हनुमान चालीसा !! तात्विक अनुशीलन !! भाग ४३

04 अक्तूबर 2020   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (425 बार पढ़ा जा चुका है)

हनुमान चालीसा !! तात्विक अनुशीलन !! भाग ४३

🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳


‼️ *भगवत्कृपा हि केवलम्* ‼️


🟣 *श्री हनुमान चालीसा* 🟣

*!! तात्त्विक अनुशीलन !!*


🩸 *तिरालीसवाँ - भाग* 🩸


🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧


*गतांक से आगे :--*


➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖


*बयालीसवें भाग* में आपने पढ़ा :--



*सब सुख लहै तुम्हारी सरना !*

*तुम रक्षक काहू को डरना !!*

*---------------------------*


अब आगे :---


*आपन तेज सम्हारो आपै !*

*तीनोंं लोक हांक ते काँपै !!*

*------------------------*


*तेज* शब्द का अर्थ प्रकाश , द्युति , चमक , ओज , पराक्रम , आध्यात्मिक शक्ति का प्रकाश , वे तेजस पदार्थ जो दीप्ति में परिवर्तित होकर लयलहो जाते हैं यथा ही तेल , घी आदि कहा गया है | संक्षेप में इन सब का अभिप्राय प्रकाश स्वरूप शक्ति या तत्संबंधित पदार्थों का अाशय रहता है | त्वचा का ओज भी उसी चमक व स्निग्धता का स्वरुप है | *श्री हनुमान जी* में सभी प्रकार के *तेज* अतिशय रूप में रहते हैं ऊर्ध्वरेता है अतः ओज , ब्रह्मचारी एवं पवन पुत्र हैं | साक्षात् अग्नि स्वरूप तथा अतुलित बल साक्षात शिव हैं अत: आध्यात्मिक शक्ति का प्रकाश इनमें निवास करता है | इनके *तेज* को अन्य कोई क्या सहन कर सकता है अतः अपने *तेज* को स्वयं ही संभाल सकते हैं | भास्कर को भी आप जब निगल सकते हैं जिसका *तेज* ही तीनों लोगों में अन्य कोई सहन नहीं कर सकता तो आपके *तेज* को कौन सहन कर सकता है ? अतः कहा गया *आपन तेज सम्हारो आपै* सर्वात्मा का स्वरूप होने के कारण अन्य कोई भी *हनुमान जी* के *तेज* को कैसे सहन कर सकता है ? *सम्हारो आपै* से अभिप्राय है कि आपने अपने आप इस प्रकाश *तेज* को संभाल रखा है अन्यथा यह विश्व सूर्य को भी निगल जाने वाले *तेज* को कैसे सहन कर सकता था ! *संभालने* का भाव है कि जहां तहां बिखेरते नहीं है , जब चाहे जहां चाहे जितना चाहे या उपयुक्त हो उतना ही प्रकाश करते हैं | सिर्फ अपने में समेटे रहते हैं | *श्री रामचरितमानस* के समुद्रोल्लंघन प्रसंग में कहां तो समुद्र को लांघ कर पार कर जाने की बात थी व कहां जामवंत के जगाते ही आपने पूछ लिया :-

*सहित सहाय रावनहिं मारी !*

*आनहुँ इहाँ त्रिकूट उपारी !*


अर्थात हे जामवंत जी ! क्या मैं त्रिकूट पर्वत उखाड़ कर के यहां ले आऊँ या रावण को उसके सहायकों सहित मार डालूँ ? यह *हनुमान जी* का कोई आवेश या आवेग नहीं था बल्कि सहज संयमित प्रश्न था कि *उचित सिखावन दीजहुँ मोही-* इसका अभिप्राय यह है कि अपने *तेज* (बल पराक्रम शक्ति) को आप ही संभालते हो अन्यथा थोड़ा सा बल ऐश्वर्य प्राप्त होते ही व्यक्ति मदमस्त होकर पागल हो जाता है | यथा :- *जस थोरेहुँ धन खल इतराई* रावण को थोड़ा सा बल मिला तो हालत यह हो गई कि :-

*रन मद मतित फिरहि जग धावा !*

*प्रतिभट खोजत कतहुँ न पावा !!*


परंतु अतुलित बल एवं *तेज* के धाम होने के बाद भी *हनुमान जी* ने अपने बल का मिथ्या प्रदर्शन न करके उसको संभाले रखा है | इसीलिए *तुलसीदास जी महाराज* ने *हनुमान जी* के बल पराक्रम को देखते हुए *आपन तेज सम्हारो आपै* लिखना ही उचित समझा |


➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖


*तीनो लोक*

*----------*


*तीनो लोक* से अभिप्राय है स्वर्ग पृथ्वी एवं पाताल यद्यपि सात अधलोक एवं सात ऊर्ध्वलोक की गणना भी की गई है | सभी स्थितियों में भूलोक को मध्य में माना गया गणना में | गणना में ऊर्ध्वलोकों का प्रथम सोपान है | भू: भुव:स्व: आदि | *तीनों लोकों* की गणना जब की जाती है तो पृथ्वी आकाश पाताल अर्थात ऊपर नीचे व मध्य में सब का समाहार हो जाता है इसलिए *तीनो लोक* लिखा |


➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖


*हांक ते काँपै*

*------------*


तीनों ही लोक आप की *हुंकार* से कांप पर जाते हैं , भयभीत होते हैं | *हुंकार* का क्या मतलब हुआ इस पर भी विचार कर लिया जाय | *हुंकार* मुंह बंद करके गले से जो ध्वनि नासिका रन्ध्र से वायु के नि:सारण से की जाती है उसे कहते हैं | इसमें आवाज प्राण वायु की दबी हुई होती है | गला व मुंह खोलकर ललकार की जाती है परंतु *हुंकार* बंद मुंह से की जाती है | जब *हुंकार* से तीनों लोक कांप जाते हैं तो ललकार को कौन सह सकता है | *हनुमान जी* की हुंकार शास्त्र प्रसिद्ध है | महाभारत के युद्ध में भी भीम की सहायता उसके साथ *हुंकार* करके की थी | जब भीम पर शत्रुओं का जमाव होता तो भीम *हनुमान जी* का स्मरण कर के युद्ध में शत्रुओं को ललकारते थे तो उसकी ध्वनि के साथ ही *हनुमान जी* थोड़ा *हुंकार* भर देते थे बस शत्रुओं के कलेजे थर्रा जाते थे एवं सभी भाग खड़े होते थे | *तीनों लोक* में कोई व्यक्ति या दल नहीं जो इनकी *हुंकार* से दहल न जाते हों | एक साथ *तीनों लोकों* को अपनी भयंकर *हुंकार* से कपा देने वाली शक्ति *हनुमान जी* के अतिरिक्त और कोई नहीं हो सकता | इसीलिए *तुलसीदास जी महाराज* ने *तीनों लोक हांक ते कांपै* का भाव लिखा |


