कर्क, सिंह और कन्या राशि के लिए गुरु का मकर में गोचर

18 नवम्बर 2020   |  कात्यायनी डॉ पूर्णिमा शर्मा   (540 बार पढ़ा जा चुका है)

कर्क,  सिंह और कन्या राशि के लिए गुरु का मकर में गोचर

कर्क, सिंह और कन्या राशियों के लिए गुरु का मकर में गोचर

सोमवार 29 मार्च 2020, चैत्र शुक्ल षष्ठी को 27:55 (अर्द्धरात्र्योत्तर तीन बजकर पचपन मिनट) के लगभग आयुष्मान योग और कौलव करण में गुरुदेव का गोचर मकर राशि में हुआ था | लेकिन 14 मई 2020 को रात्रि 7:47 के लगभग वक्री होते हुए गुरु तीस जून 2020 को सूर्योदय से पूर्व पाँच इक्कीस के लगभग वापस अपनी राशि धनु में पहुँच गए थे | तेरह सितम्बर 2020 को प्रातः 6:35 के लगभग धनु राशि में ही मार्गी होना आरम्भ किया था और अब 20 नवम्बर 2020 को दिन में 13:24 के लगभग पुनः मकर राशि में आ जाएगा | इस समय गुरुदेव उत्तराषाढ़ नक्षत्र पर होंगे | जहाँ से सात जनवरी 2021 से श्रवण नक्षत्र पर तथा पाँच मार्च 2021 से धनिष्ठा नक्षत्र पर भ्रमण करते हुए अन्त में 5/6 अप्रैल 2021 को अर्द्धरात्रि में 00:25 के लगभग शनि की दूसरी राशि कुम्भ में प्रविष्ट हो जाएँगे | ग्यारह जनवरी 2021 से 12 फरवरी 2021 तक गुरुदेव अस्त भी रहेंगे | गुरुदेव के लिए मकर राशि नीच राशि है और गुरु तथा शनि के परस्पर सम्बन्धों की बात करें तो न तो दोनों में मित्रता है न ही शत्रुता – दोनों परस्पर सम ग्रह हैं | गुरु की राशि धनु से मकर राशि द्वितीय भाव तथा मीन से एकादश भाव बनती है | जबकि मकर राशि के लिए गुरु तृतीयेश और द्वादशेश बन जाता है | मकर राशि से नीच के गुरु की दृष्टियाँ वृषभ, कर्क तथा कन्या राशियों पर रहेंगी | अतः इन राशियों के जातकों को विशेष रूप से सावधान रहने की आवश्यकता होगी | कर्क गुरु की उच्च राशि भी है | इन्हीं समस्त तथ्यों को ध्यान में रखते हुए जानने का प्रयास करते हैं कि उपरोक्त तीनों राशियों के लिए गुरुदेव के मकर राशि में गोचर के क्या सम्भावित परिणाम हो सकते हैं...

किन्तु ध्यान रहे, किसी एक ही ग्रह के गोचर के आधार पर स्पष्ट फलादेश करना अनुचित होगा | उसके लिए योग्य Astrologer द्वारा व्यक्ति की कुण्डली का विविध सूत्रों के आधार पर व्यापक अध्ययन आवश्यक है | साथ ही, कोरोना का आतंक अभी समाप्त नहीं हुआ है | ऐसे में यह समय है परिवार के साथ परस्पर घुल मिलकर बैठने का तथा सावधानी बरतने का और कोरोना से बचाव के सम्बन्ध में सरकार द्वारा दिए गए दिशानिर्देशों का पालन करने का |

कर्क राशि से षष्ठेश और भाग्येश होकर सप्तम भाव में गुरु का गोचर हो रहा है जहाँ से आपके लाभ स्थान, स्वयं आपकी लग्न तथा तीसरे भाव पर इसकी दृष्टियाँ हैं | आपके लिए यह गोचर मिश्रित फल देने वाला प्रतीत होता है | अच्छे और प्रभावशाली व्यक्तियों के साथ आपके सम्पर्क बन सकते हैं | यदि आपने समझदारी से काम लिया तो इन सम्बन्धों के माध्यम से आपको अपने कार्य में सहायता प्राप्त हो सकती है | आपकी प्रतियोगी क्षमता में भी वृद्धि की सम्भावना है जिसके कारण यदि आप नई नौकरी के लिए प्रयत्नशील हैं तो उसमें भी सफलता प्राप्त होने की सम्भावना है | सम्भव है बीच बीच में कुछ समस्याओं का भी सामना करना पड़ जाए, विशेष रूप से तीस जून से तेरह सितम्बर तक, किन्तु अपनी निर्णायक क्षमता के बल पर आप उन समस्याओं का समाधान सरलता से कर सकेंगे | सम्भव है आप इस अवधि में कहीं पैसा Invest भी कर दें, जिसका आपको भविष्य में लाभ हो सकता है | आप किसी नौकरी में हैं तो आपकी पदोन्नति के भी अवसर प्रतीत होते हैं |

