तुला, वृश्चिक और धनु राशि के जातकों के लिए गुरु का मकर में गोचर

19 नवम्बर 2020   |  कात्यायनी डॉ पूर्णिमा शर्मा   (528 बार पढ़ा जा चुका है)

तुला, वृश्चिक और धनु राशि के जातकों के लिए गुरु का मकर में गोचर

तुला, वृश्चिक और धनु राशि के जातकों के लिए गुरु का मकर में गोचर

सोमवार 29 मार्च 2020, चैत्र शुक्ल षष्ठी को 27:55 (अर्द्धरात्र्योत्तर तीन बजकर पचपन मिनट) के लगभग आयुष्मान योग और कौलव करण में गुरुदेव का गोचर मकर राशि में हुआ था | लेकिन 14 मई 2020 को रात्रि 7:47 के लगभग वक्री होते हुए गुरु तीस जून 2020 को सूर्योदय से पूर्व पाँच इक्कीस के लगभग वापस अपनी राशि धनु में पहुँच गए थे | तेरह सितम्बर 2020 को प्रातः 6:35 के लगभग धनु राशि में ही मार्गी होना आरम्भ किया था और अब 20 नवम्बर 2020 को दिन में 13:24 के लगभग पुनः मकर राशि में आ जाएगा | इस समय गुरुदेव उत्तराषाढ़ नक्षत्र पर होंगे | जहाँ से सात जनवरी 2021 से श्रवण नक्षत्र पर तथा पाँच मार्च 2021 से धनिष्ठा नक्षत्र पर भ्रमण करते हुए अन्त में 5/6 अप्रैल 2021 को अर्द्धरात्रि में 00:25 के लगभग शनि की दूसरी राशि कुम्भ में प्रविष्ट हो जाएँगे | ग्यारह जनवरी 2021 से 12 फरवरी 2021 तक गुरुदेव अस्त भी रहेंगे | गुरुदेव के लिए मकर राशि नीच राशि है और गुरु तथा शनि के परस्पर सम्बन्धों की बात करें तो न तो दोनों में मित्रता है न ही शत्रुता – दोनों परस्पर सम ग्रह हैं | गुरु की राशि धनु से मकर राशि द्वितीय भाव तथा मीन से एकादश भाव बनती है | जबकि मकर राशि के लिए गुरु तृतीयेश और द्वादशेश बन जाता है | मकर राशि से नीच के गुरु की दृष्टियाँ वृषभ, कर्क तथा कन्या राशियों पर रहेंगी | अतः इन राशियों के जातकों को विशेष रूप से सावधान रहने की आवश्यकता होगी | कर्क गुरु की उच्च राशि भी है | इन्हीं समस्त तथ्यों को ध्यान में रखते हुए जानने का प्रयास करते हैं कि उपरोक्त तीनों राशियों के लिए गुरुदेव के मकर राशि में गोचर के क्या सम्भावित परिणाम हो सकते हैं... साथ ही, कोरोना का आतंक अभी समाप्त नहीं हुआ है | ऐसे में यह समय है परिवार के साथ परस्पर घुल मिलकर बैठने का तथा सावधानी बरतने का और कोरोना से बचाव के सम्बन्ध में सरकार द्वारा दिए गए दिशानिर्देशों का पालन करने का |

तुला राशि के जातकों के लिए गुरु उनका तृतीयेश और षष्ठेश होकर उनके चतुर्थ भाव में गोचर कर रहा है | जहाँ से गुरु की दृष्टियाँ आपके अष्टम भाव पर, दशम भाव तथा बारहवें भावों पर रहेंगी | आर्थिक दृष्टि से तथा कार्य की भी दृष्टि से यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | यदि कहीं आपकी पेमेण्ट रुकी हुई है अथवा किसी को उधार दिया हुआ है तो वह इस अवधि में वापस मिलने की सम्भावना है | नौकरी की तलाश में हैं तो वह भी इस अवधि में पूर्ण हो सकती है | किन्तु जल्दबाज़ी में निर्णय लेना उचित नहीं रहेगा | किसी कोर्ट केस के माध्यम से भी आर्थिक लाभ की सम्भावना की जा सकती है | आपकी प्रतियोगी और निर्णायक क्षमताओं में वृद्धि के कारण आपके उत्साह में भी वृद्धि की सम्भावना की जा सकती है | आप अपने कार्य के सम्बन्ध में कोई भी चेलेंज इस अवधि में स्वीकार कर सकते हैं | विरोधी अपना सर उठा सकते हैं, किन्तु अपने बुद्धिबल से आप किसी भी विरोध को समाप्त करने में सक्षम हो सकते हैं | आपकी वक्तव्यता इस अवधि में प्रभावपूर्ण रहने की सम्भावना है जिसके कारण आपकी बात का दूसरों पर प्रभाव पड़ेगा | मान सम्मान में वृद्धि के भी संकेत हैं | धार्मिक गतिविधियों में वृद्धि की भी सम्भावना है |

