वक्री मंगल का मेष से मीन में गोचर

03 अक्तूबर 2020   |  कात्यायनी डॉ पूर्णिमा शर्मा   (407 बार पढ़ा जा चुका है)

वक्री मंगल का मेष से मीन में गोचर

वक्री मंगल का मीन राशि में गोचर

कल चार अक्तूबर अधिक आश्विन कृष्ण तृतीया को प्रातः दस बजकर आठ मिनट के लगभग वणिज करण और हर्षण योग में वक्री होकर भूमिसुत मंगल का गोचर अपनी स्वयं की मेष राशि से अपने मित्र ग्रह गुरु की मीन राशि में रेवती नक्षत्र पर होगा | चौदह नवम्बर को प्रातः लगभग छह बजकर दस मिनट से मंगल पुनः मार्गी होना आरम्भ करेगा और चौबीस दिसम्बर को प्रातः दस बजकर बीस मिनट के लगभग वापस अपनी स्वयं की मेष राशि और अश्विनी नक्षत्र पर पहुँच जाएगा | जहाँ से 22 जनवरी 2021 से भरणी नक्षत्र तथा सोलह फरवरी से कृत्तिका नक्षत्र पर विचरण करते हुए अन्त में बाईस फरवरी को सूर्योदय से पूर्व 4:37 के लगभग वृषभ राशि में प्रस्थान कर जाएगा | मीन राशि से वक्री मंगल की दृष्टियाँ मिथुन, कन्या तथा तुला राशियों पर रहेंगी तथा मेष राशि से मार्गी मंगल की दृष्टियाँ कर्क, तुला तथा अपनी स्वयं की राशि वृश्चिक पर रहेंगी | तो, जानने का प्रयास करते हैं वक्री मंगल के मीन राशि में वापस लौटने के विभिन्न राशियों के जातकों पर क्या सम्भावित प्रभाव हो सकते हैं…

मेष : आपका लग्नेश और अष्टमेश होकर वक्री मंगल का गोचर आपके बारहवें भाव में हो रहा है जहाँ से आपके चतुर्थ, सप्तम और अष्टम भावों पर इसकी दृष्टियाँ रहेंगी | स्वास्थ्य का ध्यान रखने की विशेष रूप से आवश्यकता है अन्यथा स्वास्थ्य से सम्बन्धित खर्चों में वृद्धि हो सकती है | अस्पतालों के चक्कर लगाने पड़ सकते हैं | यदि आपका कार्य विदेश से सम्बन्धित है तो आपको लाभ की सम्भावना की जा सकती है | परिवार में किसी नवीन सदस्य का आगमन हो सकता है जिसके कारण परिवार में हर्षोल्लास का वातावरण व्याप्त रहेगा | इस अवधि में आप कहीं घूमने जाने का कार्यक्रम भी बना सकते हैं | छोटे भाई बहनों के लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है, किन्तु उनके साथ आपके सम्बन्धों में कुछ तनाव भी उत्पन्न हो सकता है | आपकी माता जी का स्वास्थ्य चिन्ता का विषय हो सकता है |

वृषभ : आपका सप्तमेश और द्वादशेश होकर वक्री मंगल आपके लाभ स्थान में गोचर करेगा जहाँ से इसकी दृष्टियाँ आपके तीसरे, छठे तथा सातवें भावों पर होंगी | आपके लिए कार्य सम्बन्धी यात्राओं में वृद्धि के योग प्रतीत होते हैं अथवा आपका कहीं ट्रांसफर हो सकता है | कार्य की दृष्टि से यह गोचर आपके, आपके जीवन साथी तथा आपकी सन्तान के लिए अनुकूल प्रतीत होता है | यदि कोई कार्य बहुत समय से रुका हुआ है तो वह भी इस अवधि में पूर्ण हो सकता है अथवा पूर्णता की ओर अग्रसर हो सकता है – यदि उचित दिशा में प्रयास किया गया तो | आर्थिक लाभ की सम्भावना तो है किन्तु साथ ही खर्च में वृद्धि की सम्भावना से भी इन्कार नहीं किया जा सकता | सोच समझकर बजट बनाकर चलेंगे तो आर्थिक समस्या से बचे रह सकते हैं | भाइयों के साथ किसी प्रकार की व्यर्थ की बहस से बचने की आवश्यकता है | यदि लोन के लिए एप्लाई किया हुआ है तो वह भी इस अवधि में प्राप्त हो सकता है, किन्तु अच्छा यही रहेगा कि लोन लेने से बचें |

