वर्तमान को सुधारें :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

26 नवम्बर 2020   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (487 बार पढ़ा जा चुका है)

वर्तमान को सुधारें :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*यह सृष्टि निरंतर गतिशील है , आज जो समय है कल वह भूत बन जाता है | काल गणना की सुविधा की दृष्टि से समय को तीन भागों में बांटा गया है जिसे भूतकाल वर्तमान काल एवं भविष्य काल कहा गया है | ध्यान देने वाली बात है भूत एवं भविष्य दोनों के लिए एक ही शब्द का प्रयोग किया जाता है जिसे कहा जाता है "कल" | अंतर सिर्फ इतना है कि एक आने वाला कल कहा जाता है तो दूसरा बीता हुआ कल कहा जाता है जबकि दोनों का मूल तत्व एक ही है | मनुष्य को सदैव वर्तमान में जीना चाहिए क्योंकि वर्तमान समय अनमोल है , वर्तमान समय ही यथार्थ है , वर्तमान समय ही कर्म का आधार है , वर्तमान समय ही एकमात्र हमारे साथ हैं क्योंकि यही भविष्य का जन्मदाता है और जो भूतकाल के कारण उपस्थित है इसीलिए वर्तमान समय का बहुत महत्व है | जो भी मनुष्य वर्तमान में रहता है , वर्तमान के क्षणों के महत्व को समझता है वह इसकी अमूल्यता का अनुभव कर लेता है | कुछ लोगों प्राय: यह कहा करते हैं पहले ऐसा होता था | पहले क्या होता था इस पर ध्यान ना दे कर इस समय क्या हो रहा है यह ध्यान देना आवश्यक है | क्योंकि इन तीनों कालों में वर्तमान काल ही मुख्य है , क्योंकि वर्तमान ही भूत एवं भविष्य का जन्मदाता है | जो समय बीत गया है अर्थात बीता हुआ कल भी कभी वर्तमान था और जो आने वाला है वह भी वर्तमान गुजरने के बाद ही एक दिन भूत बन जाएगा , अर्थात वर्तमान ही अतीत अर्थात भूतकाल एवं भविष्य की विभाजन रेखा है जिसके एक तरफ भूतकाल है दूसरी और भविष्य काल | एक-एक क्षण जो व्यतीत हो रहा है वह भूतकाल होता चला जा रहा है | विचार कीजिए हम भूतकाल के इतने निकट होते हुए भी उसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकते क्योंकि वह समय हमारे हाथों से निकल चुका है | उस भूतकाल के लिए हम तभी कुछ कर सकते थे जब वर्तमान हमारे हाथों में था | वर्तमान काल में जो हम संचय करते हैं वही भूतकाल अर्थात इतिहास बन जाता है और भविष्य के लिए वह स्रोत बन जाता है , इसलिए प्रत्येक मनुष्य को यह प्रयास करना चाहिए की वर्तमान का प्रत्येक पल सुखद बने क्योंकि प्रत्येक व्यतीत होता हुआ पल तत्काल भूतकाल में परिवर्तित होता रहता है जिसे हम अपनी स्मृति कहते हैं | वह हमारा भूतकाल है जो हमारे मस्तिष्क में अंकित जो कि भविष्य में हमें याद आता रहता है | भूतकाल एवं भविष्य काल की अपेक्षा वर्तमान में सुखद कर्म करते हुए मनुष्य को जीवन यापन करना चाहिए क्योंकि यदि वर्तमान सुंदर होगा तो आपका भूतकाल भी सुंदर होगा और सुंदर भविष्य का निर्माण भी होगा |*



*आज मनुष्य की व्यस्तता बढ़ गई है | प्रत्येक मनुष्य सुंदर भविष्य बनाने की योजना में व्यस्त दिखाई पड़ता है | भविष्य तभी सुंदर हो सकता है जब वर्तमान को सुंदर किया जाएगा इसलिए मनोवांछित भविष्य के लिए प्रत्येक मनुष्य को वर्तमान पर लगातार हस्तक्षेप करते रहना चाहिए जिससे कि मनचाहा भविष्य निर्मित हो सके | आज लोग भविष्य तो सुंदर चाहते हैं परंतु वर्तमान पर उतना ध्यान नहीं दे पाते | मैं "आचार्य अर्जुन तिवारी" देख रहा हूं कि आज प्रत्येक मनुष्य अपनी संतान के भविष्य को लेकर चिंतित रहते हुए अनेकानेक उपाय करता है कि हमारी संतान का भविष्य सुंदर हो जाय | ऐसे सभी लोगों को मैं बता देना चाहता हूं की जिनकी संतानों के वर्तमान में माता-पिता ने उनको परिश्रम करना सिखा दिया उनका भविष्य स्वयं चमकदार एवं प्रकाशित बन जाता है ` जैसा की विदित है कि मनुष्य का अधिकार सिर्फ कर्म करने पर है उसका फल क्या मिलेगा यह कोई नहीं जानता | विचार कीजिए कि कर्म ना तो भूतकाल में किए जा सकते हैं ना तो भविष्य काल में कर्म तो वर्तमान काल में ही किया जाएगा इसीलिए वर्तमान काल में मनुष्य को ऐसे कर्म करना चाहिए जिससे कि उनका भूतकाल और भविष्य काल दोनों ही स्वर्णिम हो जाय | परंतु आज दुर्भाग्यवश कुछ लोग वर्तमान में जीते हुए अपने भूतकाल की यादों में खो जाते हैं या फिर भविष्य की कल्पना मैं अपने वर्तमान को व्यर्थ में गवा देते हैं | वर्तमान समय का सदुपयोग ना हो पाने से मनुष्य का भविष्य अंधकार में हो जाता है | यदि मनुष्य भूतकाल की यादों और भविष्य काल की कल्पनाओं में अधिक समय ना गंवा करके वर्तमान समय पर ध्यान दें तो निश्चित रूप से वर्तमान ही इच्छित भविष्य की ओर ले जाने में सहायक की भूमिका निभा सकता है |*


*मनुष्य के हाथ में सिर्फ वर्तमान ही है इसलिए वर्तमान को अधिक से अधिक सुंदर बनाने का कार्य करना चाहिए ` वर्तमान में अंकित की गई ऊर्जा ही मनुष्य को सुंदर भविष्य के निर्माण में सहयोग करती है |*

अगला लेख: हनुमान चालीसा !(तात्विक अनुशीलन) भाग ५७



अजय वर्मा
26 नवम्बर 2020

बहुत सुन्दर संदेश
जय जय सियाराम

जय सियाराम

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