माँ दुर्गा की उपासना के लिए पूजन सामग्री - नारियल

17 अप्रैल 2021   |  कात्यायनी डॉ पूर्णिमा शर्मा   (439 बार पढ़ा जा चुका है)

माँ दुर्गा की उपासना के लिए पूजन सामग्री - नारियल

माँ दुर्गा की उपासना के लिए पूजन सामग्री - नारियल

साम्वत्सरिक नवरात्र चल रहे हैं और समूचा हिन्दू समाज माँ भगवती के नौ रूपों की पूजा अर्चना में बड़े उत्साह, श्रद्धा और आस्था के साथ लीन है | इस अवसर पर कुछ मित्रों के आग्रह पर माँ दुर्गा की उपासना में जिन वस्तुओं का मुख्य रूप से प्रयोग होता है उनके विषय में लिखना आरम्भ किया है | पारम्परिक रूप से जो सामग्रियाँ माँ भगवती की उपासना में प्रमुखता से प्रयुक्त होती हैं उनका अपना प्रतीकात्मक महत्त्व होता है तथा प्रत्येक सामग्री में कोई विशिष्ट सन्देश अथवा उद्देश्य निहित होता है...

अभी तक हमने कलश तथा कलश स्थापना और वन्दनवार तथा यज्ञादि में प्रयुक्त किये जाने वाले आम्रपत्र और आम्र वृक्ष की लकड़ी, दीपक तथा पुष्पों इत्यादि के विषय में लिख चुके हैं... अब आगे...

घट स्थापना में तथा पूजा कार्य में नारियल का विशेष महत्त्व होता है | नारियल के गुणों से तो हम सभी परिचित हैं | शीतल तथा स्निग्ध गुण धर्म इसका होता है | माना जाता है कि इसमें सभी देवों का वास होता है तथा देवी को यह अत्यन्त प्रिय होता है – इसीलिए नारियल को संस्कृत में श्रीफल कहा जाता है | किसी भी शुभकार्य के आरम्भ में नारियल तोड़ने की प्रथा है – नारियल के बाह्य आवरण को यदि अहंकार का प्रतीक तथा भीतरी भाग को पवित्रता और शान्ति का प्रतीक माना जाए तो इसका महत्त्व स्वतः ही समझ में आ जाता है | पूजा की समाप्ति पर नारियल तोड़ने का भी यही अभिप्राय है कि व्यक्ति ने अपने अहंकार को समाप्त कर दिया | नारियल में ब्रह्मा, विष्णु, महेश तीनों देवों का वास माना जाता है |

कुछ लोगों की ऐसी भी मान्यता है कि एक समय धार्मिक कार्यों में मनुष्य और पशुओं की बलि सामान्य बात थी | कहते हैं उस समय आदि शंकराचार्य ने इस अमानवीय परम्परा को तोड़ा और मनुष्य अथवा पशु के स्थान पर नारियल अर्पित करने की प्रथा आरम्भ की | नारियल देखा जाए तो मनुष्य के मस्तिष्क से मेल खाता है | नारियल की जटा की तुलना मनुष्य के बालों से, कठोर कवच की तुलना मनुष्य की खोपड़ी से, भीतर के गूदे की तुलना मनुष्य के दिमाग़ से नारियल पानी की तुलना रक्त से की जा सकती है |

नारियल से पूर्व कलश में जो दूर्वा, कुश, सुपारी, पुष्प आदि डाले जाते हैं उनमें भी यही भावना निहित होती है कि हमारे भीतर दूर्वा जैसी जीवनी शक्ति बनी रहे, कुश जैसी प्रखरता हमारे ज्ञान में विद्यमान रहे, सुपारी के समान गुणों से युक्त स्थिरता रहे तथा पुष्प के सामान सर्वग्राही गुणों का निवास हमारे मन में हो जाए |

इसके अतिरिक्त सुपारी को सभी देवों का प्रतीक भी माना जाता है और इसीलिए नवग्रह उपासना में नवग्रहों के प्रतीक स्वरूप सुपारी रखी जाती है | गणेश जी का रूप भी सुपारी को माना जाता है और गणेश जी की प्रतिमा न होने पर सुपारी में मौली बाँधकर उसे ही गणेश जी मानकर पूजा की जाती है | किसी भी अनुष्ठान में जहाँ पति पत्नी दोनों का होना अनिवार्य हो वहाँ यदि एक उपस्थित न हो तो उसके स्थान पर भी सुपारी को रखने की प्रथा है |