मित्रों का सहयोग और साथ भी इस अवधि में आपको उपलब्ध रह सकता है और आप उनके साथ आमोद प्रमोद में भी समय व्यतीत कर सकते हैं | आपकी रूचि इस अवधि में धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों की ओर भी बढ़ सकती है | आपके भाई बहनों के लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है,, किन्तु उनके साथ आपका मतभेद भी सम्भव है अतः इस ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है |

यदि आप अविवाहित हैं तो वर्षान्त तक आपकी जीवन साथी की खोज भी पूर्ण हो सकती है | विवाहित हैं तो जीवन साथी के साथ सम्बन्ध सौहार्दपूर्ण बने रह सकते हैं | किन्तु यदि आपने अपना Temprament सही नहीं रखा तो किसी बात पर विवाद भी हो सकता है | जीवन साथी के साथ किसी तीर्थ स्थान की यात्रा के लिए अथवा घूमने के लिए भी जा सकते हैं |

स्वास्थ्य का जहाँ तक प्रश्न है तो एक ओर आपको किसी पुरानी बीमारी से मुक्ति प्राप्त हो सकती है तो वहीं दूसरी ओर पेट से सम्बन्धित कोई नवीन समस्या भी उत्पन्न हो सकती है | अपने खान पान पर यदि संयम रखेंगे तो बहुत सी समस्याओं से बचे रह सकते हैं | जीवन साथी के स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी आवश्यक है |

सिंह राशि से पंचमेश और अष्टमेश होकर गुरु का गोचर आपकी राशि से छठे भाव में हो रहा है जहाँ से आपके दशम भाव, बारहवें भाव पर तथा दूसरे भाव पर इसकी दृष्टियाँ आ रही हैं | ये गोचर आपके लिए मिश्रित फल देने वाला प्रतीत होता है | कार्य की दृष्टि से यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | यदि आप किसी नौकरी में हैं तो आपका कहीं ट्रांसफर भी सम्भव है | किन्तु हो सकता है जिस स्थान पर आपका ट्रांसफर हो वह स्थान आपके लिए स्वास्थ्य की दृष्टि से अनुकूल न रहे | साथ ही, यदि आप नौकरी बदलना चाहते हैं तो उसके लिए यह समय अनुकूल नहीं जान पड़ता | यदि आपका अपना व्यवसाय है तो व्यवसाय से सम्बन्धित यात्राओं में वृद्धि भी हो सकती है | किन्तु इन यात्राओं पर पैसा भी अधिक खर्च हो सकता है | परिवार में कोई शुभ कार्य सम्पन्न हो सकता है उसमें भी आवश्यकता से अधिक धन का व्यय हो सकता है | साथ ही कार्य स्थल में विरोधियों की ओर से भी सावधान रहने की आवश्यकता है | परिवार में वातावरण सौहार्दपूर्ण रहने की सम्भावना है | यदि आप नया वाहन, नया घर अथवा ऑफिस खरीदना चाहते हैं तो जुलाई से अक्तूबर तक का समय इस कार्य के लिए अनुकूल प्रतीत होता है | इस अवधि में आप घर बनाना भी आरम्भ कर सकते हैं और सम्भावना ऐसी भी है कि इसी अवधि में आप उस घर में प्रविष्ट भी हो सकते हैं |

आपकी वाणी अत्यन्त प्रभावशाली है, जिसका लाभ आपको अपने कार्य में प्राप्त हो सकता है, किन्तु कार्य स्थल पर विरोधियों की ओर से सावधान रहने की आवश्यकता होगी | विद्यार्थियों तथा प्रतियोगी परीक्षा के छात्रों के लिए यह गोचर भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | पॉलिटिक्स से यदि आपका सम्बन्ध है तो आपको कोई नया पद भी प्राप्त हो सकता है, किन्तु उसके साथ ही कार्यभार में भी वृद्धि की सम्भावना है | धार्मिक गतिविधियों में भी वृद्धि की सम्भावना है | आपकी सन्तान के लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है किन्तु सन्तान के साथ व्यर्थ का विवाद आपके हित में नहीं रहेगा |

