मनुष्य को उपहार

02 फरवरी 2021   |  chander prabha sood   (7 बार पढ़ा जा चुका है)

मनुष्य को उपहार

आश्चर्य की बात है कि बहुत-से ऐसे गुण हैं, जो ईश्वर की ओर से हमें उपहार स्वरूप अर्थात् नि:शुल्क मिलते हैं जिनके विषय में हम जानकर भी अनजान बने रहना चाहते हैं। इस संसार में रहने वाले हम मनुष्य ऐसे कृतघ्न हैं, जो सदा उनकी अवहेलना करते हैं, उन्हें अपने जीवन में उतारना ही नहीं चाहते। यदि उन्हें अपना लिया जाए, तो मानव जीवन का नक्शा ही बदल सकता है।
          मनुष्य को सबसे बड़ा अनमोल उपहार बुद्धि के रूप में मिला है। यह बुद्धि उसे इस संसार के अन्य सभी जीवों से अलग बनाती है। यह बुद्धि उसकी सबसे बड़ी अपनी सम्पत्ति होती है। अपनी बुद्धि का सदुपयोग करके वह सर्वांगीण विकास कर सकता है।
          यदि मनुष्य बुद्धि का सकारात्मक प्रयोग करता है, तो वह संसार में अपना एक स्थान बनाता है। मानुषी बुद्धि शेर जैसे खूँखार और हाथी जैसे शक्तिशाली जीवों को अपने वश में कर लेता है। मनुष्य विभिन्न पशुओं के उपयोग से अपने अनेक कार्य करवा लेता है जिससे उसका जीवन सरलता से चल सके।
          ऐसे ही लोग चमत्कार करके सबको आश्चर्यचकित कर  देते हैं। सभी लोग अपने दाँतों तले अँगुली दबा लेते हैं। संसार में हुए वैज्ञानिक अविष्कार इसी बुद्धि की उपज हैं। महान लोग अपनी सुबुद्धि के कारण ही समाज का नेतृत्व करते हैं और उसे दशा व दिशा प्रदान करते हैं। वह युग-युगान्तर तक याद किया जाता है।
        इसके विपरीत बुद्धि का दुरूपयोग प्रयोग विनाश का कारण बनता है। यदि बुद्धि को नकारात्मक रास्ते पर चलाया जाए, तो मनुष्य कुमार्गगामी बनता है। उसे समाज में सम्मान नहीं मिलता। हर कोई उसे तिरस्कृत करता है। समाज भी उसे अलग-थलग करने से नहीं चूकता। न्याय व्यवस्था उसके कुकृत्यों के लिए उसे कुफल यानी सजा देती है।
        मनुष्य का सुरक्षा कवच उसका दूसरों के प्रति विश्वास है। परस्पर विश्वास करके ही वह सुखी रह सकता है। हाँ, सावधान रहना बहुत ही आवश्यक है। किसी पर अन्धविश्वास नहीं करना चाहिए क्योंकि दूसरा व्यक्ति कभी भी विश्वासघात कर सकता है।
          दुनिया विश्वास पर ही चलती हैं। करोड़ों का व्यापार इसी विश्वास के भरोसे किया जाता है। यदि मनुष्य हर किसी पर सन्देह करने लगेगा तो पागल हो जाएगा। तब फिर किसी से भी व्यवहार ही नहीं कर पाएगा। इस तरह से वह समाज से कटकर रह जाएगा, जिससे उसका जीना दुश्वार हो जाएगा।      
          मनुष्य की निश्छल हँसी ही उसकी सबसे बढ़िया औषधि है, जो अनेक रोगों की दवा है। सामने वाला कितना भी दुखी क्यों न हो उसका स्वागत यदि निश्छल हँसी से किया जाए, तो वह कुछ समय के लिए अपनी परेशानियों को भूल जाता है। वह तरोताजा महसूस करने लगता है।
        मनुष्य का सबसे अच्छा शस्त्र उसका धैर्य है। इसकी बदौलत वह सबके हृदयों में अपना स्थान बना लेता है। ऐसे धैर्यशाली व्यक्ति अपने धैर्य से किसी को भी अपना प्रिय बना लेते हैं। ये लोग धैर्य से दूसरे की परेशानी सुनकर उन्हें सद्परामर्श देते हैं। स्वयं भी विपत्ति में घबराते नहीं है।
        ये हर परिस्थिति में एक समान रहते हैं। कैसी भी दुख-परेशानी जीवन में आ जाए अपना आपा नहीं खोते। किसी भी समस्या का समाधान धैर्य धारण करके सूझबूझ द्वारा किया जा सकता है। अफरा-तफरी मचाकर या घबराकर कोई हल नहीं निकलता बल्कि समस्याएँ और उलझ जाती हैं।
          मनुष्य यदि इन सद् गुणों को अपने जीवन में आत्मसात कर सके तो उसे जीवन निर्वाह करने में सरलता हो सकती है। अपने मार्ग में आने वाली अड़चनों को वह काफी हद तक दूर कर सकता है। इसलिए यथासम्भव अपना हित साधने के लिए इन गुणो को जीवन में ढाल लेना चाहिए।
चन्द्र प्रभा सूद

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