जन्म-मृत्यु के दो पाटों में जीवन

09 फरवरी 2021   |  chander prabha sood   (386 बार पढ़ा जा चुका है)

जन्म-मृत्यु के दो पाटों में जीवन

यह संसार चक्की के दो पाटों की भाँति निरन्तर चलायमान है। इसका एक पाट जन्म है और दूसरा पाट मृत्यु है। इस जन्म और मृत्यु के दोनों पाटों में जीव आजन्म पिसता रहता है। इस क्षणभंगुर संसार में जन्म और मृत्यु के दो पाटों में पिसते हुए मनुष्य का विनाश निश्चित है। अतः इस असार संसार से विरक्ति होना स्वाभाविक ही है।
सन्त कबीरदास ने इसे अपने शब्दों में इस प्रकार पिरोया है-
चलती चक्की देखकर दिया कबीरा रोय।
दो पाटन के बीच में साबुत बचा न कोय।।
अर्थात् चक्की को चलते हुए देखका कबीर रो पड़े हैं। इसके दो पाटों में अनाज का कोई दाना साबुत नहीं बच सका।
ये दो पाट द्वन्द्व हैं यानी सुख-दुःख, लाभ-हानि, जय-पराजय, यश-अपयश, अपना-पराया, दिन-रात आदि। इनसे जो जीत गया, वह समझो बच सकता है। वही परम ज्ञान को प्राप्त कर सकता है। भगवान श्रीकृष्ण ने गीता में इसे साक्षी भाव कहा है।
कबीरदास को उदास देखकर उनके पुत्र कमाल ने यह दोहा लिखा-
चलती चक्की देखकर, दिया कमाल ठठाय।
कीले से जो लग रहा, सोई रहा बचाय।।
अर्थात् चक्की को चलता हुआ देखकर कमाल ठहाका लगा रहे है। इस चक्की में केवल वही अनाज बच सकता है, जो चक्की के मध्य में जुडी कील से चिपक जाता है।
पहला दोहा मनुष्य की अनित्यता के कारण वैराग्य उपजाता है, लेकिन दूसरा दोहा मन में आशा और आस्था का दीपक दिखाता है। आवागमन रूपी दो पाटों में फँसा जीव अपने दायित्वों को निभाते हुए सदा ऐसे ही पिसता रहता है।
कुछ प्रश्न मन में उठते हैं कि बचकर क्या जीवन और मृत्यु से मुक्त हो सकते है? क्या काल को वश में किया जा सकता है? पानी के बुलबुले जैसे इस नश्वर जीवन को क्या स्थायित्व मिल सकता है? पल-पल नष्ट होते हुए इस शरीर को सदा यथावत रखा जा सकता है?
इन सभी प्रश्नों का उत्तर न ही है। जो मनुष्य प्रभु भक्ति के मार्ग पर चल पड़ता है और उसके प्रति पूर्ण रूप से समर्पित हो जाता है, केवल वही बच सकता है। हर तरफ से स्वयं को समेटकर सिर्फ उस मालिक के साथ एकाकार हो जाना ही इस ज्ञान है, मूल मन्त्र है।
जन्म और मृत्यु के इस भय से बचने का ही साधन है मुक्ति। मनीषी इसे निर्वाण, परम पद और अभय पद आदि कहते हैं। इस अवस्था को शरीर की सीमा में रहते हुए पाया जा सकता है। अपने अन्तस के शत्रुओं काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार से स्वयं को मुक्त कराना ही मोक्ष पाना है।
मनुष्य को वीतरागी होना चाहिए। सभी विपरीत गुणों का अतिक्रमण करने से ही व्यक्ति गुणातीत होगा। जीवन के तमाम परस्पर विरोधी भाव चक्की के दो पाटों की तरह हैं। पाप और पुण्य दोनों कर्म बन्धन की वजह बनते हैं।
राग-द्वेष आदि भाव संसार समाज, परिवार, राष्ट्र में हमेशा ही रहेगा। यदि मनुष्य स्वयं को इनसे विलग करके मुक्त हो सकता है। जीवन के सभी विरोधी प्रतीत होने वाले भावों में जो सम रहता है, उसे उपनिषद ऋषियों और भगवान श्रीकृष्ण ने कर्मयोगी कहा है। वही जन्म और मृत्यु के बन्धनों को काट सकता है। तब वह काल का ग्रास नहीं बनता।
जीवन का द्वैत भाव उसे चक्की के दो पाटों की तरह ही खा जाता है। जो सच्ची श्रद्धा और अपने निश्चित मन से कीले में चिपके अनाज की तरह उस परमपिता परमात्मा के सदैव समीप रहता है, वही इस भव सागर को पार कर लेता है। जो अपने सांसारिक दायित्वों का निर्वहण करते हुए चौबिसों घण्टे अपने हृदय में प्रभु का स्मरण करता रहता है, वह बालक भक्त प्रह्लाद की तरह हर प्रकार के भौतिक कष्टों से मुक्त हो जाता है।
चन्द्र प्रभा सूद

अगला लेख: डिप्रेशन या अवसाद



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
29 जनवरी 2021
सहारे की खोजअपना जीवन जीने के लिए आखिर किसी दूसरे के सहारे की कल्पना करना व्यर्थ है। किसी को बैसाखी बनाकर कब तक चला जा सकता है? दूसरों का मुँह ताकने वाले को एक दिन धोखा खाकर, लड़खड़ाकर गिर जाना पड़ता है। उस समय उसके लिए सम्हलना बहुत कठिन हो जाता है।           बचपन की बात अलग कही जा सकती है। उस समय मनुष
29 जनवरी 2021
04 फरवरी 2021
प्
प्रैशर से खो रहा बचपनछोटे-छोटे बच्चों पर भी आज प्रैशर बहुत बढ़ता जा रहा है। उनका बचपन तो मानो खो सा गया है। जिस आयु में उन्हें घर-परिवार के लाड-प्यार की आवश्यकता होती है, जो समय उनके मान-मुनव्वल करने का होता है, उस आयु में उन्हें स्कूल में धकेल दिया जाता है। अपने आसपास देखते हैं कि इसलिए कुकु
04 फरवरी 2021
27 जनवरी 2021
दू
दूसरों को हँसानाकिसी व्यक्ति के हँसते-मुस्कुराते हुए चेहरे को देखकर यह अनुमान लगाना कदापि उचित नहीं है कि उसे अपने जीवन में कोई गम नहीं है। अपितु यह सोचना अधिक समीचीन होता है कि उसमें सहन करने की शक्ति दूसरों से कुछ अधिक है।         पता नहीं अपनी कितनी मजबूरियों और परेशानियों को अपने सीने में छुपाकर
27 जनवरी 2021
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x