कवींन बी मेरी माँ

15 फरवरी 2021   |  शोभा भारद्वाज   (409 बार पढ़ा जा चुका है)

कवींन बी मेरी माँ

क्वीन बी मेरी माँ ( आज मेरी माँ का जन्म दिन है वह कितने वर्ष की हो गयी हैं हम जानना नहीं चाहते )

डॉ शोभा भारद्वाज

मेरी माँ के पिता अर्थात मेरे जागीरदार नाना कालेज में प्रिंसिपल और जाने माने अंकगणित के माहिर थे . मेरी नानी अंग्रेजों के समय में विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार ( पिकेटिंग ) करने के लिए धरने देती थीं. मेरे चारो मामा स्वतन्त्रता सेनानी थे एक मामा जी आजाद हिन्द फौज में भाग लेने सुमात्रा गये थे मेरी माँ और मौसी के स्कूल में उस जमाने में लड़कियों को लाठी चलानी सिखाई जाती थी मेरी मौसी दोनों हाथों से लाठी चलाती थी और मेरी माँ एक हाथ से, पूरा परिवार एक आदर्श परिवार था . उन दिनों ब्राह्मणों में संगीत ,ज्योतिष और आयुर्वेद सीखने का प्रचलन था नाना जी ने घर में सूरदास से अपने बच्चों को क्लासिकल म्यूजिक की शिक्षा दिलवाई मेरी अम्मा आज भी बहुत अच्छा गाती हैं .

मेरे पिता जी साधारण परिवार से थे लेकिन उन्होंने पढाई में स्कूल कालेज में सदा रिकार्ड रिकार्ड बनाया . मेरे नाना को मेरे पिता बहुत पसंद आये उन्होंने रिश्ते की बात चलाई विवाह हो गया .मेरे पिता जी बहुत गोरे हेंडसम थे . मेरी दादी ने बहू को देखा घबरा गई उनके घुटनों तक लंबे भारी बाल गेहुआं रंग यह तो उनके बेटे को मोहित कर लेगी . जब हम बड़े हुए पूछते माता जी मोहित क्या होता है ?वह चिढ़ कर कहती अरे नयनतारा बन जायेंगी तुम्हारी माँ .बहुत अच्छे दिन थे अम्मा सख्त थी पिता जी नर्म और हमारी दादी, हम उन्हीं को अपनी माँ समझते थे .सुबह हम सब की आँख अम्मा के राग भैरवी गायन से खुलती कभी पिता जी भी उसमें सुर मिलाते अम्मा ने सबको हौबी में संगीत की शिक्षा दी मुझे भी सिखाने की कोशिश की परन्तु हारमोनियम के स्वर से कभी मेल नही बैठा अत :अम्मा कहती बेसुरी तेरे बस का गाना नहीं हैं आज भी घर में भजन कीर्तन होता हैं मैं बस ताली बजाती हूँ .

मुझ ग्रेजुएशन करनी थी घर से कालेज पांच मिनट की दूरी पर था लेकिन केवल लडकियों का कालेज काफी दूर था मुझे मेरी दादी के विरोध के बाद भी कोएजुकेशन में पढ़ने भेजा पढाई पूरी करने के बाद पी.एच .डी. करने दिल्ली भेजा गयी पढ़ाई के मामले में अम्मा बेहद सख्त थी वह साइंस के अलावा किसी विषय को विषय ही नहीं समझती हम चार बहने दो भाई थे मेरी शादी भी दिल्ली में हुई मेरे पति देव का वर्णन करते समय वह उनकी डिग्री बाद में बताती इनका इस तरह बखान करतीं वह पुलिस का डाक्टर है बहुत सख्त मिजाज सिद्धांत वादी शादी के कुछ समय बाद मैं विदेश चली गयी .

मेरी माँ पिता जी में बहुत प्रेम था एक दिन मेरे पिता जिन्होंने कभी माँ के सामने पीठ नहीं मोड़ी थी ऐसी मोड़ी फिर कभी नही उठे . मैं विदेश में थी अम्मा ने गजब की हिम्मत दिखाई पिता जी को नोएडा से मेरठ अपने घर ले कर आयीं . जब मेरे पिताजी की शव यात्रा निकली पीछे भीड़ ही भीड़ माँ ने बच्चों को संयत रहने को कहा अपने आंसू पी गयीं सबसे छोटी बहन सुन्न हो गई वह उठ नही सकती थी मेरे पिता जी को श्रद्धान्जली देने के लिए भारी भीड़ थी अचानक छोटा भाई चीखने लगा अम्मा सब संकोच छोड़ कर उसको संयत करने लगी लिख नहीं सकती घर पर कैसा पहाड़ टूटा था बस जिन्दा रहे .पिता जी के लाडले बच्चे उन्हें सम्भालना आसान नहीं था .

