अर्जुन के तीर

31 अक्तूबर 2020   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (413 बार पढ़ा जा चुका है)

अर्जुन के तीर

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‼ *भगवत्कृपा हि केवलम्* ‼


🏹 *अर्जुन के तीर* 🏹


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*भगवान की शरण में जाने के लिए मनुष्य को अपना समस्त कामना , वासना एवं अहंकार का त्याग करना पड़ता है ! जब तक यह दुर्गुण मनुष्य के भीतर विद्यमान हैं तब तक वह कारुण्य भाव एवं दास्य भाव को स्वीकार ही नहीं कर सकता | आज कुछ लोग भगवान की शरण में जाने की बात तो करते हैं परंतु उनकी कामना , पारिवारिक मोह , वासना तथा अहंकार उन्हें इस मार्ग पर चलने ही नहीं देता है ! भगवान का ही सबकुछ है ऐसा बताने वाले भौतिक वस्तुओं की तो बात ही छोड़ दो अपने मन को भी भगवान की शरण में नहीं रख पाते हैं | यदि शरणागति प्राप्त करनी है तो सर्वप्रथम अपने मन को भगवान की शरण में लगाया जाना चाहिए |*


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*शुभम् करोति कल्याणम्*


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