मिथुन : षष्ठेश और एकादशेश होकर वक्री मंगल का गोचर आपकी कुण्डली के दशम भाव में हो रहा है जहाँ से इसकी दृष्टियाँ आपके लग्न, चतुर्थ भाव तथा पञ्चम भावों पर रहेंगी | आपके लिए उत्साह में वृद्धि के साथ ही कार्य में उन्नति के संकेत हैं | व्यवसाय में परिवर्तन की सम्भावना भी है | आर्थिक स्तर में भी दृढ़ता की सम्भावना की जा सकती है | किन्तु इसके साथ ही व्यस्तताओं में भी वृद्धि होगी जिसके कारण स्वयं के लिए समय निकालना कठिन प्रतीत हो सकता है | नौकरी में हैं तो पदोन्नति के भी संकेत हैं | किसी पुरूस्कार आदि की प्राप्ति की सम्भावना भी की जा सकती है | अधिकारियों तथा सहकर्मियों का सहयोग आपको उपलब्ध रहेगा | अपना स्वयं का व्यवसाय है तो उसमें भी आप वृद्धि कर सकते हैं अथवा कोई नई ब्रांच खोल सकते हैं | परिवार के सदस्यों तथा सन्तान के साथ व्यर्थ के विवाद से बचने की आवश्यकता है अन्यथा बात कोर्ट तक पहुँच सकती है |

कर्क : आपके लिए पंचमेश और दशमेश का गोचर वक्री चाल से आपके भाग्य स्थान में हो रहा है जहाँ से आपके बारहवें भाव, तीसरे भाव तथा चतुर्थ भावों पर इसकी दृष्टियाँ रहेंगी | आपके तथा आपकी सन्तान के लिए यह गोचर अत्यन्त भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | एक ओर जहाँ आपके कार्य में प्रगति तथा आय में वृद्धि के संकेत हैं वहीं दूसरी ओर आपकी सन्तान की ओर से भी कोई शुभ समाचार आपको प्राप्त हो सकता है | परिवार में किसी नए सदस्य का आगमन भी हो सकता है अथवा आपकी सन्तान का विवाह सम्बन्ध कहीं हो सकता है | कार्य से सम्बन्धित विदेश यात्राओं के भी योग प्रतीत होते हैं | किसी पैतृक सम्पत्ति का लाभ भी इस अवधि में हो सकता है | पिता तथा परिवार के अन्य सदस्यों के साथ मतभेद न हो इसके लिए अपने स्वभाव पर नियन्त्रण रखने की आवश्यकता है |

सिंह : आपका चतुर्थेश और नवमेश होकर मंगल वक्री चाल से आपके अष्टम भाव में गोचर करने जा रहा है जहाँ से इसकी दृष्टियाँ आपके लाभ स्थान, धन स्थान तथा तीसरे भावों पर रहेंगी | सर्वप्रथम तो स्वास्थ्य की ओर ध्यान देने की आवश्यकता है | इस अवधि में किसी प्रकार की सर्जरी की सम्भावना से भी इन्कार नहीं किया जा सकता | साथ ही अपने खान पान के सम्बन्ध में भी सावधान रहने की आवश्यकता है | सम्भव है आपको अपने कार्य में किसी प्रकार के व्यवधान अथवा देरी का अनुभव हो, किन्तु घबराने की आवश्यकता नहीं है | अचानक ही किसी ऐसे स्रोत से आर्थिक लाभ की सम्भावना है जहाँ की आपने कल्पना भी नहीं की होगी | अविवाहित हैं तो जीवन साथी की तलाश भी इस अवधि में पूर्ण हो सकती है | अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखे | धार्मिक तथा आध्यात्मिक गतिविधियों में रूचि इस अवधि में बढ़ सकती है |

कन्या : आपका तृतीयेश और अष्टमेश होकर वक्री चाल से मंगल का गोचर आपके सप्तम भाव में हो रहा है जहाँ से उसकी दृष्टियाँ आपके दशम भाव, लग्न तथा द्वितीय भावों पर रहेंगी | आपके छोटे भाई बहनों के कारण आपके जीवन साथी के साथ सम्बन्धों में किसी प्रकार के तनाव की सम्भावना है | किन्तु कार्य की दृष्टि से तथा आर्थिक दृष्टि से यह गोचर अत्यन्त अनुकूल प्रतीत होता है | अचानक ही आपको किसी घनिष्ठ मित्र के माध्यम से नवीन प्रोजेक्ट्स प्राप्त हो सकते हैं जिनके कारण आप बहुत समय तक व्यस्त रहते हुए अर्थ लाभ कर सकते हैं | नवीन नौकरी मिलने के संकेत मिल रहे है, जिसके कारण कार्य का भार भी बढ़ सकता है | पदोन्नति की भी सम्भावना की जा सकती है | किन्तु अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखने की भी आवश्यकता है | वैवाहिक जीवन में जीवनसाथी का भरपूर सहयोग प्राप्त होने के संकेत हैं | किसी से भी वाद-विवाद न करे अन्यथा किसी समस्या में फँस सकते हैं | विशेष रूप से कार्य स्थल पर अपने क्रोध पर नियन्त्रण रखने की आवश्यकता है |