अपने माता पिता की लाड़ली छोटी बेटी अचानक रानी मधुमक्खी (मेरे पति का दिया नाम ) बन गई .किसी से मदद नहीं ली, सबने सिर जोड़ कर अम्मा के सुपरवीजन में बहुत मेहनत की उनका चलता स्कूल था आज नोएडा के सम्मानित लोगों की श्रेणी में आते हैं सब कुछ है बस नहीं हैं तो हमारे पिता जी अम्मा गजब की कर्मठ डूबता जहाज उनकी मेहनत और संयम से धीरे – धीरे पार उतरता गया . मेरी भांजी स्कालर शिप पर विदेश पढ़ने गई लॉस एंजेल्स से डिग्री हासिल कर विवाह के बाद बम्बई में फिल्म लाइन में फिल्म निर्देशन एवं स्क्रिप्ट राईटिंग में नामी डायरेक्टर के अंडर में नाम कमाया आज अमेरिका में बहुत ऊचे पद पर काम कर रही हैं. जब वह बम्बई में थी उसके घर एक नन्हीं बच्ची ने समय से पहले जन्म लिया वह बेहद कमजोर थी उसने अम्मा को बुलाया अम्मा आप ही मेरी बेटी को बचा सकती हो और अम्मा 84वर्ष की उम्र में बम्बई गई उस बच्ची को बचा लिया . भरापूरा परिवार सभी अपने में सम्पूर्ण .

अम्मा को अपनी आगे की जेनरेशन की भी चिंता रहती है बच्चों की नजर में हम सख्त माता पिता हैं पीछे से हमें स्टोन ऐज के जब पत्थरों से शिकार होता है कहते थे मम्मा पापा का पहला शौक पढ़ाई पर लेक्चर देना या टेस्टों के नम्बर पूछना है लेकिन हमारी नानी हमारी दोस्त है वह क्रिकेट और फ़ुटबाल की शौकीन है खिलाड़ियों के बारे में बात करती हैं आप उनसे बात कीजिये आपको कौन सा खिलाड़ी पसंद है क्यों पसंद है बतायेगी ? न्यूज की बहुत शौकीन हैं देश में कहीं भी कुछ हो जाये उन्हें चिंता हो जाती है . अखबार शुरू से आखिर तक पढ़ती हैं .वह सीरियल भी देखती है उन पर बहस भी करती हैं हमारे साथ इंग्लिश फिल्म देखने जाती है वह क्लासिकल म्यूजिक जानती हैं परन्तु वेस्टर्न म्यूजिक भी बच्चों के साथ सुनती हैं .

कुछ वर्ष पूर्व प्रगति मैंदान में अवार्ड विनिंग फ़िल्में लगती थी अम्मा बच्चों को इंग्लिश फिल्म देखने ले जाती मैने अम्मा से पूछा अम्मा आप इंग्लिश फिल्में कैसे समझ लेती है उन्होंने बताया दोनों लड़कियाँ मेरे साथ सिर जोड़ लेती हैं डायलोग का धीरे-धीरे तर्जुमा करती रहती हैं बाकी तो एक्शन ही हैं तुम्हें तो फिल्म के नाम से अलर्जी हैं क्या बच्चे अकेले भेजे जाएँगे ? झाड़ अलग पड़ी. पोतियों की प्यारी दादी उनकी स्कूल की पढ़ाई कैरियर का हिसाब रखती हैं . अब ऊंचा सुनने लगी हैं परन्तु उनकी हर बात समझ जाती हैं .बच्चियां घर से दूर पढ़ने गयीं कभी नहीं रोका .

16 मई के दिन हमारे अनोखे पिता ने संसार से विदा ली थी अत: उनकी पुण्य तिथि के दिन इकट्ठा होते हैं सब बेहद उदास, काफी समय बीत गया ऐसा लगता है कल की बात है कभी कोई पिताजी कह कर चीखने लगता है हम सब रोने लगते हैं अम्मा सबको चुप कराती है कोई भी कह देता हैं अगर अम्मा तुम चली गई तो हम भी तुम्हारे साथ ही सता हो जायेंगे .अगली जेनरेशन के सब बच्चे अम्मा से बेहद प्यार करते हैं उनका जन्म दिन मनाते हैं बकायदा पोतियाँ एंकरिंग करती हैं अम्मा केक काटती हैं . आज उनका जन्म दिन है .

कवींन बी मेरी माँ

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