हनुमान चालीसा !! तात्विक अनुशीलन !! भाग ४०

04 अक्तूबर 2020   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (423 बार पढ़ा जा चुका है)

हनुमान चालीसा !! तात्विक अनुशीलन !! भाग ४०

🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥


‼️ *भगवत्कृपा हि केवलम्* ‼️


🟣 *श्री हनुमान चालीसा* 🟣

*!! तात्त्विक अनुशीलन !!*


🩸 *चालीसवाँ - भाग* 🩸


🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️


*गतांक से आगे :--*


➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖


*उनतालीसवें भाग* में आपने पढ़ा :



*युग सहस्त्र योजन पर भानु !*

*लील्यो ताहि मधुर फल जानू !!*

-**************************


के अन्तर्गत :--


*लील्यो ताहि मधुर फल जानू*

*-------------------------*


अब आगे :--


*प्रभु मुद्रिका मेलि मुख मांहीं !*

*जलधि लांघि गये अचरज नाहीं !!*

*दुर्गम काज जगत के जेते !*

*सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते !!*

*---------------------------*


*प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माही !*

*जलधि लांघि गए अचरज नाही !!*

*---------------------------------*



भगवान की *मुद्रिका* मुख में रखकर समुद्र को लांघ गए तो यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है | यद्यपि सौ योजन के समुद्र को कूदकर पार कर जाना सामान्य बात नहीं बल्कि आश्चर्य का विषय है किंतु अगर ऊपर के भावों को देखा जाय जहां सूर्य को निगल जाने की बात कहीं गई है तो उसको पढ़ लेने के बाद समुद्र को लाँघ जाना कोई आश्चर्य का विषय नहीं रह जाता है | *प्रभु की मुद्रिका* है अर्थात *मुद्रिका* भी प्रभु ही है क्योंकि भगवान के आवरण भी लौकिक नहीं होते हैं | भगवान के मुकुट , कुंडल , धनुष आदि सभी वस्तुएं भी भगवान के अतिरिक्त किसी अन्य तत्व की नहीं होती हैं सब कुछ विवर्त्त मात्र है व वास्तव में निरावरण ब्रह्म ही है | *मुद्रिका* भी भगवान की है था वह भी प्रभु ही है | इससे *प्रभु मुद्रिका* कहा | *प्रभु मुद्रिका* अर्थात प्रभु जी साथ में है | लीला अवतार में भगवान ने साकेत तो छोड़ा परंतु शेष विग्रह यथास्थिति हनुमान जी के साथ है | भगवान का मनन चिंतन चार स्वरूपों ( नाम रूप लीला धाम ) में किया जाता है जिसमें से नाम *मुख* से लिया जाता है | कहा भी गया है कि :- *मुख में हो राम नाम* और *मुद्रिका* पर प्रभु राम का नाम अंकित है जैसा कि तुलसीदास जी बताते हैं :--

*तब देखी मुद्रिका मनोहर !*

*राम नाम अंकित अति सुंदर !!*


तो जब *मुद्रिका* पर भगवान का नाम अंकित है और नाम का स्थान मुख में होता है तो आखिर वह मुद्रिका *हनुमान जी* और कहां रखते ? इसीलिए राम नाम को मुख में धारण कर लिया रूप का ध्यान करते हुए समुद्र को लांघना प्रारंभ कर दिया |


*मुद्रिका मुख में रखने के लिए कुछ अन्य भाव भी प्रस्तुत है | यथा :--*


*👉 गोपनीयता की रक्षा के लिए मुख में मुद्रिका को रख लिया |*

*👉 गोपनीयता की रक्षा के लिए यही (मुख) स्थान सबसे उपयुक्त है |*

*👉 मुद्रिका में भगवान का नाम अंकित था इसीलिए उसको मुख में रखा |*

*👉 हाथ में रखने से हाथ रुक जाता अतः उड़ने में सुविधा ना होती इसीलिए मुद्रिका को मुंह में रखकर चल पड़े |*

