इंसान और पत्थर की सूरत

16 दिसम्बर 2020   |  जानू नागर   (8 बार पढ़ा जा चुका है)

इंसान और पत्थर की सूरत

आज मन किया पत्थर की सूरत मे फूल चढ़ा दू। फूलो की क्यारी में गया वहाँ पर कई तरह के फूल थे उन फूलों को देख कर सोच मे पड़ गया की कौन सा फूल चढ़ाऊ? सिर्फ फूल वाले या फल वाले कुछ फूलों के नाम याद हैं। सरसो का फूल, मटर का फूल, सेम का फूल, तरोई का फूल, फिर मन मे ख्याल आया की अगर यह फूल तोड़ लिया तो इनके फल मरजाएंगे जो फल हमे सेवा भाव से मिल जाते हैं। अब मन और ही सवालो के घेरे मे फस गया बिना फल वाले फूल मूरत मे चढ़ाया तो फल तो वैसे भी नहीं मिलने वाला हैं। सभी फूलों को नजर भर देख कर, वापस बाहर आया और मन को समझाया अब मै मूरत से क्या कहूँ? पत्थर की मूरत से पूछा कि आपके लिए फूल बने ही नहीं हैं।

अगला लेख: अन्नदाताओं का मसला है।



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