नवरात्रों के पावन नौ दिनों में दुर्गा माँ के नौ स्वरूपों की पूजा उपासना बड़े उत्साह के साथ की जाती है – चाहे चैत्र नवरात्र हों अथवा शारदीय नवरात्र | माँ भगवती को प्रसन्न करने के लिए और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए कुछ विशेष सामग्रियों से उनकी पूजा की जाती है | यद्यपि माँ क्योंकि एक माँ हैं तो साधारण रीति से की गई ईशोपासना भी उतनी ही सार्थक होती है जितनी कि बहुत अधिक सामग्री आदि के द्वारा की गई पूजा अर्चना | साथ ही जिसकी जैसी सुविधा हो, जितना समय उपलब्ध हो, जितनी सामर्थ्य हो उसी के अनुसार हर किसी को माँ भगवती अथवा किसी भी देवी देवता की पूजा अर्चना उपासना करनी चाहिए... वास्तविक बात तो भावना की है... भावना के साथ यदि अपने पलंग पर बैठकर भी ईश्वर की उपासना कर ली गई तो वही सार्थक हो जाएगी...

अगला लेख: व्रत और उपवास



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
13 अप्रैल 2021
माँ दुर्गा के पूजन की विधिआजचैत्र शुक्ल प्रतिपदा के साथ ही नवसंवत्सर का आरम्भ हुआ है और माँ भगवती की उपासनाका पर्व नवरात्र आरम्भ हो चुके हैं | सभी को हिन्दू नव वर्ष तथा साम्वत्सरिकनवरात्रों की हार्दिक शुभकामनाएँ...कुछमित्रों का आग्रह है कि नवरात्रों में माँ भगवती की उपासना की विधि तथा उसमेंप्रयुक्त
13 अप्रैल 2021
08 अप्रैल 2021
हमें पहले स्वयं को बदलना चाहिए जी हाँ मित्रों, दूसरों को अपने अनुरूप बदलने के स्थान पर हमें पहले स्वयं को बदलनेका प्रयास करना चाहिए | अभी पिछले दिनों कुछ मित्रों के मध्य बैठी हुई थी | सब इधरउधर की बातों में लगे हुए थे | न जाने कहाँ से चर्चा आरम्भ हुई कि एक मित्र बोलउठीं “देखो हमारी शादी जब हुई थी तब
08 अप्रैल 2021
14 अप्रैल 2021
माँ दुर्गा की उपासना के लिए पूजन सामग्रीसाम्वत्सरिकनवरात्र आरम्भ हो चुके हैं | इस अवसर पर नौ दिनों तक माँ भगवती के नौ रूपों कीपूजा अर्चना की जाती है | कुछ मित्रों ने आग्रह किया था कि माँ दुर्गा की उपासनामें जिन वस्तुओं का मुख्य रूप से प्रयोग होता है उनके विषय में कुछ लिखें | तो, सबसे पहले तो बतानाचा
14 अप्रैल 2021
08 अप्रैल 2021
हमें पहले स्वयं को बदलना चाहिए जी हाँ मित्रों, दूसरों को अपने अनुरूप बदलने के स्थान पर हमें पहले स्वयं को बदलनेका प्रयास करना चाहिए | अभी पिछले दिनों कुछ मित्रों के मध्य बैठी हुई थी | सब इधरउधर की बातों में लगे हुए थे | न जाने कहाँ से चर्चा आरम्भ हुई कि एक मित्र बोलउठीं “देखो हमारी शादी जब हुई थी तब
08 अप्रैल 2021
23 अप्रैल 2021
भा
<!--[if gte mso 9]><xml> <o:OfficeDocumentSettings> <o:AllowPNG/> </o:OfficeDocumentSettings></xml><![endif]--><!--[if gte mso 9]><xml> <w:WordDocument> <w:View>Normal</w:View> <w:Zoom>0</w:Zoom> <w:TrackMoves/> <w:TrackFormatting/> <w:PunctuationKerning/> <w:Valid
