपराध होता है फिर उसकी लाश को बिना परिवार की अनुमति के जलाया जाता है और अब उसके परिवार को किसी से मिलने नही दिया जाता वैसे भी इस प्रकार के प्रकरण सामने नहीं आते और जो सामने आते है उनहे दबा दिया जाता है अगर यही सब करना है तो इसे ब्रिटिश शासन ही वापस आ जाये कहने को होगा कि हम गुलाम है



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