मुख में *मुद्रिका* रखने का यह भाव भी हो सकता है कि जब तक भगवान का कार्य नहीं होता है तब तक ना कुछ खाना है , ना जल पीना है , ना भाषण देना है क्योंकि *हनुमान जी* ने घोषणा कर दी थी कि *राम काज कि नहीं बिना मोहि कहां विश्राम* इसलिए यदि *हनुमान जी* भगवान राम के नाम से उल्लेखित मुद्रिका को मुख में रखकर समुद्र को लांघने में कोई अचरज नहीं होना चाहिए |


➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖


*दुर्गम काज जगत के जेते !*

*सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते !!*

*--------------------------*


*हे हनुमान जी* संसार के जितने भी कार्य दुर्गम है उतना ही तुम्हारा अनुग्रह सुगम है | क्योंकि हे *हनुमान जी* आप स्वयं आशुतोष अवढरदानी है भोले तो इतने हैं कि भक्त कुछ भी मांग लेता है तो पा जाता है , कृपालु इतने हैं कि शीघ्र ही अनुग्रह कर देते हैं | संसार के जितने कार्य दुर्गम हैं उतने ही सुगम अर्थात दुर्गम आपकी अनुग्रह प्राप्ति है | संसार के जितने कठिन , कठिनतर व कठिनतम कार्य होते हैं आपके अनुग्रह से उतने - उतने कमश: सुगम अर्थात सरल , सरलतर व सरलतम होते जाते हैं | जितने भी दुर्गम कार्य हैं वह सभी आपकी कृपा से सुगम हो जाते हैं | आपकी कृपा अनुग्रह के बाद कोई भी कार्य कठिन नहीं रह जाता है |