23 अप्रैल 2021
25 अप्रैल 2021
कोरोना औरमहावीर जयन्तीजय श्रीवर्द्ध्मानाय स्वामिने विश्ववेदिनेनित्यानन्दस्वभावाय भक्तसारूप्यदायिने |धर्मोSधर्मो ततो हेतु सूचितौ सुखदुःखयो:पितु: कारणसत्त्वेन पुत्रवानानुमीयते ||आज चैत्र शुक्ल त्रयोदशी है – भगवान् महावीर स्वामी कीजयन्ती का पावन पर्व | तो सबसे पहले तो सभी कोमहावीर जयन्ती की हार्दिक शुभ
25 अप्रैल 2021
22 अप्रैल 2021
पृथिवी दिवसआज समूचा विश्व पृथिवी दिवसयानी Earth Day मना रहा है | आज प्रातः से ही पृथिवी दिवस केसम्बन्ध में सन्देश आने आरम्भ हो गए थे | कुछ संस्थाओं ने तो वर्चुअल मीटिंग्सयानी वेबिनार्स भी आज आयोजित की हैं पृथिवी दिवस के उपलक्ष्य में – क्योंकि कोरोना के कारण कहीं एक स्थान पर एकत्र तो हुआ नहीं जा सकता
22 अप्रैल 2021
30 अप्रैल 2021
आज हरकोई डर के साए में जी रहा है | कोरोनाने हर किसी के जीवन में उथल पुथल मचाई हुई है | जिससे भी बात करें हर दिन यही कहता मिलेगा कि आज उसके अमुकरिश्तेदार का स्वर्गवास हो गया कोरोना के कारण, आज उसका अमुक मित्र अथवा परिचित कोरोना की भेंट चढ़ गया | पूरे के पूरे परिवार कोरोना की चपेटमें आए हुए हैं | हर ओ
30 अप्रैल 2021
18 अप्रैल 2021
माँ दुर्गा की उपासना केलिए पूजन सामग्री साम्वत्सरिक नवरात्र चल रहे हैंऔर समूचा हिन्दू समाज माँ भगवती के नौ रूपों की पूजा अर्चना में बड़े उत्साह,श्रद्धा और आस्था के साथ लीन है | इस अवसर पर कुछ मित्रों के आग्रह पर माँ दुर्गाकी उपासना में जिन वस्तुओं का मुख्य रूप से प्रयोग होता है उनके विषय में लिखनाआरम
18 अप्रैल 2021
14 अप्रैल 2021
माँ दुर्गा की उपासना के लिए पूजन सामग्रीसाम्वत्सरिकनवरात्र आरम्भ हो चुके हैं | इस अवसर पर नौ दिनों तक माँ भगवती के नौ रूपों कीपूजा अर्चना की जाती है | कुछ मित्रों ने आग्रह किया था कि माँ दुर्गा की उपासनामें जिन वस्तुओं का मुख्य रूप से प्रयोग होता है उनके विषय में कुछ लिखें | तो, सबसे पहले तो बतानाचा
14 अप्रैल 2021
27 अप्रैल 2021
हनुमान जयन्तीआज चैत्र पूर्णिमा है... और कोविडमहामारी के बीच आज विघ्नहर्ता मंगल कर्ता हनुमान जी – जो लक्ष्मण की मूर्च्छा दूरकरने के लिए संजीवनी बूटी का पूरा पर्वत ही उठाकर ले आए थे... जिनकी महिमा का कोईपार नहीं... की जयन्ती है… जिसे पूरा हिन्दू समाज भक्ति भाव से मनाता है... कल दिनमें बारह बजकर पैंताल
27 अप्रैल 2021
01 मई 2021
जैसा कि हम सभी जानते हैं कि आज समूचा देशकोरोना के आतंक से जूझ रहा है... न जाने कितने परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोयाहै... पूरे के पूरे परिवार कोरोना से संक्रमित होते जा रहे हैं... ऊपर से ऑक्सीजनऔर दवाओं की कालाबाज़ारी... जमाखोरी... साथ में तरह तरह की अफवाहें... और इस सबकापरिणाम है कि आज हर कोई डर
01 मई 2021
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x