*शेष अगले भाग में :---*



🌻🌷🌻🌷🌻🌷🌻🌷🌻🌷🌻🌷


आचार्य अर्जुन तिवारी

पुराण प्रवक्ता/यज्ञकर्म विशेषज्ञ

संरक्षक

संकटमोचन हनुमानमंदिर

बड़ागाँव श्रीअयोध्या जी

9935328830


⚜️🚩⚜️🚩⚜️🚩⚜️🚩⚜️🚩⚜️🚩

अगला लेख: हनुमान चालीसा !! तात्विक अनुशीलन !! भाग १७



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
23 सितम्बर 2020
🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥 ‼️ *भगवत्कृपा हि केवलम्* ‼️ 🟣 *श्री हनुमान चालीसा* 🟣 *!! तात्त्विक अनुशीलन !!* 🩸 *सातवाँ - भाग* 🩸🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️*गतांक से आगे :--*➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖*छठवें भाग* में आपने पढ़ा :---*"बुद
23 सितम्बर 2020
29 सितम्बर 2020
🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥 ‼️ *भगवत्कृपा हि केवलम्* ‼️ 🟣 *श्री हनुमान चालीसा* 🟣 *!! तात्त्विक अनुशीलन !!* 🩸 *बीसवाँ - भाग* 🩸🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️*गतांक से आगे :--*➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖*उन्नीसवें भाग* में आपने पढ़ा :*महाव
29 सितम्बर 2020
29 सितम्बर 2020
🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥 ‼️ *भगवत्कृपा हि केवलम्* ‼️ 🟣 *श्री हनुमान चालीसा* 🟣 *!! तात्त्विक अनुशीलन !!* 🩸 *उन्नीसवाँ - भाग* 🩸🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️*गतांक से आगे :--*➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖*अठारहवें भाग* में आपने पढ़ा :*महावीर विक्रम बजरंगी* के अंतर्गत *
29 सितम्बर 2020
29 सितम्बर 2020
🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥 ‼️ *भगवत्कृपा हि केवलम्* ‼️ 🟣 *श्री हनुमान चालीसा* 🟣 *!! तात्त्विक अनुशीलन !!* 🩸 *तेइसवाँ - भाग* 🩸🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️*गतांक से आगे :--*➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖*बाईसवें भाग* में आपने पढ़ा :*कानन कुंडल कुंचित केशा*अब आगे:--*हाथ
29 सितम्बर 2020
25 सितम्बर 2020
*ब्रह्मा जी के द्वारा बनाई गई इस सृष्टि में मानव मात्र के लिए सब कुछ सुलभ है | अपने कर्मों के अनुसार मनुष्य दुर्लभ से दुर्लभ वस्तु को भी सुलभ कर सकता है | इस संसार में दुर्लभ क्या है ? जो मनुष्य प्राप्त करने का प्रयास करने के बाद भी नहीं प्राप्त कर पाता है | इसके विषय में
25 सितम्बर 2020
23 सितम्बर 2020
🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥 ‼️ *भगवत्कृपा हि केवलम्* ‼️ 🟣 *श्री हनुमान चालीसा* 🟣 *!! तात्त्विक अनुशीलन !!* 🩸 *सोलहवाँ - भाग* 🩸🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️*गतांक से आगे :--*➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖*पन्द्रहवें भाग* में आपने पढ़ा :--*जय कपीश तिहुँ लोक उजागर*अब आगे :
23 सितम्बर 2020
29 सितम्बर 2020
🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥 ‼️ *भगवत्कृपा हि केवलम्* ‼️ 🟣 *श्री हनुमान चालीसा* 🟣 *!! तात्त्विक अनुशीलन !!* 🩸 *चौबीसवाँ - भाग* 🩸🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️*गतांक से आगे :--*➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖*तेईसवें भाग* में आपने पढ़ा :*हाथ वज्र औ ध्वजा विराजेे**काँधे मूँज
29 सितम्बर 2020
23 सितम्बर 2020
🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥 ‼️ *भगवत्कृपा हि केवलम्* ‼️ 🟣 *श्री हनुमान चालीसा* 🟣 *!! तात्त्विक अनुशीलन !!* 🩸 *चौदहवाँ - भाग* 🩸🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️*गतांक से आगे :--*➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖*तेरहवें भाग* में आपने पढ़ा :--*जय हनुमान*अब आगे:---*ज्ञान गुन सागर
23 सितम्बर 2020
21 सितम्बर 2020
*सृष्टि में परमात्मा अनेक जीवों की रचना की है , छोटे से छोटे एवं बड़े से बड़े जीवो की रचना करके परमात्मा ने इस सुंदर सृष्टि को सजाया है | परमात्मा की कोई रचना व्यर्थ नहीं की जा सकती है | कभी कभी मनुष्य को यह लगता है कि परमात्मा ने आखिर इतने जीवों की रचना क्यों की | इस सृष्टि में जितने भी जीव हैं अप
21 सितम्बर 2020
23 सितम्बर 2020
🌺🌲🌺🌲🌺🌲🌺🌲🌺🌲🌺 ‼️ *भगवत्कृपा हि केवलम्* ‼️ 🐍🏹 *लक्ष्मण* 🏹🐍 🌹 *विश्राम - भाग* 🌹🩸🍏🩸🍏🩸🍏🩸🍏🩸🍏🩸*➖➖➖ गतांक से आगे ➖➖➖*जब भगवान श्रीराम ने दुर्वासा जी को विदा किया उसके बाद उनको अपनी प्रतिज्ञा का स्मरण हुआ | प्रिय भाई *लक्ष्मण* का वियोग सोचकर
23 सितम्बर 2020
22 सितम्बर 2020
*इस सकल सृष्टि में समय निरंतर गतिशील है , समय का चक्र कभी नहीं रुकता है | हमारे विद्वानों ने समय को तीन भागों में विभाजित किया है | जो बीत गया वह "भूतकाल" , जो चल रहा है वह "वर्तमान काल" एवं जो आने वाला है उसे भविष्य काल कहा गया है | मनुष्य को सदैव अपने वर्तमान पर ध्यान देना चाहिए | प्रायः कुछ लोग
22 सितम्बर 2020
23 सितम्बर 2020
🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥 ‼️ *भगवत्कृपा हि केवलम्* ‼️ 🟣 *श्री हनुमान चालीसा* 🟣 *!! तात्त्विक अनुशीलन !!* 🩸 *ग्यारहवाँ - भाग* 🩸🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️*गतांक से आगे :--*➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖*दसवें भाग* में आपने पढ़ा :--*"हरहुँ कलेश विकार"* के अन्तर्गत *हर
23 सितम्बर 2020
23 सितम्बर 2020
🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥 ‼️ *भगवत्कृपा हि केवलम्* ‼️ 🟣 *श्री हनुमान चालीसा* 🟣 *!! तात्त्विक अनुशीलन !!* 🩸 *पन्द्रहवाँ - भाग* 🩸🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️*गतांक से आगे :--*➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖*चौदहवें भाग* में आपने पढ़ा :--*जय हनुमान ज्ञान गुण सागर*अब आगे
23 सितम्बर 2020
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x