*शेष अगले भाग में :---*



🌻🌷🌻🌷🌻🌷🌻🌷🌻🌷🌻


आचार्य अर्जुन तिवारी

पुराण प्रवक्ता/यज्ञकर्म विशेषज्ञ

संरक्षक

संकटमोचन हनुमानमंदिर

बड़ागाँव श्रीअयोध्या जी

9935328830


⚜️🚩⚜️🚩⚜️🚩⚜️🚩⚜️🚩⚜️

अगला लेख: हनुमान चालीसा !! तात्विक अनुशीलन !! भाग १७



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
23 सितम्बर 2020
🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥 ‼️ *भगवत्कृपा हि केवलम्* ‼️ 🟣 *श्री हनुमान चालीसा* 🟣 *!! तात्त्विक अनुशीलन !!* 🩸 *सातवाँ - भाग* 🩸🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️*गतांक से आगे :--*➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖*छठवें भाग* में आपने पढ़ा :---*"बुद
23 सितम्बर 2020
23 सितम्बर 2020
🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥 ‼️ *भगवत्कृपा हि केवलम्* ‼️ 🟣 *श्री हनुमान चालीसा* 🟣 *!! तात्त्विक अनुशीलन !!* 🩸 *सातवाँ - भाग* 🩸🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️*गतांक से आगे :--*➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖*छठवें भाग* में आपने पढ़ा :---*"बुद
23 सितम्बर 2020
23 सितम्बर 2020
🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥 ‼️ *भगवत्कृपा हि केवलम्* ‼️ 🟣 *श्री हनुमान चालीसा* 🟣 *!! तात्त्विक अनुशीलन !!* 🩸 *पन्द्रहवाँ - भाग* 🩸🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️*गतांक से आगे :--*➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖*चौदहवें भाग* में आपने पढ़ा :--*जय हनुमान ज्ञान गुण सागर*अब आगे
23 सितम्बर 2020
21 सितम्बर 2020
*सृष्टि में परमात्मा अनेक जीवों की रचना की है , छोटे से छोटे एवं बड़े से बड़े जीवो की रचना करके परमात्मा ने इस सुंदर सृष्टि को सजाया है | परमात्मा की कोई रचना व्यर्थ नहीं की जा सकती है | कभी कभी मनुष्य को यह लगता है कि परमात्मा ने आखिर इतने जीवों की रचना क्यों की | इस सृष्टि में जितने भी जीव हैं अप
21 सितम्बर 2020
23 सितम्बर 2020
🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥 ‼️ *भगवत्कृपा हि केवलम्* ‼️ 🟣 *श्री हनुमान चालीसा* 🟣 *!! तात्त्विक अनुशीलन !!* 🩸 *सोलहवाँ - भाग* 🩸🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️*गतांक से आगे :--*➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖*पन्द्रहवें भाग* में आपने पढ़ा :--*जय कपीश तिहुँ लोक उजागर*अब आगे :
23 सितम्बर 2020
23 सितम्बर 2020
🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥 ‼️ *भगवत्कृपा हि केवलम्* ‼️ 🟣 *श्री हनुमान चालीसा* 🟣 *!! तात्त्विक अनुशीलन !!* 🩸 *सत्रहवाँ - भाग* 🩸🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️*गतांक से आगे :--*➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖*सोलहवें भाग* में आपने पढ़ा :--*राम दूत*अब आगे:---*अतुलित बल धामा
23 सितम्बर 2020
23 सितम्बर 2020
🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥 ‼️ *भगवत्कृपा हि केवलम्* ‼️ 🟣 *श्री हनुमान चालीसा* 🟣 *!! तात्त्विक अनुशीलन !!* 🩸 *ग्यारहवाँ - भाग* 🩸🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️*गतांक से आगे :--*➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖*दसवें भाग* में आपने पढ़ा :--*"हरहुँ कलेश विकार"* के अन्तर्गत *हर
23 सितम्बर 2020
29 सितम्बर 2020
🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥 ‼️ *भगवत्कृपा हि केवलम्* ‼️ 🟣 *श्री हनुमान चालीसा* 🟣 *!! तात्त्विक अनुशीलन !!* 🩸 *चौबीसवाँ - भाग* 🩸🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️*गतांक से आगे :--*➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖*तेईसवें भाग* में आपने पढ़ा :*हाथ वज्र औ ध्वजा विराजेे**काँधे मूँज
29 सितम्बर 2020
25 सितम्बर 2020
*ब्रह्मा जी के द्वारा बनाई गई इस सृष्टि में मानव मात्र के लिए सब कुछ सुलभ है | अपने कर्मों के अनुसार मनुष्य दुर्लभ से दुर्लभ वस्तु को भी सुलभ कर सकता है | इस संसार में दुर्लभ क्या है ? जो मनुष्य प्राप्त करने का प्रयास करने के बाद भी नहीं प्राप्त कर पाता है | इसके विषय में
25 सितम्बर 2020
23 सितम्बर 2020
🌺🌲🌺🌲🌺🌲🌺🌲🌺🌲🌺 ‼️ *भगवत्कृपा हि केवलम्* ‼️ 🐍🏹 *लक्ष्मण* 🏹🐍 🌹 *विश्राम - भाग* 🌹🩸🍏🩸🍏🩸🍏🩸🍏🩸🍏🩸*➖➖➖ गतांक से आगे ➖➖➖*जब भगवान श्रीराम ने दुर्वासा जी को विदा किया उसके बाद उनको अपनी प्रतिज्ञा का स्मरण हुआ | प्रिय भाई *लक्ष्मण* का वियोग सोचकर
23 सितम्बर 2020
23 सितम्बर 2020
🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥 ‼️ *भगवत्कृपा हि केवलम्* ‼️ 🟣 *श्री हनुमान चालीसा* 🟣 *!! तात्त्विक अनुशीलन !!* 🩸 *बारहवाँ - भाग* 🩸🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️*गतांक से आगे :--*➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖*ग्यारहवें भाग* में आपने पढ़ा :--*"हरहुँ कलेश विकार"* के अन्तर्गत *
23 सितम्बर 2020
23 सितम्बर 2020
🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥 ‼️ *भगवत्कृपा हि केवलम्* ‼️ 🟣 *श्री हनुमान चालीसा* 🟣 *!! तात्त्विक अनुशीलन !!* 🩸 *आठवाँ - भाग* 🩸🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️*गतांक से आगे :--*➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖*सातवें भाग* में आपने पढ़ा :--*"सुमिरौं पवन कुमार"*अब आगे:----*"बल ब
23 सितम्बर 2020
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x