किसी प्रकार के उत्तरदायित्व में इस अवधि में वृद्धि हो सकती है | सम्भव है बीच बीच में आपको ऐसा भी लगे कि किसी कारणवश आपके कार्य में कुछ बाधा उत्पन्न हो रही है | किन्तु उसके लिए चिन्ता करने की आवश्यकता नहीं है | थोड़े से प्रयास से ही सारी बाधाएँ समाप्त हो सकती हैं | कार्यक्षेत्र में वातावरण सौहार्दपूर्ण बना रहने की सम्भावना है | आपके सहयोगी तथा आपके अधीनस्थ लोग आपके प्रस्तावों को स्वीकार करके उन्हें क्रियान्वित भी करने के प्रयास कर सकते हैं | यदि आप किसी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं तो उसमें अनुकूल परिणाम प्राप्त हो सकता है | सन्तान के लिए यह गोचर अधिक अनुकूल नहीं प्रतीत होता |

अविवाहित हैं तो कहीं प्रेम सम्बन्ध भी बन सकता है | किन्तु उसे विवाह में परिणत करने से पूर्व उस व्यक्ति के विषय में पूरी जानकारी अवश्य ले लें तथा परिवार के लोगों के साथ भी विचार विमर्श कर लें | विवाहित हैं तो दाम्पत्य जीवन में माधुर्य बना रहने की सम्भावना है | आप इस अवधि में वंश वृद्धि के लिए भी प्रयास कर सकते हैं |

अपने स्वयं के तथा अपने पिता के स्वास्थ्य की ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है | अपने खान पर ध्यान रखें अन्यथा पेट से सम्बन्धित कोई समस्या लम्बे समय तक परेशान कर सकती है | साथ ही इस अवधि में कहीं से ऋण लेने से भी बचने की आवश्यकता है |

वृश्चिक राशि के लिए द्वितीयेश और पंचमेश होकर गुरु का गोचर आपकी राशि से तीसरे भाव में हो रहा है, जहाँ से उसकी दृष्टियाँ आपके सप्तम, नवम तथा एकादश भावों पर आ रही हैं | आर्थिक तथा कार्य की दृष्टि से यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | आपके कार्य में उन्नति के संकेत हैं | आर्थिक स्थिति में भी दृढ़ता के संकेत हैं | यदि पूर्व में आपको कुछ समस्याओं का सामना करना भी पड़ा है तो कोई बात नहीं, अब परिस्थितियाँ आपके अनुकूल होती प्रतीत होती हैं | आपकी आय में वृद्धि के संकेत हैं | किन्तु यदि आप किसी नौकरी में हैं तो अधिकारियों के साथ बहस आपके हित में नहीं रहेगी | परिवार में तथा कार्यक्षेत्र में वातावरण अनुकूल रहने की सम्भावना है | आपकी वक्तव्यता इस अवधि में बहुत उत्तम रहेगी जिसका लाभ भी आपको प्राप्त होगा | किन्तु किसी से कोई ऐसा वादा मत कीजिए जिसे आप पूर्ण न कर सकते हों | परिवार में किसी शिशु के जन्म की सम्भावना है |

लेखन के द्वारा भी आपको यश और धन प्राप्त होने की सम्भावना है | इसके अतिरिक्त प्रॉपर्टी से सम्बन्धित व्यवसाय जिन लोगों का है अथवा जो लोग ज्योतिष आदि विद्याओं के जानकार हैं अथवा जिनका व्यवसाय किसी प्रकार से वाहन आदि से सम्बन्ध रखता है तो उनके लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | आपकी रूचि इस समय धर्म और अध्यात्म की ओर भी प्रवृत्त हो सकती है | आपकी सन्तान के लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | पॉलिटिक्स से जिन लोगों का सम्बन्ध है उनके लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | आपकी सन्तान का विवाह भी इस गोचर के मध्य सम्भव है |