यदि अविवाहित हैं तो आपके कार्यक्षेत्र में ही आपको कोई व्यक्ति Propose कर सकता है, किन्तु विवाह में अभी समय लग सकता है | विवाहित हैं तो दाम्पत्य जीवन में माधुर्य बना रहने की भी सम्भावना है |

स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है - विशेष रूप से यात्राओं के दौरान | स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं पर अधिक धन खर्च करना पड़ सकता है | किसी प्रकार का मानसिक तनाव भी इस अवधि में सम्भव है | अतः ध्यान और प्राणायाम को अपनी दिनचर्या का आवश्यक अंग बना लेना आपके हित में रहेगा |

कन्या राशि के लिए गुरु चतुर्थेश और सप्तमेश होकर योगकारक हो जाता है | और इस समय गुरु का गोचर कन्या राशि से पञ्चम भाव में हो रहा है तथा वहाँ से आपके भाग्य स्थान, लाभ स्थान तथा आपकी लग्न पर इसकी दृष्टियाँ हैं | आर्थिक दृष्टि से कार्य के लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | आपका कार्य यदि रुका हुआ है तो पुनः उन्नति की ओर अग्रसर हो सकता है | यदि आप किसी नौकरी में हैं तो प्रमोशन के साथ आपका ट्रांसफर भी हो सकता है | पार्टनरशिप में कोई कार्य कर रहे हैं तो उसमें उन्नति के अवसर हैं | कोई नया कार्य भी पार्टनरशिप में आरम्भ कर सकते हैं जो आपके लिए लाभदायक भी सिद्ध हो सकता है | साथ ही यदि आपकी कम्यूनिकेशन स्किल्स भी इस अवधि में बहुत अच्छी हो सकती हैं | आप अपने कार्य से सम्बन्धित कोई Advance Course भी इस अवधि में कर सकते हैं |

सामाजिक गतिविधियों में वृद्धि की सम्भावना है | इन Social Get-Togethers में आपके नए सम्बन्ध स्थापित हो सकते हैं और आपके मान सम्मान तथा प्रतिष्ठा में वृद्धि के भी संकेत हैं | इनके कारण आपको अपने कार्य में भी लाभ प्राप्त हो सकता है | छोटे भाई बहनों तथा आस पड़ोस के लोगों के साथ सम्बन्धों में मधुरता बनी रह सकती है और उनसे आपको अपने कार्य में सहयोग भी प्राप्त हो सकता है | परिवार में किसी प्रकार का कोई मंगल कार्य भी इस अवधि में सम्पन्न हो सकता है – जैसे किसी का विवाह आदि – और आप उनकी तैयारियों में भी व्यस्त हो सकते हैं | परिवार में अतिथियों के आवागमन में वृद्धि के साथ ही घर का वातावरण भी सौहार्दपूर्ण बने रहने की सम्भावना है | आपकी सन्तान के लिए यह समय अनुकूल प्रतीत होता है, किन्तु उसके साथ अकारण बहस करने से बचें – ध्यान रहे आपकी सन्तान जो भी करेगी सोच विचार कर ही करेगी |

यदि अविवाहित हैं तो जीवन साथी की तलाश इस अवधि में पूर्ण हो सकती है | विवाहित हैं तो दाम्पत्य जीवन में माधुर्य तथा अन्तरंगता की सम्भावना की जा सकती है | आपको अपने कार्य में अपने जीवन साथी का सहयोग भी इस अवधि में निरन्तर प्राप्त होता रहने की सम्भावना है |

स्वास्थ्य की दृष्टि से समय अनुकूल प्रतीत होता है | किन्तु इसे अनुकूल बनाए रखने के लिए योग, ध्यान और प्राणायाम आदि को अपनी दिनचर्या का आवश्यक अंग बना लेंगे तो और भी उत्तम रह सकता है |

किन्तु ध्यान रहे, ये परिणाम सामान्य हैं | किसी कुण्डली के विस्तृत फलादेश के लिए केवल एक ही ग्रह के गोचर को नहीं देखा जाता अपितु किसी योग्य Astrologer द्वारा उस कुण्डली का विभिन्न सूत्रों के आधार पर विस्तृत अध्ययन आवश्यक है | साथ ही, ग्रहों के गोचर अपने निश्चित समय पर होते ही रहते हैं, सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | हम सभी कर्मशील रहते हुए आगे बढ़ते रहें और कोरोना जैसे भयंकर रोग पर समस्त विश्व को विजय प्राप्त हो, यही कामना है...

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