तुला : आपका द्वितीयेश और सप्तमेश होकर वक्री मंगल का गोचर आपके छठे भाव में हो रहा है जहाँ से आपके भाग्य स्थान, बारहवें भाव तथा लग्न पर इसकी दृष्टियाँ रहेंगी | कार्य के सिलसिले में विदेश यात्राएँ करनी पड़ सकती हैं किन्तु इन यात्राओं में आपको स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं का सामना भी करना पड़ सकता है | किन्तु यदि कोई कोर्ट केस चल रहा है तो उसका परिणाम आपके पक्ष में आ सकता है | प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में लगे लोगों के लिए तथा स्पोर्ट्स से जुड़े लोगों के लिए यह गोचर अनुकूल परिणाम देने वाला प्रतीत होता है | आर्थिक स्थिति में सुधार तो होगा लेकिन यदि बजट बनाकर नहीं चलेंगे तो व्यय भी अधिक होने की सम्भावना है | विशेष रूप से स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं पर अधिक पैसा खर्च हो सकता है | यदि थोड़ी सी भी स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्या हो तुरन्त डॉक्टर के पास जाएँ | कोई पारिवारिक विवाद बहुत अधिक भयानक रूप ले सकता है, अतः इस ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है | विदेश घूमने जाना चाहते हैं तो आपकी ये इच्छा पूर्ण हो सकती है, लेकिन इन यात्राओं में स्वास्थ्य तथा चोरी आदि के प्रति सावधान रहने की आवश्यकता होगी |

वृश्चिक : आपका लग्नेश और षष्ठेश होकर वक्री मंगल आपके पंचम भाव में गोचर कर रहा है और वहाँ से आपके अष्टम भाव, एकादश भाव और बारहवें भावों पर इसकी दृष्टि रहेगी | आपके लिए उत्साह में वृद्धि के संकेत प्रतीत होते हैं | किन्तु ध्यान रहे आवश्यकता से अधिक उत्साह का प्रदर्शन कभी कभी घातक भी हो सकता है | कार्य की दृष्टि से तथा आर्थिक दृष्टि से यह गोचर आपके लिए अनुकूल प्रतीत होता है | आपकी सन्तान के लिए भी यह गोचर लाभदायक प्रतीत होता है | यदि आपकी सन्तान विवाह योग्य है तो उसके विवाह की भी सम्भावना इस अवधि में की जा सकती है | अपने तथा अपनी सन्तान के स्वास्थ्य की ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है | यदि आपका किसी से प्रेम सम्बन्ध चल रहा है तो उसमें दरार आ सकती है | साथ ही ग़लत लोगों की संगति से भी बचने का प्रयास करना होगा | अनुचित रीति से धनोपार्जन का लालच न करें अन्यथा उसके दुष्परिणाम भी आपको भोगने पड़ सकते हैं |

धनु : आपकी राशि के लिए पंचमेश तथा द्वादशेश होकर मंगल का गोचर आपके चतुर्थ भाव में हो रहा है तथा वहाँ से यह आपके सप्तम भाव, दशम भाव और एकादश भावों को दृष्टि प्रदान करेगा | परिवार में अकारण ही तनाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है | कार्यस्थल पर भी सहकर्मियों के विरोध का सामना करना पड़ सकता है | अच्छा यही रहेगा कि जहाँ आपका वश न चले वहाँ आप अपनी वाणी तथा विचारों पर संयम रखें | साथ ही किसी भी प्रकार के मनमुटाव अथवा मतभेद को समझदारी से सुलझा लेंगे तो सम्बन्धों में दरार से बचा जा सकता है | यों कार्य में प्रगति तथा आर्थिक स्थिति में दृढ़ता के संकेत भी हैं | धनलाभ के अनेकों अवसर इस अवधि में आपको उपलब्ध हो सकते हैं | सोच समझकर आगे बढ़ेंगे तो बहुत समय तक धनोपार्जन करते हुए व्यस्त रह सकते हैं | नौकरी में हैं तो पदोन्नति के साथ ही किसी ऐसे स्थान पर आपका ट्रांसफर भी हो सकता है जहाँ आप पहले से जाना चाहते थे | परिवार के साथ कहीं देशाटन का कार्यक्रम भी बना सकते हैं | आपकी रूचि रहस्य विद्याओं जैसे ज्योतिष आदि में हो सकती है | समाज में मान सम्मान और प्रतिष्ठा भी प्राप्त हो सकती है |

