कोरोना कर्फ्यू।

11 अप्रैल 2021   |  जानू नागर   (411 बार पढ़ा जा चुका है)

"तुम दिन को दिन कह दोगे, तो रात को हम दोहरायेंगे" आज वही रात अलग होकर नाइट कर्फ्यू बनी। इस गाने की वजह से किसी ज्ञानी मानव ने उपरोक्त गाने के बोल को समझा और नाइट कर्फ्यू को भी कोरोना कर्फ्यू बना दिया।

जिसमे मानव के हालात, जज़्बात सब स्थिरता की ओर कदम बढ़ाए हुए है। कोरोना वक्त बे वक्त उन्ही हालात और जज्बातों को कफ़न ओढ़ाए हुए है। न कब्र में न शमशान में जगह है। सभी को सी.एन. जी की भट्टी में जलाए हुए है। सारे नाते रिश्ते धरे के धरे राह गए, जिन्हें जाना था वह कोरोना में चले गए। कभी मौत के आकड़ो को छुपाया गया। आज उन्ही मौत के आकड़ो को खुद की जुबान में लाने लागे। तस्वीर अजीब से बन गई देश की रेल, जहाज सब डगमगाए हुए है। न अर्थ है, न व्यवस्था अब सभी ब्यर्थ में अर्थव्यवस्था को समझाए पड़े है।

अगला लेख: बेवजह न उलझो।



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x