आप स्वयं यदि अविवाहित हैं तो आपका विवाह भी इस अवधि में हो सकता है | यदि किसी के साथ Romantically Involve हैं तो वह सम्बन्ध भी विवाह में परिणत हो सकता है | विवाहित हैं तो दाम्पत्य जीवन में माधुर्य बना रहने की सम्भावना है |

स्वास्थ्य का जहाँ तक प्रश्न है, तो लीवर अथवा पेट से सम्बन्धित कोई समस्या इस अवधि में हो सकती है | अनियन्त्रित खान पान के कारण मोटापा भी बढ़ने की सम्भावना है | अपने खान पर ध्यान रखेंगे और व्यायाम को अपनी दिनचर्या का आवश्यक अंग बना लेंगे तो बहुत सी समस्याओं से बचे रह सकते हैं |

धनु राशि के जातकों के लिए राश्यधिपति और चतुर्थेश होकर गुरु योगकारक बन जाता है और इस समय आपकी राशि से दूसरे भाव में गोचर करने जा रहा है जहाँ से इनकी दृष्टियाँ आपके छठे भाव, अष्टम भाव तथा कर्म स्थान को प्रभावित कर रही हैं | आपके लिए कार्य की दृष्टि से तथा आर्थिक दृष्टि से यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | आप जो भी कार्य करेंगे उसमें आपको लाभ होगा | किन्तु यदि नौकरी बदलना चाहते हैं तो उसके लिए यह गोचर अनुकूल नहीं प्रतीत होता | आपकी वाणी इस समय अत्यन्त प्रभावशाली रहेगी, उसका लाभ उठाना आप पर निर्भर करता है | किन्तु किसी के लिए कुछ ऐसा न बोलें जिसके लिए आपको बाद में पछताना पड़े | साथ ही पैसे के लेन देन में सावधानी रखने की आवश्यकता है | परिवार में व्यर्थ के तनाव भी हो सकते हैं | किन्तु यदि आपने धैर्य और संयम से कम लिया तो किसी भी तनाव अथवा विवाद को सुलझाने में स्वयं ही सफल भी हो सकते हैं |

लेखकों, वक्ताओं, मीडियाकर्मियों के लिए यह गोचर अनुकूल फल देने वाला प्रतीत होता है | कोई शोध कार्य यदि रुका हुआ है तो वह भी इस अवधि में सम्पन्न हो सकता है | पॉलिटिक्स से सम्बद्ध लोगों के लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है, किन्तु विरोधियों की ओर से सावधान रहने की आवश्यकता होगी | आपकी सन्तान की ओर से कोई शुभ समाचार इस अवधि में प्राप्त हो सकता है | आप नया घर भी खरीद सकते हैं अथवा वर्तमान निवास को ही रेनोवेट करा सकते हैं |

अविवाहित हैं तो इस अवधि में आपका विवाह भी सम्भव है | विवाहित हैं तो दाम्पत्य जीवन में माधुर्य बना रहने को सम्भावना है |

स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं का समाधान इस अवधि में सम्भव है, किन्तु इसके लिए आपको अपने खान पान पर नियन्त्रण तथा योग, ध्यान और प्राणायाम को अपने दैनिक जीवन का अंग बना लेना आवश्यक होगा |

किन्तु ध्यान रहे, ये परिणाम सामान्य हैं | किसी कुण्डली के विस्तृत फलादेश के लिए केवल एक ही ग्रह के गोचर को नहीं देखा जाता अपितु किसी योग्य Astrologer द्वारा उस कुण्डली का विभिन्न सूत्रों के आधार पर विस्तृत अध्ययन आवश्यक है | साथ ही, ग्रहों के गोचर अपने निश्चित समय पर होते ही रहते हैं, सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | हम सभी कर्मशील रहते हुए आगे बढ़ते रहें और कोरोना जैसे भयंकर रोग पर समस्त विश्व को विजय प्राप्त हो, यही कामना है...

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