मकर : आपके चतुर्थेश और एकादशेश मंगल का गोचर वक्री चाल से आपके तृतीय भाव में हो रहा है | यहाँ से आपके छठे भाव, नवम भाव तथा दशम भावों पर रहेंगी | यह गोचर उत्साहवर्द्धक तथा कार्य की दृष्टि से भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | आपको अपने छोटे भाई बहनों तथा सन्तान का सहयोग प्राप्त होता रहने की सम्भावना है | परिवार में सौहार्द का वातावरण बना रहने की सम्भावना है | स्वयं का व्यवसाय तो उसमें लाभ की सम्भावना है | नौकरी में हैं तो पदोन्नति के साथ अर्थलाभ की भी सम्भावना है | अधिकारीगणों तथा घनिष्ठ मित्रों का सहयोग निरन्तर प्राप्त रहेगा | प्रॉपर्टी के व्यवसाय में लाभ की सम्भावना है | धार्मिक गतिविधियों में रूचि में वृद्धि हो सकती है | पॉलिटिक्स में जो लोग हैं उनके लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | आप अपने शत्रुओं को पराजित करने में सक्षम होंगे तथा आपकी प्रतिष्ठा में भी वृद्धि की सम्भावना इस अवधि में की जा सकती है | भाई बहनों से थोड़ी अनबन हो सकती है, किन्तु अपनी सूझ बूझ से आप उस अनबन को स्वतः ही दूर कर सकते हैं |

कुम्भ : आपके लिए आपका तृतीयेश और दशमेश का वक्री होकर आपकी राशि से द्वितीय भाव में गोचर हो रहा है जहाँ से आपके पञ्चम, अष्टम तथा नवम भावों पर इसकी दृष्टियाँ रहेंगी | आपके लिए गोचर अत्यन्त भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है - विशेष रूप से यदि आप हाथ के कारीगर है, लेखक या कलाकार हैं | नौकरी में पदोन्नति तथा मान सम्मान में वृद्धि के संकेत प्रतीत होते हैं | पॉलिटिक्स में हैं तो वहाँ भी किसी उच्च पद के प्राप्ति की सम्भावना है | अपना स्वयं का व्यवसाय है तो उसमें उन्नति तथा आर्थिक लाभ की सम्भावना भी की जा सकती है | आपकी रूचि धार्मिक गतिविधियों में भी बढ़ सकती है | किन्तु साथ ही स्वास्थ्य का ध्यान रखने की भी आवश्यकता है | किसी के साथ अनावश्यक वाद विवाद आपके लिए समस्या उत्पन्न कर सकता है अतः अपने Temperament को नियन्त्रित रखने की आवश्यकता है | आँखों से सम्बन्धित भी कोई समस्या हो सकती है | अपने जीवन साथी के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है |

मीन : आपके लिए तो आपका द्वितीयेश और भाग्येश वक्र होकर आपकी लग्न में ही गोचर कर रहा है जहाँ से इसकी दृष्टि आपके चतुर्थ भाव, सप्तम भाव तथा अष्टम भावों पर रहेगी | आर्थिक तथा कार्य की दृष्टि से यह गोचर अत्यन्त भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | विशेष रूप से यदि आप लेखक हैं, बुद्धिजीवी हैं अथवा किसी आधिकारिक पद पर आसीन हैं तो आपके लिए यह गोचर अत्यन्त अनुकूल प्रतीत होता है | आपके लेखन की प्रशंसा होगी तथा उसके लिए आपको पुरूस्कार आदि भी प्राप्त हो सकता है | नौकरी की तलाश में हैं तो आशानुकूल नौकरी इस अवधि में प्राप्त हो सकती है | परिवार में सौहार्द का वातावरण बना रह सकता है | किसी नवीन सदस्य का आगमन भी परिवार में हो सकता है | अविवाहित हैं तो जीवन साथी की तलाश भी इस अवधि में पूर्ण हो सकती है | किन्तु इस अवधि में आपके क्रोध में वृद्धि हो सकती है जिसके कारण आपके कार्यों में व्यवधान भी उत्पन्न हो सकता है | अतः इस ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है | यदि कोई चोट लग जाए तो उसके इलाज़ में लापरवाही न करें | सरकारी क्षेत्र में काम करने वाले लोगों को लाभ की सम्भावना की जा सकती है | दाम्पत्य जीवन में किसी प्रकार के क्लेश से बचने के लिए अपने स्वभाव को नियन्त्रित रखें | स्वास्थ्य के लिए योग ध्यान का अभ्यास करना आपके हित में रहेगा |

अन्त में, किसी एक ही ग्रह के गोचर के आधार पर स्पष्ट फलादेश नहीं किया जा सकता | उसके लिए योग्य ज्योतिषी द्वारा व्यक्ति की कुण्डली का विविध सूत्रों के आधार पर व्यापक अध्ययन आवश्यक है |

तथापि, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं | सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें यही कामना है...

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